श्वास पर नियंत्रण से प्रसन्न रहता है मन

जब आप शांत होते हैं तब आप की सांस बहुत धीमे से चलती है और जब क्रोधित हो जाते हैं तो एकदम जोर से चलती है. मतलब मन और सांस का बहुत गहरा संबंध है. मन को आप पकड़ नहीं सकते क्योंकि मन अव्यक्त है. उसका न तो कोई रंग है और न रूप. आप आंख बन्द करके राम-राम जपते हैं या हरे कृष्णा-हरे कृष्णा कहते हैं किन्तु मन कहीं और दौड़ता रहता है. मन वश के बाहर है.

देखना है कि मन किस पर टिका है, तब मालूम होता है कि मन श्वास पर टिका है और उसको आप बदल सकते हैं. उसको धीरे से ले सकते हैं और धीरे से छोड़ सकते हैं. जोर से ले सकते हैं और जोर से छोड़ सकते हैं. श्वास पर ध्यान देने से मन जल्दी काबू में आता है, शांत हो जाता है. श्वास द्वारा आप मन को काबू में ला सकते हैं.

इसलिए कहते हैं कि चित्त का जो विक्षेप है, जो तनाव है और शरीर में जो मल है, यह सब प्राणायाम करने से दूर हो जाते हैं और जब चित्त शांत हो जाता है, तब चित्त में प्रकाश झलकता है. आप सीधे आत्मा को याद करके आत्मज्ञान में बैठ जाओ, तब भी प्राणायाम सहज रूप में होने लगेगा, ध्यान भी होने लगेगा. शरीर भी स्वस्थ्य रहेगा. शरीर स्वस्थ्य रहेगा तो मन भी प्रसन्न व प्रेममय रहेगा.

– श्री श्री रविशंकर (आर्ट ऑफ लिविंग)

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