पढ़ना तो यही है : Baba ji: The Lightening Standing Still

आध्यात्मिक राह दरअसल ऐसी है जिसको लेकर थोड़ा “एनिग्मा” और बहुत सारा “फ़रेब” बुना गया है. भारत का मूल स्वर सनातन का है और सनातन का मूल आध्यात्मिकता है. यह आगे चलकर तिज़ारत और ठगी का ज़रिया बन गया. यही वजह है शायद कि हमारे यहाँ राम लाल से लेकर निर्मल बाबा और राधे माँ से लेकर ब्रह्मकुमारी तक का व्यापार मजे से फलता फूलता रहा है.

आत्म की यात्रा वैसे आसान होनी भी नहीं चाहिए-

“जो बौरा डूबन डरा रहा किनारे बैठ,
जिन खोजा तिन पाइयाँ गहरे पानी पैठ”.

अगर आप खुद को ही बहुत आसानी से जान लेंगे तो फिर बचेगा ही क्या….. “राह कठिन है पी के नगर की”. आध्यात्म का रास्ता दोधारी तलवार भी है, पहाड़ की तीखी चढ़ाई भी है, पागलपन और परम स्वास्थ्य के बीच का फ़र्क भी है… धागा जरा सा इधर हैंचो तो…

मैं इस मामले में अब तक असफल रहा हूँ कि गुरु के दर्शन अबतक नहीं हुए हैं… ख़ुद ही गिरता, पड़ता, लड़खड़ाता जो कुछ सीखा वही काम दे रहा है. शिक्षा-गुरु पिता हैं. जिनका ख़ुद कोई गुरु नहीं है. उनसे ही “बाबा जी” के बारे में पता चला था. “बाबा जी” कौन हैं, कहाँ हैं, इसको लेकर काफ़ी भ्रम और रहस्य फैला हुआ है. फिलहाल तीन-चार “बाबा जी” उलब्ध हैं. लेकिन मैं जिनकी बात कर रहा हूँ वह महावतार “बाबा जी” हैं. महान संतों युक्तेश्वर गिरी लाहिड़ी महाशय और स्वामी विशुद्धानंद के भी गुरु.

किसी के मुताबिक़ यह स्थूल शरीर में दिखते हैं. कई के मुताबिक़ सूक्ष्म स्वरूप धारण कर चुके हैं. कुछ इनकी आयु बारह सौ वर्ष बताते हैं, कुछ अकबर का समकालीन. संक्षेप में “बाबा जी” एक ऐसे तपस्वी हैं जो आध्यात्मिक चेतना के घनीभूत और ठोस पिंड हैं. इनके भक्तों के मुताबिक़ साक्षात शिव के अवतार….

आज की किताब “Baba ji: The Lightening Standing Still” …”बाबा जी” के ही एक शिष्य “योगी राज गुरुनाथ सिद्धनाथ” की लिखी हुई है. इसमें “बाबा जी” के क्रिया कलापों और उनकी शिक्षा के बारे में बहुत कुछ उद्घाटित कर दिया गया है. इस किताब को आध्यात्मिकता के प्यासे लोग “मस्ट रीड” की श्रेणी में रखते हैं. हाँ, एक सावधानी जरूर बरतें, आध्यात्म की राह पर बस शुरुआत करने के लिए यह किताब नहीं है. किताब थोड़ी महंगी है और लगभग सात सौ रुपये की है. हिंदी में उपलब्ध है या नहीं, नहीं जानता लेकिन अमेजॉन पर मिल जाती है.

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