आप ये फुलटॉस क्यों छोड़े जा रहे हैं?

यह क्रिकेट की बहुत ही प्रसिद्ध तस्वीर है, 1976 की. जब न्यूज़ीलैंड के विरुद्ध डेनिस लिली की गेंदबाज़ी पर ऑस्ट्रेलिया ने 9 खिलाड़ी स्लिप में खड़े कर दिए थे.

ज़ाहिर है, हर बॉल ऑफ स्टंप के बाहर आएगी… और वे उम्मीद करेंगे कि आप बाहर जाती बॉल पर बल्ला लगाएंगे.

मीडिया ने अपनी फील्डिंग कुछ ऐसी सेट की है कि देश में जो कुछ भी होगा उसे गोरक्षा और बीफ से जोड़ कर हल्ला मचाएगी…

अगर मैं मोदीजी को बेनिफिट ऑफ डाउट दूँ, जो मैं देना चाहता हूँ, और मानूँ कि वे हमारी टीम में हैं और एक न्यूट्रल अंपायर नहीं हैं… तो उनकी सलाह का मतलब निकालूँगा कि बाहर जाती गेंदों पर बल्ला ना अड़ाएं…

और जहाँ तक स्लिप में खड़ी फील्डिंग का सवाल है… वे तो हर बॉल पर ‘हाऊज़दैट’ चिल्लायेंगे ही… उनकी परवाह नहीं करनी… क्रिकेट के मैदान पर तो वार्निंग भी दी जाती है बेकार की अपीलों पर… पता नहीं यहां क्यों बेफिक्र हैं…

पर जब सारे फील्डर स्लिप में खड़े हैं मतलब आप प्रेशर में हो… बैकफुट पर खेल रहे हो… जबकि पूरा मैदान खाली पड़ा है… देश में विपक्ष का अता पता नहीं है… बाउंडरी पर कोई नहीं है…

मीडिया की देशद्रोहियों और आतंकियों से मिलीभगत, झूठी खबरें… सड़क पर निकलती देश तोड़ने के नारे लगाती भीड़… कितने ही अवसर मिले हैं उन्हें कुचलने के… कितने फुलटॉस छोड़े हैं हमने…

उन्हें हिम्मत कैसे हो रही है ऐसा फील्ड सजाने की. हम तो बाहर जाती गेंदें छोड़ दें, अच्छी सलाह है… पर आप ये फुलटॉस क्यों छोड़े जा रहे हैं?

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