सारी बुद्धि तो वामपंथियों और विरोधियों में, मोदी सरकार तो मूर्ख है!

पता नहीं मेरे लेख ध्यान से पढ़े जाते हैं या नहीं. खैर पिछले लेख में मैंने खास लिखा था कि डिमॉनेटाइजेशन इनकम टैक्स बेस बढ़ाने के लिए आया था, GST का मुख्य उद्देश्य सेल्स टैक्स का बेस बढ़ाना है. एक भारत एक टैक्स, क्रांति, आजादी के बाद का सबसे बड़ा टैक्स सुधार ये सब दिखावा है. लोक लुभावन बातें हैं.

[GST की कहानी-3 : इसे लागू करने के लिए क्यों अड़ी थी सरकार]

डिमॉनेटाइजेशन ने समाज के हर वर्ग को प्रभावित किया था, GST मुख्यतः कंपनियों, व्यापारियों को प्रभावित करेगा. आम जनता के लिए एकाध हफ्ते के बाद स्थिति सामान्य होगी, उनके लिए ये मासिक बजट को थोड़ा एडजस्ट करने से ज्यादा नहीं है.

लेकिन व्यापारियों के लिए मुसीबत घनी है. पहले तो अपने हर हिसाब किताब को कानून के तहत लाना है. कच्चे बिल का समय ख़त्म. कच्चा बिल डायरेक्ट जनता को भले दे दीजिये लेकिन अगर किसी और कंपनी को दिया तो दोनों लोग मुसीबत में.

अर्थात नंबर एक में आना मजबूरी है. नहीं आएंगे तो आपसे व्यापार करने वाले आपको मजबूर कर देंगे.

लेकिन क्या मुसीबत यहीं खत्म हो जाएगी. क्या एक नंबर में काम करने से कष्ट समाप्त हो जायेंगे.

व्यापार तो नंबर एक में हो गया, सेल्स टैक्स ईमानदारी से जाने लगा.

लेकिन अभी इनकम टैक्स बाकी है. कंपनी हो या व्यापारी इनकम टैक्स देने में सभी झिझकते हैं. असली चोरी चकारी वहीँ हैं. सेल कम दिखाई. खर्चे ज्यादा दिखाए. नकदी में ढेरो बिल और खर्च दिखा दिए.

सरकार ने कैश लेनदेन पर सख्ती की है, लिमिट लगा दी है.

लेकिन सबसे बड़ी मुसीबत दूसरी है.

सरकार का विज्ञापन आपने सुना होगा एक देश एक टैक्स.

सीमलेस फ्लो. सीमलेस इंटीग्रेशन. इसी सीमलेस इंटीग्रेशन के सहारे एक टैक्स चेन में सबको इनपुट टैक्स क्रेडिट मिल रहा है.

लेकिन ये सीमलेस इंटीग्रेशन सिर्फ टैक्स इनपुट में नहीं है.

GST का रजिस्ट्रेशन व्यापारी या कंपनी के पैन नंबर के बेसिस पर हो रहा है. GST नंबर के साथ पैन नंबर इनबिल्ट है.

इसका अर्थ है GST यानी सेल्स टैक्स डिपार्टमेंट और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट सीमलेस इंटीग्रेटेड हैं. कितना एक नंबर में आपने सेल किया इसकी जानकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को होगी. वो इसे आपके इनकम टैक्स रिटर्न से मिलाएगा.

पता नहीं अभी बिग डाटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सॉफ्टवेयर के बारे में कितने लोग जानते हैं, लेकिन इनके प्रयोग से अपने आप पूरे देश का डाटा सारी अभीष्ट जानकारी उगल देगा.

गर आपको ध्यान हो आपको एक केंद्रीयकृत सॉफ्टवेयर में सभी इनवॉइस देनी है. सभी कंपनियों के टैक्स इनपुट उनकी इनवॉइस वहां लिंक हैं. डाटा का समुन्दर है वहां जो एक दूसरे से जुड़ा है.

आगे आप सोच सकते हैं. फिर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट क्या करेगा, जितना पैसा आपने बचाया होगा वो निकलेगा, चाहे सरकार को या किसी की जेब में जायेगा.

डिमॉनेटाइजेशन कैशलेस इकॉनमी GST, आधार कार्ड के जरिये सब्सिडी, आधार और पैन नंबर की लिंकिंग.

सोचिये सरकार के पास उसके विभिन्न डिपार्टमेंट के पास कितना कुछ इकठ्ठा होने जा रहा है. टैक्स बेस न सिर्फ बढ़ेगा बल्कि सेल्स या इनकम टैक्स छुपाना बचाना भी मुश्किल होगा.

और लोग कहते हैं सरकार बिना तैयारी के है, जेटली मूर्ख है. सरकार को काम करना नहीं आता.

एक्चुली भगवान ने बुद्धिमान सिर्फ कुछ वामपंथी बुद्धिजीवी बनाये और बची खुची बुद्धि मोदी विरोधियो में बाँट दी.

मोदी सरकार तो मूर्ख है.

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