खून से रंग दिया गया सावन का पहला सोमवार, यूं ही तो नहीं छोड़ देंगे

सावन का पहला सोमवार खून से रंग दिया गया है. पिछले तीन घँटे से सोशल मीडिया तीखी आग उगलती प्रतिक्रियाओं का मंच बन गया. टिप्पणियां सरकार की लाचारी से शुरू होकर इज़राइल यात्रा को कोसने पर खत्म हुई. कितने तेज़ हैं आप लोग, अभी अनंतनाग में अफरा-तफरी का माहौल है. मुख्यमंत्री घटना स्थल की ओर दौड़ गई है. सीआरपीएफ वहां के लिए रवाना हो गई है तो हमारा काम क्या होना चाहिए? मोदी को विदेश यात्रा के लिए कोसना चाहिए?

कितनी जल्दी आक्रोशित होता है अपना देश. अभी चार घंटे भी नहीं बीते और मुख्यमंत्री से इस्तीफा माँगा जाने लगा. आतंकी हमले की पूरी खबर तो आ जाने दीजिये. ये जरूर है कि 21 हज़ार का सुरक्षा बल और हैलीकॉप्टर की निगरानी के बावजूद चूक हो गई. अब आतंकी हमले को समझने की कोशिश करते हैं.

8:15 मिनट पर ये हमला हुआ जब यात्रियों का काफ़िला अमरनाथ से दर्शन कर लौट रहा था. वाहन ज्यादा होने के कारण काफिले की रफ़्तार धीमी थी. तभी अचानक दो बाइक सवार तेज़ी से आते हैं और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर देते हैं. सबसे पहले वो घटना स्थल पर मौजूद पुलिस पार्टी पर गोलियां चलाते हैं. इसके बाद वे वलसाड (गुजरात) की ओर जा रही बस पर गोलियां बरसाते हुए भाग जाते हैं. इतना सब कुछ मात्र दो मिनट में हो जाता है. बस में सवार 54 में से सात लोग मारे जाते हैं. फायरिंग की तीव्रता बस का हाल देखकर पता चल रही है.

GJ 09 Z 9976 नंबर की ये बस अमरनाथ श्राइन बोर्ड से पंजीकृत नहीं की गई थी. इसलिए बस को सुरक्षा नहीं दी गई थी. यही कारण था कि बस आतंकियों का आसान निशाना बनी. इस मामले में बस ड्राइवर की बड़ी गंभीर गलती रही है.

10 साल में अमरनाथ यात्रियों पर ये पहला बड़ा हमला है. जानकर बता रहे कि हमले का पैटर्न बिलकुल अलग था. ये प्रशिक्षित आतंकी थे. मोटरसाइकिल पर हमले को अंजाम देना आमतौर पर लश्कर की शैली नहीं है. सम्भव है कि कश्मीर के अलगाववादियों को ‘बाहरी मदद’ मिल रही हो.

दुश्मन इस समय आपके चेहरे पर खीज देखना चाहता है. वैसी ही जैसी आपने पाकिस्तान से क्रिकेट में हार पर दिखाई थी. भाई, दर्द सभी को हो रहा है लेकिन इस समय राष्ट्र को आपकी जरूरत है. आप भाजपाई हो या कांग्रेसी, फर्क नहीं पड़ता.

अमरनाथ यात्रा बंद नहीं की गई है. ये है हमारा हौसला. मात्र एक घँटे में स्थिति सामान्य कर दी गई. ऐसे टुच्चे हमलों से हम नहीं झुकेंगे. हालांकि एक बात पर आपको आश्वस्त कर दूँ कि अगले ‘सावन सोमवार’ तक आप काफी कुछ देखने जा रहे हैं. दाढ़ी वाला बाबा छोड़ेगा नहीं, लिख लीजिये.

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