ध्यान ही जीवन : डूबना है तो पहले तैरना सीखो

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लोग अक्सर पूछते हैं कोई ऐसी ध्यान विधि बताइये जिससे मन शांत हो. जब उनसे कहा जाए कि आँखें बंद करके बैठ जाइए कुछ नहीं करना है, बाकी सबकुछ अपने आप ही घटित होगा. तो सबसे पहला सवाल होता है, आँखें बंद करते से ही इतने सारे विचार आने लगते हैं कि ध्यान लग ही नहीं पाता.

आप में से अधिकतर लोगों ने सड़क पर कोई ना कोई वाहन चलाया होगा, चाहे साइकिल हो, दोपहिया वाहन हो या फिर कार. सड़क पर चलते हुए हमें सैकड़ों लोग मिलते हैं, क्या हम उन सबसे नमस्ते करते हुए चलते हैं क्या? या हर किसी से बात करने लगते हैं क्या? नहीं ना, वो आते हैं सामने से और बाजू से निकल जाते हैं.

बस विचारों को भी ऐसे ही आने दीजिये और अपने बाजू से अजनबियों की तरह निकल जाने दीजिये. उनसे उलझिये मत. उनसे नमस्ते करने मत बैठ जाइये. जानती हूँ मानव स्वभाव है, गप्पे लड़ाने की बुरी आदत होती है उसे, लेकिन ध्यान में बैठकर उन विचारों से गप्पे लड़ाने मत बैठ जाइये. ज़्यादा ही हो तो उनसे कह दीजिये अभी ज़रा जल्दी में हूँ आकर मिलते हैं, फिर खूब गप्पे लड़ाएँगे.

पिछली बार रेचन की दो विधियां बताई थीं, पहली नकारात्मक विचारों की काल्पनिक गेंद बनाकर हवा में उछालिये या फिर रेत के टीले की कल्पना कर उस पर खूब मुक्के बरसाइये.

उसी तरह एक विधि और है रेचन की, समझ लीजिये आप पानी में खड़े हैं, पानी आपके सर के ऊपर बह रहा है, तैरना आपको आता नहीं, तो आप बचने के लिए कम से कम हाथ पाँव तो चलाएंगे ही. बस तो अपने पैरों को थोड़ा दूर जमाकर अपने दोनों हाथों से सामने से आ रहे विचारों को पानी के बहाव की तरह दोनों हाथों से एक साथ हटाते जाइए. वैसे ही जैसे तैरते समय किया जाता है. आँखें बिलकुल सामने और भाव यही कि बस आज तो डूबना नहीं है कैसे भी कर के इसे तैरकर पार करना है.

यकीन मानिए आपकी आँखों में संकल्प अपने आप उतर आएगा. नकारात्मक विचार सामने से हटते जाएंगे और पानी बिलकुल स्वच्छ और निर्मल हो जाएगा. बस यही क्षण है जब आपके हाथ जवाब दे जाए और आँखों के साथ साथ मन भी उस संकल्प में दृढ़ हो जाए तो अपने हाथ से अपनी नाक को बंद कीजिये वैसे ही जैसे पानी में डुबकी लगाने के लिए करते हैं. और डूब जाइए उसी में जिसमें तैरना सीख रहे थे.

जितनी देर सांस सहजता से बंद रख सके बिना साँस लिए, बंद रखिये. फिर अंत में हमेशा की तरह शवासन में लेट जाइए. और फिर साक्षी भाव से देखिये जो कुछ भी भीतर घटित हो रहा है.

हाँ गप्पे यहाँ भी नहीं लड़ाना है… बस ऐसे देखिये जैसे सिनेमा के परदे पर कोई रहस्यमयी फिल्म देख रहे हैं, घनघोर अँधेरा है और बस अब रहस्य खुलने ही वाला है.

उसके बाद क्या रहस्य खुला अपने अनुभव हमसे अवश्य बांटिये.

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