‘शक्ति की देवी’ मां दुर्गा की उपासना भूमि पर आज बंगालियों से अधिक कमज़ोर कोई नहीं!

बंगाल और बंगालियों की फितरत समझने के लिये एक वाकया काफी है… गौहत्या पर रोक लगाने की जब पूरे देश मे मांग उठ रही थी, तब पं. बंगाल की सीएम ममता बनर्जी पूरे देश के मीडिया के सामने ये बात कह रही थी कि कोई क्या खाता है ये उसका निजी मामला है, यानि कि गाय उसकी नजर में एक खाने की वस्तु भर है.

नवरात्रि उत्सव के दौरान बंगाल के हिन्दुओं ने गौवध पर रोक लगाने कि मांग की क्योकि इससे वहां के कुछ धार्मिक हिन्दुओं की भावनाएं आहत हो रही थी और उन्होंने मात्र 9 दिन खुलेआम गौहत्या को रोकने की मांग की किंतु वोटबैंक और तुष्टिकरणवाद में डूबी मोमताबानो ने गौहत्या पर रोक लगाने से मना कर दिया क्योकि गौहत्या रोकने से उसके वोटबैंक की भावनाएं आहत हो जाती, उनकी भावनाएं केवल गाय को खुलेआम सड़क पर काटकर ही सुरक्षित रखी जा सकती है.

पर इतने से भी पं. बंगाल के (कु)बुद्धिजीवी वर्ग को संतुष्टि नही मिली तो उन्होने पूरे देश के सहिष्णु हिंदूओ को अपमानित करने के लिये वहां खुलेआम ‘बीफ पार्टी’ का आयोजन किया, जिसमे पं. बंगाल के तमाम् सेकुलर, वामपंथी, लेखक, साहित्यकार और राजनेता शामिल हुऐ और पूरे देश के मीडिया के सामने बड़ी बेशर्मी के साथ हंसी के ठहाके लगाकर उन्होने गौमांस खाया.

पूरे बंगाल मे एक भी व्यक्ति या संगठन ने इस घटना का विरोध नही किया, कई लोगो को लगा कि बंगाली जनता अंदरूनी तौर पर आक्रोशित होगी और विधानसभा चुनावों में TMC को इस घटना का खामियाजा भुगतना होगा, पर विधानसभा चुनावों में जैसा बहुमत ममता को मिला वो सारे देश के सामने है.

इन्हीं बंगालियों ने जब पूरी दुनिया से वामपंथ खत्म हो रहा था, तब भी अपने राज्य में नकली वामपंथियो को सत्ता की चाभी सौंप रखी थी, जब वामपंथ से मन भर गया तो ममता का दामन थाम लिया.

बंगालियो को आज भी अपने हिंदू होने पर नहीं बल्कि बंगाली होने पर गर्व करना सिखाया जाता है.भले ही आज पूरा बंगाल बरबाद होने की कगार पर खड़ा है, सारे उद्योग राज्य को छोड़कर जा चुके हैं.

बांग्लादेशी घुसपैठियो ने पूरे राज्य पर कब्जा कर लिया है, बेरोजगारी चरम पर है, पर इन बंगालियो को आज भी इस बात का नशा है कि हमने भारत को ‘रविन्द्रनाथ ठाकुर’ दिया.

सेकुलरपन और आधुनिकता के नशे के चलते ये हिंदूवादी संगठनो से जुड़ना शर्मनाक और अपमानजनक समझते है, एक तरह से देखा जाये तो ये बंगालिये धरती पर चलते फिरते ‘एलियन’ के समान है, जिन्हे न तो इतिहास पता है न वर्तमान और न अपने मिटते जा रहे भविष्य की कोई खबर है.

पं. बंगाल भले ही ‘शक्ति की देवी’ मां दुर्गा की उपासना भूमि है,
पर आज बंगालियों से अधिक नि:शक्त और कमजोर पूरे भारत मे कोई नहीं….!!!
यही हाल रहे तो खुद मां दुर्गा भी इनकी रक्षा न कर पाये.

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