GST एपिलॉग

GST में सबसे ज्यादा टैक्स दर कारों पर है, लक्जरी आईटम मानी गयी हैं. 28% GST के साथ 12% सेस भी है. इतने भारी टैक्स लगने के बाद भी कारों के दाम पहले से कम हुए हैं. आज स्कोडा ने अपनी सुपर्ब और ऑक्टेविया गाड़ियों की कीमतें पौने दो लाख से ढाई लाख तक कम की हैं. इससे पहले हीरो अपनी मोटर साइकिलों की कीमतें 3% घटा चुकी है.

इससे पहले फिर टैक्स रेट क्या था? हम तो सिर्फ सेल्स टैक्स देखते थे. एक्साइज़ पर ध्यान नहीं दिया, 4 मीटर से लम्बी गाड़ी पर ज्यादा एक्साइज़ ड्यूटी, ज्यादा CC पर ज्यादा टैक्स, डीज़ल गाड़ी पर अलग टैक्स. ये सब कभी ध्यान में नहीं रहे.

सरकार ने कल ऐलान किया है, सभी कम्पनियाँ पुरानी एमआरपी के साथ नयी एमआरपी भी लगाएं वर्ना पेनल्टी और जेल की सज़ा भी है.

जानिए कि पहले और आज की कीमतों में कितना फर्क है. विरोधी लोग प्रचार कर रहे हैं कि सरकार ने 28% GST लगा दिया है. कांग्रेस सिर्फ 18% GST ला रही थी. कांग्रेस सस्ता टैक्स लाती.

पूछ तो अब हम भी सकते हैं कि पिछले 70 सालों में इन सभी टैक्स के नाम पर कितना लूटा गया है. जो अब 18% बता कर कांग्रेस संत बन रही है.

एक सर्विस टैक्स लगने से सर्विसेस महंगी हुई हैं लेकिन बाकी वस्तुओं के दाम में कमी ही हो रही है. पिछले दिनों GST लागू होने से पहले बहुत सेल चली. लेकिन असली सेल अभी आनी है.

जुलाई से पहले उत्पादित वस्तुओं पर इनपुट टैक्स क्रेडिट सितम्बर लास्ट तक ही मिलना है. उसके बाद उन पर GST लगने से उनकी कीमतें बहुत बढ़ेंगी. अगर सरकार ने कोई उपाय या राहत नहीं दी तो एक बेहद बम्पर सेल देखने में आएगी क्योंकि सभी अपना स्टॉक खत्म करना चाहेंगे.

GST पर अपनी दूसरी पोस्ट में मैंने स्टेट और सेंटर के रिश्तों पर लिखा था. कांग्रेस केंद्रीयकृत सत्ता में विश्वास रखती है और बीजेपी सत्ता को राज्यों के साथ-साथ बांटने में यकीन रखती है.

कल कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने प्रेस कांफ्रेंस की जिसमें GST को उन्होंने बहुत कोसा. इस कोसाई में एक खास पॉइंट ये भी था –

“It is a mockery of GST,” Mr. Chidambaram said, adding, “When we have [percentage] rates like 0.25, 3, 5, 12, 18, 28 and 40, and possibly more, because of the discretion vested with State governments, how can we call this a ‘one nation, one tax regime’?”

कांग्रेस के GST में खास बात यही थी कि टैक्स दरें केंद्र तय करता. स्टेट को टैक्स लगाने का संवैधानिक अधिकार खत्म हो जाता. भारत जिसमें सिक्किम और महाराष्ट्र की टैक्स जरूरतें अलग-अलग हैं. बिहार और तमिलनाडु की जरूरत अलग है. वहां सब कुछ केंद्र तय करता.

मोदी सरकार ने GST कॉउंसिल बनाई जिसमें केंद्र का वोटिंग राइट वन थर्ड है बाकी वोटिंग राइट सभी राज्यों में बराबर बंटा है.

GST की इतनी दरें 0.25, 3, 5, 12, 18, 28 and 40 (इसका प्रोविज़न है, 40% लागू नहीं है, टैक्स कलेक्शन कम रहा तब ये रेट लगेगा) GST काउन्सिल ने सभी राज्यों से बातचीत करके तय की है. GST काउन्सिल में सभी राज्यों के वित्तमंत्री सदस्य हैं. वही सब कुछ तय करते हैं.

और इसीलिए चिदंबरम कह रहे हैं, ‘because of the discretion vested with State governments’.

क्योंकि राज्यों ने ये फैसला किया है. कांग्रेस सरकार ने कभी राज्यों को इस लायक माना ही नहीं कि वो स्वतंत्र काम कर सकते हैं. उन्हें हमेशा कठपुतली बना कर रखा गया. लेकिन इस आस्पेक्ट पर बात फिर कभी.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY