भारत के चमत्कारी संत : बाबा छोटूनाथ

कहा जा सकता है कि देवी-देवता और संत-महात्मा किसी एक धर्म या समुदाय विशेष के न होकर पूरी मानव जाति के होते हैं और अपने आशीर्वचनों से समस्त प्राणी जगत का भला करते हैं। ऐसे ही एक सिद्ध तपस्वी हुए हैं भिवानी जिले के गांव जाटू लोहारी में जन्मे बाबा छोटूनाथ जिन्होंने अपना पूरा जीवन नि:स्वार्थ भाव से मानव जाति के कल्याण में लगा दिया. ग्रामीण श्रद्धालुओं का कहना है कि बाबा छोटूनाथ का जन्म वर्ष 1959 में भिवानी जिले के गांव जाटू लोहारी में ठाकुर बुद्धसिंह के घर कमला देवी की कोख से हुआ.

आरंभ में इनका नाम रघुवीर सिंह रखा गया किंतु अपने भाइयों में सबसे छोटा होने कारण उनका नाम नान्हडि़या पड़ गया व बाद में उन्हें गांव में छोटू कहकर पुकारा जाने लगा. बचपन में इनके माता-पिता का देहांत हो गया और मात्र चौदह वर्ष की उम्र में ये मानव कल्याण की भावना के वशीभूत होकर गृह त्याग करके रोहतक के पास अस्थल बोहर स्थित साधुओं के डेरे में जा पहुंचे जहां उन्हें नया नाम मिला बाबा छोटूनाथ.

इसी नाम से बाबा छोटूनाथ ने भिवानी जिले के तिगड़ाना, खरकड़ी व बापोड़ा गांवों में तपस्या की व तपोबल से सिद्धी-प्रसिद्धि को प्राप्त किया. बाबा छोटूनाथ की सिद्धी-प्रसिद्धि की चर्चा दूर-दूर तक फैलने पर जाटू लोहारी के ग्रामीणों ने प्रयास किया कि वे अपने गांव में आकर रहें और वहीं पर तपस्या करें किंतु वे अपने गांव नहीं लौटे. ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 1992 में जब बाबा छोटूनाथ का स्वास्थ्य बहुत अधिक खराब हुआ तो गांव के कुछ लोग इन्हें गांव ले आए और यहीं पर वे जुलाई 1992 में पंचतत्व में विलीन हुए.

गांव में जहां पर इन्हें समाधि दी गई वहीं पर बाद में बाबा छोटूनाथ मंदिर का निर्माण करवाया गया. मंदिर के पास ही छोटूनाथ पार्क का निर्माण भी किया गया है। छायादार पेड़-पौधों से आच्छादित लगभग दस एकड़ में फैले बाबा छोटूनाथ के इस भव्य मंदिर परिसर में हनुमान, शिव, राम-लक्ष्मण और सीता आदि के मंदिर भी बनाए गए हैं जिनमें अनेक देवी-देवताओं की भव्य प्रतिमाओं को स्थापित किया गया है.

बाबा छोटूनाथ मंदिर में प्रतिदिन हर समुदाय के लोग पूजा-अर्चना के लिए आते रहते हैं लेकिन श्रावण मास की दूज को यहां पर विशाल मेला व भंडारा लगाया जाता है जिसमें दूर-दराज से अनेक श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां पर मेले में खेलों का आयोजन भी किया जाता है.

यह बाबा छोटूनाथ में श्रद्धा की पराकाष्ठा ही है कि उनका आशीर्वाद लेने के लिए यहां दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है. श्रद्धालु मानते हैं कि जो भी मंदिर में आकर श्रद्धा से शीश झुकाता है तो बाबा छोटूनाथ उनकी मनोकामना जरूर पूरी करते हैं.

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