साथियों के प्रति वफादारी ही तो स्रोत है इनकी शक्ति का

उत्तर प्रदेश सरकार ने 201 सरकारी वकीलों को नियुक्त किया है जिसमें से 42 वकील ऐसे हैं जो समाजवादी पार्टी की सरकार में भी वकील थे. चलिए नई सरकार है. एक ही साथ सबसे पंगा लेना मुनासिब न समझ रही हो. इसलिए नरेन्द्र मोदी जी के आदर्शों को आगे बढ़ाते हुए सबका साथ सबका विकास के फॉर्मूला को अप्लाई कर रही हो.

लेकिन केन्द्र में सरकार बने तीन साल से भी अधिक हो गया है. भाजपा ने योगेश त्यागी जी को दिल्ली युनिवर्सिटी का वाइस चांसलर अपने पसंद से नियुक्त किया था. हम जैसे साधारण लोगों को भी पता था कि त्यागी जी का जवाहर लाल नेहरू कॉलेज से पुराना संबंध रहा है. तो ऐसे में ये विश्वास करना मुश्किल है कि सरकार को ये पता नहीं था. हो सकता है कि सरकार ने सोचा हो कि हमसे उपकृत होकर हमारे प्रति वफादार हो जायेंगे.

दिल्ली युनिवर्सिटी में वर्षों से असिस्टेंट प्रोफेसर की परमानेंट नियुक्ति नहीं हुई है, इसलिए हजारों पोस्ट पर नियुक्ति की प्रोसेस शुरू हो गई है. सप्ताह भर पहले ही मैनेजमेंट विषय के लिए इंटरव्यू था.

अपनी टीम के साथ भाजपा के भरोसेमंद वाइस चांसलर साहब खुद इंटरव्यू लेने बैठे थे. एससी की सीट पर एक भाजपा समर्थक को नियुक्त किया. ओबीसी के लिए अठारह लोगों ने इंटरव्यू दिया. इंटरव्यू बोर्ड ने किसी का चयन नहीं किया और तर्क दिया कि कोई आवेदक उनको उपयुक्त नहीं लगा.

अंत में जनरल की सीट पर दो लोगों को नियुक्त किया. इनमें से कोई संघ या भाजपा से नहीं है. पूरी युनिवर्सिटी में हड़कंप मचा हुआ था कि ये नियुक्त लोग आखिर हैं कौन? दो दिन बाद ही, उन दो में से एक, लाल सलाम वालों की एक मीटिंग का नेतृत्व कर रह था.

फिर बात खुली कि जनरल सीट पर नियुक्त दोनों वीर सीताराम येचुरी के विश्वस्त सिपाही हैं. तीर चुक जाने पर अपने शिक्षा मंत्री प्रकाश जावड़ेकर जी ने वीसी से जवाब मांगा, वीसी साहब ने बहुत ही मासूम जवाब दिया कि भाजपा, संघ आदि से बत्तीस नाम भेजे गए, मैं कन्फ्यूज हो गया कि किसे लूँ और किसे न लूँ.

ये तो शुरुआत है. आगे भी अन्य सारे विषयों की नियुक्ति में, ये ऐसे ही मक्कारी से अपने काडर को सेट करते रहेंगे और हम देखते रह जायेंगे. जब हमने एक वामपंथी को ही सारे नियुक्ति की जिम्मेदारी दे दी है, फिर उससे वफादारी की क्या उम्मीद करें.

कुछ भी हो, मैं तो इनलोगों की इस अदा पर भी फिदा हूँ. ये लोग अपने विचारधारा के प्रति कितने वफादार हैं. इन्हें जीवन में अब कुछ नहीं चाहिए. इन्हें जो जीवन में पाना था पा लिया है.

ये चाहें तो सरकार की शरण लेकर अपना बुढ़ापा और समृद्ध बना सकते हैं. पर ये ऐसा नहीं करते हैं. हमेशा अपने लोगों को सिस्टम में सेट करने के फिराक में रहते हैं. इसके लिए सरकार से बैर करने का खतरा मोल लेते हैं. इनकी अपने साथियों के प्रति वफादारी ही इनकी शक्ति का स्रोत है. इसी वजह से ये हमसे संख्या बल में बहुत कम होते हुए भी हमसे कहीं ज्यादा मारक क्षमता रखते हैं.

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