मोशे के माता-पिता को मारने वाले तो मार डाले गए, पर अब भी जिंदा हैं ज़िम्मेदार

26 नवंबर 2011 की रात जब आतंकी नरीमन हाउस (चाबाद हाउस) में दाखिल हुए. इस घर में एक बेहद खूबसूरत मासूम बच्चा मोशे अपने यहूदी माता-पिता के साथ रहता था. बस दो दिन बाद ही मोशे पूरे दो साल का होने जा रहा था. घर में उसके जन्मदिन के जश्न की तैयारी की जा रही थी.

उस वक्त मोशे की आया सैंड्रा सेम्युअल लॉन्ड्री रूम में काम कर रही थी. तभी जोरदार ‘गनशॉट’ की आवाज़ सुनते ही सैंड्रा की आँखे दहशत से चौड़ी हो गई. चंद सेकंड में ही उसने दौड़कर खुद को लॉन्ड्री रूम में बंद कर लिया.

गोलियों की आवाज शुरू होते ही सैंड्रा ने मोशे की माँ रिवका हॉल्टजबर्ग और पिता गेवरिएल की दर्दनाक चीख सुनी. सैंड्रा पसीने में लथपथ घबराहट से कांप रही थी. इसके ठीक बाद जो चीख उसने सुनी तो कलेज़ा बाहर आने को तड़फड़ा उठा.

वो मोशे था जो रो-रोकर सैंड्रा को पुकार रहा था. तो क्या दो साल का मासूम ईश्वर प्रदत्त बुद्धि से ये जान गया था कि उसके अभिभावक मर चुके हैं. अब तक डर से कांप रही सैंड्रा को अचानक पता नहीं क्या हुआ कि वो दरवाज़ा खोलकर रिवका के कमरे की ओर दौड़ पड़ी.

मोशे के लिए उसके प्रेम ने मानो उसे नई ताकत दे दी थी. सबसे बड़े संकट के इन पलों में सैंड्रा अपनी जिंदगी की बाज़ी खेल रही थी एक मासूम को बचाने के लिए. वह सीढ़ियों से दौड़ते हुए कमरे में पहुंची तो देखा रिवका और गेवरिएल खून में लथपथ निष्प्राण पड़े हैं. उनके ही पास पड़ा मोशे ज़ोर-जोर से रो रहा था.

आतंकी भीतर के कमरों में और लोगों को खोज रहे थे ताकि कुछ और यहूदी सीनो में ‘इस्लामी लोहा’ ठोंका जा सके. यदि आतंकी फौरन वापस आ गए तो उसे और मोशे दोनों को मार डालेंगे. इतना कुछ सैंड्रा पलभर में सोच गई.

उसने मोशे को उठाया और बेतहाशा भागना शुरू कर दिया. बाद में भारतीय कमांडों की टुकड़ी ने नरीमन हाउस को घेर लिया और आतंकियों को हमेशा के लिए सुला दिया.

बाद में मोशे को उसकी दादी इज़राइल ले गई, अपने लोगों के बीच. इज़राइली सरकार ने सैंड्रा को उस देश को सबसे ऊँचा सम्मान ‘Righteous Gentile’  दिया गया. पहली बार ये सम्मान एक गैर यहूदी को दिया गया.

आज सैंड्रा ने भारतीय प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया है कि उन्होंने मोशे को याद रखा. मोशे के दादा कहते हैं कि मोशे बचपन से ही जानता था कि उसके माँ-बाप को बेरहमी से मार दिया गया.

मोशे के माता-पिता को मारने वाले तो मारे गए लेकिन ज़िम्मेदार अब भी जिंदा है. सुना है इज़राइल की ‘मोसाद’ अपने नागरिकों को क़त्ल करने वालों को समुंदर की गहराई में जाकर भी मार देती है. मोशे के साथ न्याय कब होगा.

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