भाजपाइयों शिकायत न करो, वरना बना दिए जाओगे खलनायक

44 नायब अधीक्षक, 88 निरीक्षक, 359 उप-निरीक्षक, 1135 हवलदार और सिपाही… इतने सारे लोग बदली हो कर जा रहे है, सामान्य कामकाज के तहत. इन में एक श्रेष्ठा ठाकुर भी है, जिन्होंने पिछले दिनों भाजपा नेताओं की हेकड़ी सीधी की थी.

जॉर्ज ऑरविल के एनीमल फ़ार्म नामक महान उपन्यास में पालतू प्राणी ग़दर करते हैं और खुदमुख्तार बन जाते है. उनके नेता होते है सूअर! वे एक बड़े गज्ज़ब की घोषणा करते हैं – सब प्राणी समान है, लेकिन कुछ प्राणी औरों से अधिक समान है!

कहानी में सूअरों के लिए यह ‘अधिक समान’ वाला विशेष दर्जा प्राप्त होता है.

ठीक इसी तरह अब भाजपा शासित राज्यों में सारे मुलाज़िम समान हैं. लेकिन विरोधियों से पूछें तो उनके लिए भाजपाइयों को घुड़की देने वाले ‘अधिक समान’ हैं!

वे ही भारत माता के असली सपूत हैं जिन के दम पर भारत का संविधान जीवित और सुदृढ़ है. उन को हाथ लगाना पाप है, क्यों कि उनको छूने भर से ही असहिष्णुता हिलोरे मार कर उभरती है. संविधान ख़तरे में पड़ता है और जनतंत्र को पीलिया हो जाता है.

मीडिया को मिर्गी के झटके आने शुरू हो जाते है, और सिक्युलर प्रजा छाती पीट-पीट कर “हाय ‘अधिक समान लोगों’, हम न हुए!” कहते-कहते प्राण त्यागने पर आमादा हो जाती है.

खुद बदली होते अधिकारी का बदली से संतुष्ट ही नहीं, खुश होना भी मायने नहीं रखता!

इसलिए भाजपाइयों को चाहिए, कि किसी की शिकायत योगी जी या अन्य भाजपाई मुख्यमंत्री से न करें। करने से आप खलनायक और उस अधिकारी को विरोधियों का नायक बनाने में देर नहीं लगती है!

इस त्रासदी का अन्य कोई समाधान नहीं है! प्रभु राम रक्षा करे!

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