…और खारिज होता है हम मतदाताओं पे भ्रूण हत्या का मुकदमा

एक मित्र हैं, मेरठ के रहने वाले, पेशे से कम्यूनिस्ट हैं. कल मिल गए सुबह-सुबह फेसबुक पे. उन्होने बड़े शिकायत भरे लहजे में कहा कि बड़े ही शर्म की बात है… हम लोगों ने भ्रूण ह्त्या की है… एक अवतार होने वाला था धरती पे, जो सभी पापों से मुक्त कर देता, पर मुए मतदाताओं ने पहले अल्ट्रासाउंड करा के चेक किया. जब पता चला कि बहुत ईमानदार है तो मतदान केंद्र पे ले जा के गर्भपात करा दिया. और एक रावण-नुमा ‘फेंकू’ को हमारे सिर पे बैठा दिया.

सो पेश ए खिदमत है… अथ भ्रूण कथा…

एक समय की बात है, एक था भ्रूण. वो अपनी मम्मी के पेट में रहता था. उसकी मम्मी बहुत अच्छी लडकी थी… उसका नाम था ईमानदारी. बहुत शरीफ लडकी थी. पर भ्रूण के पापा के बारे में बड़ा भ्रम था…

पापा का नाम क्लियर नहीं हो रहा था. कोई कहता था कि कांग्रेस की औलाद है तो कोई कहता था कि संघ की शाखा में हाफ पैंटीयों से मुंह काला करवा के आयी है… बहुत से लोग तो दबी जुबान में यहाँ तक कहते थे कि भ्रूण के पापा अंकल सैम हैं… कुछ सीधे-सीधे फोर्ड और रॉकफेलर का नाम लेते थे.

बहरहाल भ्रूण की मम्मी ने इस बाबत मौन साध रखा था… और उसने प्रण कर रखा था कि मैं इस बच्चे को जन्म दूंगी… इसे समाज में इज्ज़त और मान सम्मान दिलवाऊँगी. बाप का नाम दिलवाऊँगी. मेरा बेटा विनाशाय च दुष्कृताम, धरती पे अवतरित होगा और एक चक्कर चला के सबके कष्ट दूर कर देगा.

प्रजा बहुत प्रसन्न थी… बस बस विष्णु जी का अवतार आने ही वाला है. पर किस्मत में कुछ और ही बदा था. न जाने भ्रूण के डीएनए में कहाँ से पलटी मारने का गुण आ गया.

यूँ बच्चे जब गर्भ में होते हैं तो थोड़ा बहुत घूमते हैं. हाथ पैर चलाते हैं. पर अपना भ्रूण तो पहले दिन से ही U-Turn मारना सीख गया. जल्दी ही उसने धरना-प्रदर्शन, भूख हड़ताल भी सीख ली.

अपना भ्रूण was a भ्रूण in a hurry. वो रातों रात ही दुनिया के सब दुःख दूर कर देना चाहता था. देवताओं ने उसे बहुत समझाया कि बेटा, हर चीज़ का एक procedure होता है. पर अपना भ्रूण procedural bullshit में विश्वास नहीं रखता था.

कानून व्यवस्था और संविधान जैसे शब्द उसके लिए बेमानी थे. वो डेविड धवन और रोहित शेट्टी की फिल्मों से प्रेरणा लेता था. Maggie और instant coffee उसका प्रिय भोजन था. सो एक दिन उसने दो मिनट में बना कर भरपेट Maggie खाई. फिर उसे instant coffee पी कर नीचे धकेला और गहरे चिंतन में डूब गया.

उसे लगा कि समय बहुत कम है और ये समय यूँ ही माँ के पेट में पड़े-पड़े बर्बाद नहीं किया जा सकता. इतना लंबा समय? 9 महीने? so… at last ये हुआ कि conceive करने के 49 दिन के अन्दर ही, one bright summer morning… वो माँ के पेट से फुदक के बाहर आ गया…

और बाहर आते ही उसने भक्तों को जोरदार lecture पिलाया… ऐ कॉमरेडों, हमने conceive इसलिए नहीं किया था कि वहाँ माँ के एयरकंडीशंड पेट में आराम से ज़कूज़ी और स्पा का मज़ा लें और वहाँ मुफ्त की रोटियाँ तोड़ें और ऐश करें… हमारा कन्सेप्शन तो जनता के दुःख दूर करने के लिए हुआ है.

और ये कहता हुआ बहादुर भ्रूण लोकसभा की युद्ध भूमि में कूद पडा और वीरगति को प्राप्त हुआ… पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में डाक्टरों ने लिख दिया… cause of death… Miscarriage… हिंदी में बोले तो गर्भपात हुआ है.

समझे भैया… हम मतदाताओं पे भ्रूण हत्या का मुकदमा खारिज होता है. हमारे प्यारे भ्रूण ने सुना है कि खुदखुशी की है…

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