अपनी बेईमान आदतों से आज़ाद होंगे तभी सफ़ल होगी आर्थिक आज़ादी

जन धन एकाउंट, नोटबन्दी, आधार की अनिवार्यता और अब जीएसटी… ये सब उस सीढ़ी के एक-एक पायदान हैं जिस पर चलते हुए मोदी सरकार अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ रही है…

विश्वास कीजिए, ‘देश बदल रहा है, आगे बढ़ रहा है’ सिर्फ चुनावी नारा नहीं था, आज की सच्चाई है. आने वाले कुछ वर्षों के बाद हम भूल चुके होंगे कि इस देश में 40 तरह के टैक्स लगते थे.

ये तो भविष्य की बात है… आज आम नागरिक कन्फ्यूज़ है और व्यापारी परेशान. छोटे व्यापारियों की सबसे बड़ी समस्या है हर महीने तीन रिटर्न भरने के लिए क्या करें ??

लैपटॉप या कंप्यूटर खरीदें? सीए और एकाउन्टेन्ट की सेवा लें?

सिर्फ भ्रम के कारण यह बेचैनी बढ़ी है क्योंकि सच्चाई इससे अलग है… सरकार ने सभी फाइलिंग को ऑनलाइन करना अनिवार्य कर दिया है पर एक ऑफलाइन टूल भी दे रही है.

इस टूल को एक बार डाउनलोड करके रखा जा सकता है और नियमित रूप से बिक्री के डिटेल्स भरते रहना है, महीना पूरा होने के बाद उसको अपलोड कर दीजिए.

इसके लिए न सीए चाहिए, न एकाउन्टेन्ट, न ही लैपटॉप या कंप्यूटर… अपने स्मार्टफोन से ही यह सब काम किया जा सकता है.

तीन रिटर्न भरने का डर भी बेवजह ही है… महीने में सिर्फ एक बार रिटर्न फाइलिंग ऑनलाइन करना है उसके बाद दो रिटर्न ऑटो-पॉपुलेट होंगे. व्यापारी को सिर्फ चेक करके ओके करना होगा… अब इसमें कितनी परेशानी होगी भला!

ईमानदारी से व्यापार करना अब आसान हो गया है पर पैसे बचाने की हमारी पारंपरिक आदत के कारण हम परेशान हैं. आर्थिक आज़ादी तभी सफ़ल होगी जब हम अपनी बेईमान आदतों से आज़ाद होंगे तब चैन की नींद भी सो पाएँगे.

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