तेजस्वी का अंजाम जान ही, उन्हें हटाने पर अड़े हैं नितीश!

ऐसा अक्सर कहा जाता है कि भविष्य के गर्भ में क्या है इस बात को कोई नहीं जान सकता है… परंतु बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार को अपनी सरकार और गठबंधन के भविष्य के बारे में सारी बातें पता हैं.

एक ऐसा मुख्यमंत्री जो एक सहयोगी पार्टी की बैसाखी के सहारे सरकार चला रहा हो, उस पार्टी का ‘लाल’ उपमुख्यमंत्री हो, और ऐसे में उस पार्टी के लाल को वह मुख्यमंत्री अल्टीमेटम दे दे… हटाने को तैयार हो जाए… तो इसे यही माना जाएगा कि मामला वाकई गंभीर है.

सीधे शब्दों में समझ लें कि नितीश कुमार को यह पक्का पता है कि लालू का कुनबा हर हाल में गिरफ्तार होने वाला है… और यह भी कि गिरफ्तारी जल्द होगी… यह गिरफ्तारी जिन सबूतों के आधार पर होंगी, वे इतने संगीन और पुख्ता हैं कि सुप्रीम कोर्ट भी इनकी ज़मानत की अर्जी स्वीकार नहीं कर सकता है.

यह महत्वपूर्ण जानकारी नितीश तक किसने, कैसे और कब पहुँचाई, यह राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है… 17 जुलाई को राष्ट्रपति के चुनाव के बाद देश की राजनीति में कुछ बड़ा होने वाला है.

अब तक तो लालू के परिवार में दोनों बेटों और बेटी मीसा भारती से सिर्फ पूछताछ होती रही थी आईटी, सीबीआई और इन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट के द्वारा… परंतु अब सीधे गिरफ्तारी होगी…. और फिर ये एजेंसियाँ अपना पक्ष कोर्ट के सामने प्रस्तुत करेंगी.

पीएमओ और वित्त मंत्रालय के बीच… 6 पन्नों के उस ‘सीक्रेट नोट’ को लेकर विस्तृत चर्चा हो चुकी है जिसे सीबीआई ने पीएमओ को कुछ दिनों पहले सौंपा था. अजित डोभाल और पीएमओ के कुछ विश्वस्त नौकरशाहों के अलावा इस सीक्रेट नोट के अंदर की बातों को कोई नहीं जानता है.

अब तक तो ये माना जा रहा था कि मीसा भारती के खिलाफ केस उतना पुख्ता नहीं है जितना उसके पति शैलेष कुमार के खिलाफ है… परंतु अब दोनों भाइयों के अलावा मीसा भारती और पति शैलेष भी शायद ही जमानत करवा पाये.

कहने का मतलब, कि यह साफ है कि बिहार के प्रथम परिवार का सूरज अब डूब चुका है… नितीश भी यह बात जानते है .

उन्होंने जो कड़ा रुख अपनाया है वह बीजेपी की वजह से नहीं बल्कि उसकी वजह है कि भविष्य में क्या होगा उन्हें पता है… उन्हें पता है कि लालू परिवार के साम्राज्य का पतन निश्चित है.

और इसलिए, यदि नितीश पहले ही कार्रवाई करके तेजस्वी का इस्तीफा ले लेते हैं तो उन्हें भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े होकर कार्रवाई करने का पॉलिटिकल माइलेज मिल जाएगा… वरना तेजस्वी के गिरफ्तारी के बाद तो नितीश पर आखिरी समय तक तेजस्वी को संरक्षण देने और बचाव करने का इल्जाम लग जाएगा.

तब नितीश की जो फजीहत होगी उसकी भरपाई वे नहीं कर सकते हैं, ना रहेंगे घर के ना घाट के.

आज यानी रविवार को, मोदी ने सर्वदलीय बैठक में भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ने के लिए सभी दलों का जो सहयोग मांगा है, कई नेताओं को आश्चर्य में डाल दिया क्योंकि यह बैठक का कोर मुद्दा नहीं था.

इशारा साफ है… आप चाहे जितने बड़े नेता हों… चाहे जितनी लॉबी बना लें…. गीदड़ भभकी दे लें… राजनीतिक संरक्षकों के तलवे रगड़ लें… परंतु यदि आपके खिलाफ सबूत है तो आप नहीं बचेंगे… क्योंकि यह मोदी राज है.

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