जीएसटी पर यक्ष के प्रश्न, पांडवों के जवाब और जात पूछता पत्तरकार

ब्राह्मण की अरिणी लेकर भाग निकले हिरण का पीछा करते पांडव वन में दूर निकल आये थे. प्यास से वो जब बेहाल होने लगे तो भाइयों ने इधर-उधर नज़र दौड़ाई. पक्षियों से एक जलाशय का अंदाज़ मिला तो बाकी भाई विश्राम के लिए बैठे और सहदेव पानी लाने चले.

सहदेव ज्योतिष के अच्छे जानकार और तलवार के धनी थे. रुक्मी, कालमुख, विंद-अनुविंद, जामवंत, किष्किन्धा के वानर राजा मैंद-द्विविद और महिष्मति के राजा नील जैसे कईयों को उनके सामने हार का सामना करना पड़ा था. उनकी सत्यवादिता का आलम ये था कि युद्ध के लिए अच्छा मुहूर्त पूछने उनके शत्रु दुर्योधन और शकुनि भी उनके ही पास गए थे.

जब कृष्ण ने उनसे पूछा कि महाभारत का युद्ध कैसे रोका जाए तो उन्होंने कृष्ण से कहा था कि आपको और शकुनि, दोनों को बाँध कर अगर कालकोठरी में डाल दें, तो युद्ध नहीं होगा.

जलाशय पर एक प्रगतिशील यक्ष ने कब्ज़ा जमा रखा था. बिना उसके प्रश्नों के उत्तर दिए पानी लेना संभव नहीं था, उसने सहदेव से पहला सवाल किया. उनसे अजीब सवाल का क्या नतीजा होता?

यक्ष प्रश्न : बताओ फ़ेडरल स्ट्रक्चर में इंडिपेंडेंस ज़रूरी है या नहीं? दिल्ली दरबार के फासीवाद से स्वतंत्रता का हनन कैसे होता है?

सहदेव : यक्ष राज, फ़ेडरल स्टेट्स को नेशन बनाने के लिए गांधीवादी सिद्धांत इस्तेमाल होते हैं. यहाँ इंडिपेंडेंस से एक लेवल ऊपर, इंटर-डिपेंडेंस की जरूरत होती है. आपके गेहूं-चावल-दाल पर कोई अनर्गल टैक्स ना थोपे, इसके लिए जरूरी है कि आप भी उसके कपड़े-दूध-अयस्क पर जबरन टैक्स ना थोपें. कभी-कभी ऐसे फ़ेडरल स्टेट्स के बीच अटका हुआ मामला निपटाने के लिए जब केंद्र आता भी है तो उसे फासीवाद नहीं मध्यस्थ कहते हैं.

ऐसे उत्तर से असंतुष्ट हुए यक्ष ने फ़ौरन माया से सहदेव को मृत किया और वानर का सा मुख सुजा कर पेड़ पर वापिस जा बैठा.

काफी देर तक सहदेव के वापिस ना आने पर नकुल उन्हें ढूँढने निकले. वो अपने आयुर्वेद के ज्ञान और घोड़ों की संभाल के लिए जाने जाते थे. अज्ञातवास के दौरान भी वो ग्रंथिक-जयसेन नाम से अस्तबल में ही काम करते रहे.

उनके मामा शल्य उनको और सहदेव को अपने राज्य का उत्तराधिकारी बनाना चाहते थे, महाभारत का युद्ध समाप्त होने पर दोनों मद्र के राजा हुए. वो अपने रूप-सौन्दर्य के लिए भी जाने जाते थे.

युगपुरुष टाइप मुंह होप्प किये बैठे यक्ष ने फ़ौरन उन पर सौन्दर्य प्रसाधनों और बर्तनों की कीमत से सम्बंधित सवाल दागने की सोची.

यक्ष प्रश्न : बताओ! सौन्दर्य प्रसाधनों, इत्र आदि पर 18% कर लगाना स्त्रीविरोधी क्यों ना माना जाए?

नकुल : यक्ष राज, ज्यादातर बर्तनों, घर के सामान, सौन्दर्य प्रसाधनों आदि पर 27% तक का कर तो पहले ही था! फिर ऊपर से लोकल टैक्स एक्स्ट्रा होता था. अब जो सबसे नीचे वाला स्तर था उसी 18% पर सौन्दर्य प्रसाधनों और इत्र आदि का कर रखा गया है. मूलतः कम ही किया गया, बढ़ाया तो नहीं गया है.

प्राचीन काल में (विक्रम संवत 2071 से पूर्व) आम जनता ऐसे टैक्स जैसे सवालों को सुनती ही नहीं थी. कोई कुछ भी वसूल ले, वो जी माई-बाप कहती चुकाती जाती थी. अब के दौर में अचानक लोग सरकार की नीतियों की बात भी करने लगे हैं. आपकी मूल समस्या ये है कि आप जवाब देने वालों को ट्रोल और जवाब दिए जाने की क्रिया को असहिष्णुता कहना चाहते हैं. अपना कॉमन सेन्स कहाँ छोड़ आये हैं?

यक्ष एक तो वापिस सवाल को सुनकर, फिर सुन्दर पुरुष द्वारा ट्रोल शब्द के उच्चारण पर असहिष्णु हो उठा. उसने माया से नकुल को भी मृत कर दिया और फिर से मुंह फुला कर इन्तज़ार करने लगा.

जब नकुल भी नहीं लौटा तो बकासुर, जटासुर और कीचक जैसों के वध के लिए जाने जाने वाले बलशाली भीमसेन जलाशय की ओर रवाना हुए. उन्हें शारीरिक बल के लिए जाना जाता था इसलिय हाथियों की पीठ से लड़ने में कुशल, मल्लयुद्ध के जानकार पूर्वी क्षेत्रों की विजय के लिए, राजसूय यज्ञ के उद्देश्य से भीष्म ने उन्हें पूर्व में भेजा था.

अज्ञातवास के दौरान उन्होंने रसोई का काम लिया था और वल्लभ-जयंत के नाम से जाने जाते थे. काफी ज्यादा खा जाने की क्षमता के कारण उनका नाम वृकोदर भी था. यक्ष उनसे खाने पीने पर सवाल पूछने उतर आया.

यक्ष प्रश्न : बताओ वृकोदर, आखिर इस जी.एस.टी. का फायदा क्या है? क्या उस से इस देश के गरीबों को रोटी मिलेगी? इसमें तो बिस्कुट पर भी 18% टैक्स दिखता है!

भीम : वैसे यक्षराज, रेस्तरां या घर में अगर 1000 रुपये का आटा, 300 के मसाले और 200 का तेल लाते तो पुराने निज़ाम में 233 रुपये के लगभग का टैक्स ऊपर से भरना पड़ता और अब टैक्स करीब सवा सौ रुपये का ही लगेगा. तो उधर तो फायदा ही दिख रहा है.

गुड़, चीनी, सरसों तेल, दूध, फल-सब्जियां सब जी.एस.टी. में जीरो परसेंट पर रखी गई है. तो रोटी तो मिलेगी, बाकी आपका गरीब मैगी खाता हो तो और बात है. वैसे बिस्कुट पर 18% ज़रूर है लेकिन सस्ते जूतों पर अब कर 5% ही कर लगेगा, आपको तो खाने की आदत भी है ना?

जिम्मी चू के शू के बदले सस्ते जूतों का जिक्र यक्ष को बिलकुल रास नहीं आया. पहले से ही असहिष्णु हो उठे यक्ष ने भीम को भी अपनी माया से मृत सा कर दिया.

कतार में चौथे अर्जुन थे अब उनकी बारी आई. दोनों हाथों से शस्त्र संधान में समर्थ होने के कारण उनका एक नाम सव्यसाची भी था. वो नृत्य में भी पारंगत थे और कई जगहों पर उन्होंने युद्धों में भी झंडे गाड़े थे. उनकी योग्यता से उनके गुरु भी शुरू से ही प्रभावित रहे.

नींद को जीत लेने के कारण दस नामों में से उनका एक नाम गुडाकेश भी था. दातून चबाते यक्ष ने उनसे पूछा, बताओ गुडाकेश, आधी रात को जब देश एक नयी व्यवस्था में कदम रख रहा था, उस वक्त कौन सो रहा था और कौन जागता था?

अर्जुन ने कोई देरी नहीं की, वो बोले, यक्षराज, जो आम जनता थी वो पत्तरकारों को आधी अधूरी ख़बरें देने वाला मान चुकी थी, इसलिए वो सीधा नीति निर्धारकों के मुंह से सच सुनने को जाग रही थी. डायरेक्ट फ्रॉम द हॉर्सेज़ माउथ, यू नो! याकूब की फांसी रुकवाने के लिए जो आधी रात को अदालत खुलवाने आये थे, उन्हें पता था इस छाम्प्दायिक सफ़ेद दाढ़ी का कुछ नहीं किया जा सकता. इसलिए वो लोग जाकर सो गए थे.

सुबह देर से जागे यक्ष को ये सच नीम के दातून से ज्यादा कड़वा लगा. पेस्ट की कीमतों का क्या हुआ होगा सोचते हुए उसने खखार कर थूका और माया से अर्जुन को भी मृत कर डाला.

अंतिम युधिष्ठिर जब पहुंचे तो उन्होंने अपने भाइयों को मृत पाया. यक्ष के प्रश्नों का उत्तर देने जब वो उपस्थित हुए तब तक यक्ष दातून फेंककर कुल्ला कर चुका था. यक्ष के प्रगतिशील लक्षणों को पहचानकर युधिष्ठिर फ़ौरन सतर्क हो गए.

यक्ष बोला, आओ राजन! अब तुम मुझे जी.एस.टी. के बारे में समझाओ!

लेकिन, किन्तु, परन्तु यक्ष के प्रश्न दागने से पहले ही युधिष्ठिर ने हाथ जोड़ लिए. कहा, हे यक्षराज, आपके इस गंभीर प्रश्न का उत्तर देने में सम्पूर्ण भारतवर्ष में दो ही प्राणी समर्थ थे. एक नानी के घर गया है और दूसरे को कपिल मिश्रा बोलने नहीं दे रहा.

इस उत्तम समाधान से यक्ष खिल उठा. मुस्कुराते हुए वो बोला, युधिष्ठिर तुमने मेरे योग्य दो गुरु बताये हैं. अंतः मैं भी तुम्हारे दो भाइयों को जीवित कर दूंगा. बताओ, तुम कौन से भाइयों को जिलाना चाहोगे?

युधिष्ठिर अब तक यक्ष को भांप चुके थे. यक्षराज नकुल और सहदेव को जीवित कर दें, युधिष्ठिर ने कहा.

यक्ष ने चौंक कर पूछा, लेकिन भीम-अर्जुन को जीवित करने पर उनकी मदद से तुम राज्य भी पा सकते हो, फिर वो तुम्हारे सगे भाई भी तो हैं!

युधिष्ठिर बोले, राजन जो राज्य जीत सकते हैं, कल को वो मुझे राजा होने देंगे ये ज़रूरी भी तो नहीं. क्या पता, कल को नीयत डोल जाए? उसके अलावा सगे को छोड़ सौतेले को बचाने की वजह से मेरा नाम इतिहास में दर्ज भी तो होगा. आई वॉज़ थिंकिंग लॉन्ग टर्म.

उत्तम राजनीति के ज्ञान से प्रभावित यक्ष ने सबको पुनः जीवित कर दिया. बन्धु-बांधवों समेत पानी पीकर युधिष्ठिर मौका ए वारदात से चले ही थे कि पेड़ के पीछे से घटना को लाइव कवर करता जनता का रिपोर्टर कूद कर सामने आया.

चौअन्नी मुस्कान मुस्कुराते वो बोला, देखा महाराज, ई बाभन सब अपने अरिणी के चक्कर में आपको फंसा देता है. नाश हो बामनवाद का!

युधिष्ठिर मन ही मन जनसरोकारों के पत्तरकार के बिहारवासी भाई चकला पाण्डे का नाम याद कर ही रहे थे कि पत्तरकार महोदय ने माइक आगे करते हुए पहला सवाल दागा, वैसे महाराज ये जिनके जी.एस.टी. के बारे में यू.पी.एस.सी. लेभेल प्रश्न ई यक्ष पूछ रहा था, ऊ कौन जात हैं?

युधिष्ठिर ने कनखियों से कैमरा चालू देख लिया था. उन्होंने इशारों में कहा, शांत गदाधारी भीम, शांत, और फिर नो कमेंट्स बोलकर आगे रवाना हुए. यह लिखे जाने के लिए चुटकुले चुराने तक जनता के पत्तरकार जीवित बताये गए हैं.

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