राज कुमार पुण्य स्मरण : कितनी सच्चाई है इन आँखों में, खोटे सिक्के भी खरे हो जाएं

उनका एक दिन नहीं गुज़रता था जब तक यह गाना दिन में एक बार न सुन लें … कौन पतिदेव? नहीं मेरे छोटे छोटे दो हीरो… और वो भी तब जब उनकी उम्र चार और पांच साल की थी, अब तो दो साल और बड़े हो गए हैं, लेकिन राज कुमार के जन्मदिन या पुण्यतिथि पर यह किस्सा हमेशा याद आता है.

एक दिन बड़े मियाँ कहते हैं आप वो गाना लगा दो जो पापा रोज़ सुनते हैं … मैंने सोचा हरिओमशरण के भजन पुष्पांजलि की बात कर रहे हैं जो हम लोग रोज़ सुबह सुनते हैं..

मैंने लगा दिया तो कहने लगे ये नहीं ये तो भगवान वाले गाने हैं वो…

मैंने कहा अच्छा गाकर बताओ….

जनाब ने गाना शुरू किया…. हर तरफ बस यही अपसाने हैं…

मैंने हंस के गले लगा लिया इतने पिद्दे से दिमाग़ में इतनी समझ और ऐसी पसंद….

मैंने समझाया ‘अपसाने’ नहीं वो ‘अफ़साने’ हैं जिसका मतलब होता है किस्से-कहानी…

ये वही बच्चा है जो कम्प्युटर पर हिन्दी टाइप करते हुए पूछता है हिन्दी में ‘एक्सरसाइज़’ लिखते समय ज़ कैसे लिखते हैं ? मैंने कहा j टाइप करो ज आ जाएगा…

लेकिन मम्मा वो तो ज होता है “ज़” कैसे लिखेंगे…

तब भी मैं बहुत अचंभित हुई थी… भाषा का ऐसा गूढ़ ज्ञान इतने छोटे बच्चे को इस जन्म का तो नहीं ही हो सकता… मैंने ज़ लिखने के लिए z टाइप करने को कहा… इन किस्सों का ज़िक्र इसलिए कि भाषा की शुद्धता और बोलने का अंदाज़ यदि पिता से आया है तो वो यूं ही नहीं-

पतिदेव अक्सर मुझे देखते हुए ये गाना गुनगुनाते हैं –

“कितनी सच्चाई है इन आँखों में खोटे सिक्के भी खरे हो जाएं” और साथ ही राजकुमार की अदायगी की तारीफ़ और फिर गाने के हर अंतरे पर हर बार एक नया सा अर्थ समझाते हुए कहते हैं-

तू कभी प्यार से देखे जो उधर
सूखे जंगल भी हरे हो जाये
बाग़ बन जाये जो वीराने हैं…..

और मैं अपने बच्चों को देखकर गुनगुनाती हूँ…. “कितनी सच्चाई है इन आँखों में खोटे सिक्के भी खरे हो जाएं” … क्योंकि बड़े मियाँ ज्योतिर्मय जो हैं सो तो है ही, छोटे मियाँ को पूरा गाना मुंह ज़बानी याद है और जब तब आकर खुद ही कम्प्युटर पर गाना लगाकर नाचने लग जाते हैं..

बड़ा अच्छा लगता है गीत बाबू की मासूम सी आवाज़ में ये गीत सुनना कि –

नीची नज़रों में हैं इतना जादू
हो गये पल में कई ख्वाब जवां
कभी उठने कभी झुकने की अदा
ले चली जाने किधर जाने कहाँ
रास्ते प्यार के अनजाने हैं

हम तेरी आँखों के दीवाने हैं
हर तरफ अब यही अफसाने हैं

गीतकार : कैफी आज़मी
गायक : मन्ना डे
संगीतकार : मदन मोहन
चित्रपट : हिंदुस्तान की कसम (1973)

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