जम्मू-कश्मीर में जीएसटी नहीं, फैलेगी अव्यवस्था, बढ़ेगी महंगाई

आज देश के लोग जहाँ आधी रात के बाद से GST लागू होने की खुशियाँ मनायेंगे, वहीं यहाँ जम्मू काश्मीर राज्य की स्वायत्तता खतरे में पड़ने वाली है. स्वायत्तता का अर्थ यहाँ धारा-370 से है. देश भर में लागू हो रहे इस कानून को यहाँ की विरोधी पार्टियाँ काफी समय से राज्य के साथ किये जा रहे षड्यंत्र के रूप में प्रचारित करती रही हैं.

राजनीति का सबसे गिरा हुआ स्तर यदि कहीं देखना हो तो जम्मू कश्मीर राज्य एक अच्छा उदाहरण है. अमिताभ बच्चन जब टीवी पर ‘एक टैक्स – एक भारत’ कहते हैं तो यहाँ के नेताओं और अलगाववादियों के पेट में दर्द होने लगता है.

अलगाववादी नेताओं का विरोध करना तो समझ में आता है पर कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस के नेता भी उन्हीं के सुर में सुर मिलाते दिखते हैं. महबूबा की अपनी पार्टी के भी कुछ ऐसे नेता हैं जिन्हें यह लगता है कि इसका खामियाजा उन्हें अपने चुनावी क्षेत्रों में उठाना पड़ सकता है.

जब से अरूण जेटली का फरमान सीएम महबूबा मुफ्ती को मिला है तब से लेकर कल तक वो तीन सर्वदलीय बैठकें कर चुकी हैं लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला. पहले की दो बैठकों का तो दोनों विपक्षी पार्टियों ने बहिष्कार किया था परंतु कल यानी 29 तारीख की तीसरी बैठक में दोनों विपक्षी पार्टियाँ शामिल थी, पर नतीजा कुछ नहीं निकला.

आज 30 जून है… कल से सारे देश में GST लागू हो जाएगा, और यहाँ अब तक ये नहीं पता कि कल से क्या होगा, जब राज्य में आने वाली कमोडिटी पर जीएसटी लगी होगी और यहाँ पहले से चली आ रही टैक्स व्यवस्था भी लागू रहेगी.

ऐसे में डबल टैक्सेशन से कैसे कोई बच सकता है? अव्यवस्था तो फैलेगी ही, ज़रूरी सामानों की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हो जाएगी, सभी इंडस्ट्रीज़ बुरी तरह से प्रभावित होंगी, बंद हो जाएँगी.

सभी लोग असमंजस की हालात में हैं अब तक… पर सरकार के पास जो एकमात्र रास्ता है वो है आर्डिनेंस लाकर जीएसटी को लागू करना, जिसकी अवधि छः माह की होगी या जब तक कि इसे कानून ना बना दिया जाये, और इसके लिए सभी पार्टियों के सहयोग से इसे संवैधानिक जामा पहनाना होगा.

परंतु यह भी तय है कि विपक्षी पार्टियाँ इसे राज्य के विशेष संवैधानिक स्टेटस पर चोट कह कर सरकार को कटघरे में खड़ी करती रहेगी जिसका चुनावी खामियाजा सरकार को भुगतना होगा, इसलिए महबूबा की हालत भी साँप छछून्दर वाली हो गई है. बीजेपी इस मामले में पूरी तरह से जीएसटी बिल के पक्ष में है.

मुझे तो लगता है कि इस सारे खेल को दिल्ली में बैठी कांग्रेस अध्यक्ष हैंडल कर रही हैं, अब्दुल्ला भाई साहब के साथ मिलकर… क्योंकि इस ऐतिहासिक क्षण का बॉयकाट करने के लिए जिस प्रकार कांग्रेस और कुछ विपक्षी पार्टियाँ संसद के सेंट्रल हॉल में होने वाले मध्य रात्रि के आयोजन में ना जाने का फैसला किया है, चिंतित हैं, दुखी हैं… तो संदेह होना लाजमी ही है. इनकी हालत भी महबूबा जैसी ही है कि इसे सपोर्ट करें या विरोध करें?

देश की नकारात्मक राजनीति का इससे अच्छा उदाहरण और क्या हो सकता है?

वैसे तो जम्मू कश्मीर राज्य में जीएसटी भले ही देर सवेर लागू हो जाए, पर एक बात तो साफ है कि यहाँ की राजनीति का खेल सिर्फ इस बात को लेकर खेला जाता है कि कौन सा राजनीतिक दल अपने आप को भारतीय संविधान से अलग रखते हुए… भारत से अलग दिखाते हुए… राज्य के अपने संविधान के प्रति ज्यादा समर्पित और उसका संरक्षक बन सकता है… क्योंकि वे अपने आप को ‘भारतीय’ नहीं बल्कि ‘कश्मीरी’ कहलाना ही पसंद करते हैं.

जम्मू कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग मानने वाले देशवासियों को ये बातें अवश्य तकलीफ देगी पर यही हकीकत है.

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