कहीं आप भी ऐसी किसी बीमारी से ग्रसित तो नहीं!

फ्रॉयड का एक प्रसिद्ध केस है. एक औरत के बायें पैर में पैरालायसिस हो जाता है.. तमाम डॉक्टर इलाज करते हैं पर ना तो बीमारी की वजह पता चलती है और ना ही कोई इलाज काम आता है. अंत में मामला फ्रायड के पास आता है, जो तमाम टेस्ट रिजल्ट के बजाय उस औरत के इतिहास को खंगालते हैं..

कुछ साल पहले की बात थी जब उस औरत का प्रेम प्रसंग अपनी बहन के पति के साथ शुरू हुआ.. उन दिनों इसके पिता बाएं पैर में बीमारी से ग्रसित थे. एक शाम पिता के पैर में काफी दर्द हो रहा था और उन्होंने इसे घर से बाहर जाने के लिए मना किया, पर वह अपने प्रेमी से मिलने का वादा कर चुकी थी तो पिता को थोड़ी देर में वापस आने का दिलासा देकर निकल गयी. जब वापस घर आयी तो पिता की हालत काफी बिगड़ चुकी थी और इसे अपराधबोध ने घेर लिया. बहन को धोखा देने का अपराधबोध पहले से ही कहीं ना कहीं था.

कुछ समय बाद उसे बायें पैर का प्रयोग करने में दिक्कत आने लगती है और धीरे- धीरे उसका बायाँ पैर पूरी तरह बेकार हो जाता है.

फ्रायड ने सफलता से उस औरत का इलाज कर दिया बिना किसी दवाई के, सिर्फ काउंसलिंग द्वारा. इलाज लम्बा चला पर आखिरकार वह उस औरत के मन में बैठे उस अपराधबोध को निकालने में कामयाब रहे जिसकी वजह से उसका दिमाग उसके शरीर के एक हिस्से को सजा दे रहा था. (इसीलिए लाख शिकायतें हैं फ्रायड से पर फिर भी वो बाबा है).

जिस तरह पानी में तैरते बर्फ के टुकड़े का एक छोटा हिस्सा ही हमें दीखता है वैसा ही आपका conscious mind है, जिसकी सोच से आप परिचित होते हैं. बाकी का बहुत बड़ा हिस्सा unconscious mind होता है, जिसकी गतिविधियों के बारे में आपको मालूम नहीं होता पर वो आप पर असर ज़रूर डालती है.

किसी भी बड़े हॉस्पिटल में हर हफ्ते ऐसे कुछ केस आ जाते हैं जहाँ मरीज शारीरिक समस्याओं से जूझ रहा होता है, जैसे कि पेट-दर्द, हाथ – पैर कांपना आदि लेकिन बीमारी का कोई कारण समझ नहीं आता. सारे टेस्ट बताते हैं कि शरीर में कोई समस्या है ही नहीं. उसे कोई मानसिक समस्या महसूस नहीं होती पर जब कोई कारण समझ नहीं आता डॉक्टर्स को तो वो उसे मनोचिकित्सक के पास भेजते हैं, (कई बार नहीं भी भेज पाते और मरीज बड़े और बड़े डॉक्टर के पास भागता रह जाता है बिना किसी सफलता के) और यहाँ उनका इलाज हो जाता है.

हम अपने दिमाग की ताकत को समझते नहीं है क्योंकि हम इसकी ज्यादातर गतिविधियों से अनजान है. हम समस्या की जड़ शरीर में खोजते रह जाते हैं पर रहस्य दिमाग में छुपी होती है.

इसीलिए अगर आपको या आपके किसी जानने वाले को ऐसी कोई शारीरिक समस्या हो जो पकड़ में आ ही नहीं रही हो तो किसी मनोचिकित्सक के दरवाजे पर भी एक लात मार के देख ले. शायद काम बन जाए.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY