बंद नोटों को जमा कराने का एक और मौका ख़त्म कर देगा नोटबंदी का मकसद : केंद्र

नई दिल्ली. पुराने 500 और 1000 रुपये के नोटों को जमा कराने के लिए एक बार फिर से मौका दिए जाने पर नोटबंदी का पूरा मकसद ही खत्म हो सकता है. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से नागरिकों को पुराने नोट जमा कराने के लिए एक और मौका दिए जाने को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में सोमवार को यह बात कही.

इस महीने की शुरुआत में ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि केंद्र सरकार को ऐसे लोगों को पुराने नोट जमा कराए जाने का मौका देने पर विचार करना चाहिए, जो जायज कारणों से तय समय में इन्हें जमा नहीं करा पाए.

केंद्र सरकार ने नोटबंदी के बाद 9 नवंबर से 30 दिसंबर तक 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को जमा कराने का अवसर दिया था. कई नागरिकों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर पुराने नोटों को जमा करने के लिए एक मौका फिर दिए जाने की मांग की थी.

इन याचिकाकर्ताओं में कई महिलाएं भी शामिल थीं. एक महिला का कहना था कि वह गर्भवती थी और बच्चे को जन्म देने वाली थी, इसलिए पुराने नोटों को जमा नहीं करा पाई. वहीं, एक अन्य महिला ने कहा कि वह गंभीर बीमारी के चलते मौत से जंग लड़ रही थी. इसके चलते वह तय समय में पुराने नोट बैंक में जमा नहीं करा पाई.

5 जुलाई को इस मामले की आखिरी सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जेएस खेहर ने कहा था, ‘यदि कोई वास्तविक कारणों से पुरानी करंसी जमा नहीं करा पाया तो उसे मौका मिलना चाहिए. आप उसके पैसे को उससे छीन नहीं सकते, वह उसकी कमाई है.’

केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि पहले भी पुराने नोट जमा कराने के अवसरों का इस्तेमाल करते हुए रेल टिकट और पेट्रोल पंपों पर इन्हें खपाने के मामले सामने आए थे. अब एक बार फिर से ऐसा मौका दिया जाता है तो फिर ऐसा दुरुपयोग बढ़ सकता है.

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