राजनीति में कांग्रेस की प्रासंगिकता समाप्त होने का ज़िम्मेदार उसका नेतृत्व

देश की राजनीति में कांग्रेस की प्रासंगिकता यदि समाप्त होती जा रही है तो इसके लिए सिर्फ मोदी जिम्मेदार नहीं हैं. ईर्ष्या, द्वेष, कुंठा और सत्ता लोलुपता किसी पार्टी के अंदर इतनी आ जाए कि वह राजनीति के निम्नतर स्तर तक पहुँच जाए तो इसका उदाहरण सिर्फ कांग्रेस पार्टी ही हो सकती है.

संसद के सेंट्रल हॉल में हुए आयोजन का बहिष्कार करके सोनिया गांधी ने एक ऐतिहासिक मौका तो गँवाया ही साथ ही साथ एक नये टैक्स कानून के द्वारा देश में एक नई अर्थ क्रांति लाने का श्रेय भी मोदी और बीजेपी के हाथों में सहज ही थमा दिया. वो तो मोदी का बड़प्पन कहें कि इसका श्रेय उन्होंने सभी दलों को दिया.

क्या यह बेहतर नहीं होता कि सोनिया अपने नेताओं के साथ उस हॉल में उपस्थित रहती?

इंदिरा और राजीव तक तो कांग्रेस की एक विचारधारा हुआ करती थी परंतु जब से पार्टी की कमान सोनिया सँभालने लगी तब से यह एक सिद्धांतहीन एवं दिशाहीन पार्टी बन कर रह गई है.

आज देश जब एक नये अर्थ युग में प्रवेश करने जा रहा है, आर्थिक बदलाव का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है तो ऐसे समय में देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी का कद्दावर नेता विदेश भ्रमण पर हैं.

गत माह जब मैंने सुना था कि राहुल गांधी डीएमके सुप्रीमो करुणानिधि को जन्मदिन की बधाई देने गये हैं तो मुझे बहुत दुःख हुआ था, क्योंकि राजीव गांधी की हत्या में करुणानिधि का बड़ा हाथ था.

राजीव गांधी एक बार चुनावी प्रचार करने के लिए हमारे इलाके में आये थे. तब मैं छोटा था, उन्हें देखने गया हुआ था और बाँस के बने रेलिंग के ठीक पास सबसे आगे खड़ा था जहाँ से उन्हें गुजरना था. वे हेलिकॉप्टर से उतरे और बिलकुल हमारे करीब से यानी कि मुश्किल से दो मीटर की दूरी से गुजरे थे. हम बच्चे पूरी ताकत से “राजीव गांधी जिंदाबाद” के नारे लगाये थे जब तक कि वो मंच पर नहीं पहुँच गए. वे देश के एक लोकप्रिय प्रधानमंत्री थे इसमें कोई शक नहीं है.

1991 में राजीव गांधी को बम से उड़ा दिया गया… तमिल उग्रवादी संगठन LTTE पर शक हुआ… गिरफ्तारियाँ हुईं, जाँच के लिए जैन कमीशन बनाया गया… 1997 में कमीशन की जब रिपोर्ट आई तो लोग हैरान रह गए. रिपोर्ट में सीधा इल्जाम डीएमके पार्टी पर लगाया गया जिसके प्रमुख करुणानिधि थे.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि करुणानिधि और उनके कुछ मंत्री इस हत्याकांड में सीधे-सीधे जिम्मेदार हैं. हत्यारों को सारी सुविधाएँ इन्होंने ही मुहैया करवाई थी. तब इंद्र कुमार गुजराल प्रधानमंत्री थे जिसे कांग्रेस ने बाहर से समर्थन दिया हुआ था ताकि बीजेपी सत्ता में ना आ पाये.

उस सरकार में डीएमके पार्टी के तीन मंत्री थे… उद्योग मंत्री मुरासोली मारन, परिवहन मंत्री टी.जी. वेंकटरत्नम, और पेट्रोलियम मंत्री टी.आर.बालू.

तब सोनिया गांधी के कहने पर कांग्रेस ने गुजराल को कहा कि तीनों मंत्रियों को सरकार से हटाया जाए… लेकिन प्रधानमंत्री गुजराल ने मना कर दिया और कांग्रेस ने समर्थन वापस ले लिया… सरकार गिर गई.

शायद जन भावनाओं के आधार पर सोनिया की मजबूरी रही होगी सरकार को गिराने की ताकि लोग ये ना समझें कि हत्यारी पार्टी के नेता जिस सरकार में मंत्री हों उसको कांग्रेस क्यों समर्थन दे रही है?

इसके पहले कांग्रेस ने देवगौड़ा जैसे अनजान नेता को प्रधानमंत्री बनवाकर बाहर से समर्थन दिया था लेकिन बाद में उसे भी गिरा दिया था. उसके पहले चंद्रशेखर की सरकार को भी कांग्रेस ने ही गिराई थी.

1996 से 1998 तक दो वर्षों के अंतराल पर कांग्रेस ने तीन सरकारें गिराई सिर्फ बीजेपी को सत्ता से बाहर रखने के लिए.

तो बात हो रही थी, करुणानिधि के जन्मदिन की.

तो सब कुछ पता चल जाने के बावजूद कि राजीव की हत्या किसने की थी या करवाई थी, प्रियंका गांधी जेल में बंद कुछ मुजरिमों से यह पूछने गई थी कि मेरे पिता की हत्या किसने और क्यों करवाई थी. तब एक बेटी का दर्द कोई भी समझ सकता था.

पर ये क्या, उस करुणानिधि से, जो प्रियंका और राहुल के पिता की हत्या में शरीक था, सोनिया ने सत्ता लोभ की वजह से उससे दोस्ती कर ली और साथ मिलकर बहुमत प्राप्त कर लिया.

बीजेपी को सत्ता में ना आने देने के लिए अपने पति के हत्यारे का साथ?

एक बार नहीं बल्कि यूपीए के दोनों टर्म के सबसे विश्वसनीय साथी बने थे करुणानिधि.

देशहित को किनारे रखकर, नैतिकता और विचारधारा से समझौता करके सोनिया का साथ आज वही नेता दे रहे हैं जो आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे हुए है… इनमें कई तो आरोपी भी हैं… लालू यादव, शरद यादव, ममता बनर्जी, मायावती, केजरीवाल, ओवैसी, फारूख और वामपंथी नेता आज के इनके साथी हैं जिन्हें देशवासी आज नकार चुके हैं.

और फिर आई 1 जुलाई 2017… आजाद भारत का एक ऐतिहासिक दिन… जिसे सालों बाद भी याद रखा जाएगा, याद रखे जाएंगे सेंट्रल हॉल में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के उद्गार… लेकिन यह भी याद रहेगा कि उस दिन कांग्रेस और उसके चेले चपाटों की पार्टियों ने इस आयोजन का बहिष्कार किया था… वो भी सिर्फ इसलिए कि ये सभी मोदी से नफरत करने वाले नेता थे जिसकी लीडर सोनिया गांधी थी.

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