चोर की माँ मुंह छुपाकर रोती है, अब पुरानी पड़ गई कहावत

गुजराती में एक कहावत है – चोर की माँ मुंह छुपाकर रोती है ચોર ની માં કોઠી માં મોં ઘાલીને રડે. पुरानी कहावत है, और लगता है भारत में इस्लाम आने से पहले की होगी.

ऐसा क्यों कह रहा हूँ तो सुनिए. 24 जून 2017 को बंगाल के उत्तर दिनाजपुर डिस्ट्रिक्ट के सोनारपुर ग्राम पंचायत के दुर्गापुर गाँव में एक वारदात हुई. 10 से 12 लोग रात में एक पिकअप ट्रक में शांति से आए.

एनएच 3 से सटे कुछ घरों से शांति से गोवंश चुरा लेने का उनका शांतिपूर्ण इरादा था. लेकिन एक आदमी की नींद खुली और उसने पड़ोसियों को जगाया. सब, जो हाथ मिले वो हथियार लेकर दौड़े. कोई असलहा तो था नहीं, बस डंडे पत्थर और ईंटें थी.

इन लोगों ने पलायन करने का मन बनाया लेकिन सभी सफल नहीं हुए. तीन लोग गाँव वालों के हत्थे चढ़ गए जिनको उन्होने जम कर मारा. पुलिस को बुलाया और अधमरी हालत में सुपुर्द किया. पुलिस उन्हें इस्लामपुर हॉस्पिटल ले गई लेकिन वहाँ के डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया.

गाँव वाले हिन्दू थे और मृत तस्करों के नाम हैं मो. समिरुद्दीन, मो. नसीर और मो. नसीरुल हक. तीनों स्थानीय नहीं है, अलग-अलग गांवों के हैं.

केस साफ है लेकिन ममता राज है और मृतक मुसलमान हैं इसलिए उनमें से एक की माँ ने बेटे के हत्यारों के खिलाफ पुलिस में शिकायत की है. बेटा चोरी करने गया और रंगे हाथ पकड़ा गया उसकी कोई शर्म नहीं. इसीलिए लिखा है कि यह कहावत इस्लाम पूर्व की तो नहीं ?

समाचार की लिंक दे रहा हूँ, टाइम्स ऑफ इंडिया की है, कोई ऐसा पेपर नहीं जिसे हिंदुवादी कहकर फेक बताया जाये. http://timesofindia.indiatimes.com/city/kolkata/3-killed-in-north-bengal-for-cattle-theft-bid/articleshow/59293069.cms

अब यही देखना है कि कौन क्या कहता है. चोर के माँ की निंदा भी करेंगे या हमेशा वाला राग – ‘चंद लोगों के बहाने आप इस्लाम को बदनाम न कीजिये‘ – अलापा जाएगा, बगैर चोर की माँ के बारे में एक शब्द भी कहे.

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