भारत को अगर बचाना है तो सच बोलना होगा

आप वामपंथी और सेक्यूलर के विरोध में हमेशा क्यों लिखते हैं, आप जैसे लेखकों को नकारात्मक नहीं होना चाहिये.”

मित्र, एक लेखक को सदा सच लिखना चाहिये वो भी निष्पक्ष हो कर, वही लिखता हूँ लेकिन चूँकि आपको झूठ और एकतरफ़ा सुनने पढ़ने की आदत हो चुकी है इसलिये सच कड़वा और नकारात्मक लगता है.

वामपंथियों की बातों पर मत जाएं, यथार्थ जानने के लिये उनके कर्म देखिये. जाकर देखिये बंगाल का क्या हाल बनाया था और आज केरल का क्या हाल है. बंगाल ग़रीबी में धँसा हुआ है और केरल में आज़ादी की जगह पूरी अराजकता है. वामपंथ रूस से लेकर चीन तक में दशकों से राज कर रहा है वहाँ कितनी आजादी है लेकिन ये हर जगह आजादी के नारे लगाते हैं.

असल में वामपंथियों और सेक्यूलर से नहीं इनके दोगलेपन से आपत्ति है. यह आजकल जुनैद को लेकर बड़ी बात कर रहे है जबकि वो एक आपराधिक दुर्घटना है जो हर दसवें मिनट हिंदुस्तान में कहीं न कहीं घटती रहती है लेकिन ये सिर्फ़ जुनैद की बात करेंगे मगर कश्मीर के डीएसपी और लेफ़्टिनेंट की भीड़ द्वारा हत्या पर चुप्पी मार जायेंगे.

यह अख़लाक़ पर अवार्ड वापस करेंगे मगर डॉ नारंग की हत्या पर एक शब्द नहीं कहेंगे. यह सूची बहुत लंबी है, इन्होंने 2002 पर ज़मीन आसमान एक कर दिया मगर गोधरा का नाम भी नहीं लेते. क्या यह सच नहीं कि अगर गोधरा नहीं होता तो 2002 भी नहीं होता.

मुस्लिम समाज की कट्टरता और अतिवादी सोच से विश्व परेशान है, ऐसे में उनकी गल्तियों पर पर्दा डालना विनाशकारी है. मगर ये सेक्यूलर वामपंथी गिरोह इनकी हर बड़ी से बड़ी ग़लती को नज़रअंदाज़ करते हैं, मगर हिंदुओं की किसी छोटी से छोटी एक-दो दुर्घटना का भी तिल का ताड़ बना देते हैं.

इनके इसी दोगलेपन के कारण कश्मीरी पंडित अपने ही देश में दर-दर ठोकरें खाने के लिये मजबूर हैं और ये फिर भी कश्मीर को लेकर छाती पीटते रहते हैं. ये आख़िर कश्मीर को बनाना क्या चाहते हैं? सीरिया या शरिया लॉ वाला राज्य?

ऐसा होने पर सबसे ज़्यादा नुक़सान कश्मीरियों का ही है मगर ये, यह सच उन्हें समझने देना नहीं चाहते. ये मुस्लिम समाज की हर गल्ती पर पर्दा डालकर उनका अहित ही कर रहे है, उन्हें पुचकार कर उन्हें और बिगाड़ रहे है. ऐसा करके यह भविष्य को भयावह बना रहे है. इसलिये मैं इन्हें आंतकवादियों से अधिक ख़तरनाक मानता हूँ.

यही हाल इनका विश्व स्तर पर है. यह तिब्बत और बलूचिस्तान पर चुप रहते हैं. ये रोज़ घटने वाली आंतकवादी घटना पर चुप रहते हैं. यह चुप्पी इनकी लंबे समय से चली आ रही है, ये तो भारत के इतिहास लेखन में भी हमारे ऊपर की गयी असहनीय क्रूरता पर भी चुप्पी कर गये.

इनके चुप कर जाने से क्या कोई सुधार की संभावना बनी? नहीं, बल्कि स्थिति और बिगड़ी है. कल कश्मीर ख़ाली कराया गया था, आज केरल और बंगाल को ख़ाली कराने की ख़बरें आती है. कैराना एक सच है, इस सच को लिखकर सतर्क करना नकारात्मक ना होकर सकारात्मक पहल है. समाज को इसका स्वागत करना चाहिये.

मित्र, आदमी को सीधा सज्जन भोला होना चाहिये मगर मूर्ख नही. तूफ़ान को देखकर आंख बंद नहीं की जाती. चाणक्य ने सच ना कहा होता तो भारत सदियों पहले भारत ना बच पाता. आज भी भारत को अगर बचाना है तो सच बोलना होगा.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY