इसे तो पत्रकारों पर हमला नहीं माना जाएगा, क्योंकि वहाँ भाजपा की सरकार नहीं

बंगलौर में दो पत्रकार पुलिस से बचने के लिए फरार हैं. येलहंका वॉइस (Yelahanka Voice) के पत्रकार अनिल राजू और हाई बैंगलोर (Hai Bangalore) के रवि बेलागेरे ने करीब तीन साल पहले कांग्रेस के दो और भाजपा के एक विधायक के खिलाफ आर्टिकल लिखे थे.

इन विधायकों ने विधानसभा में इसे ब्रीच ऑफ़ प्रिविलेज बताया. कर्नाटक विधानसभा ने जांच की. जांच के बाद कर्नाटक विधानसभा ने इसे अपनी इज्जत, चरित्र पर हमला माना और पिछले हफ्ते विधानसभा की प्रिविलेज कमेटी ने दोनों पत्रकारों को एक साल सश्रम कारावास और दस हजार जुर्माने की सजा सुनाई.

पत्रकार अनिल अगले दिन पुलिस की गिरफ्त में आने से बचने के लिए फरार हुए. रवि अस्पताल में कुछ दिन भर्ती रहे, पुलिस अस्पताल के बाहर उनके डिस्चार्ज होने के इंतजार में खड़ी रही. लेकिन कल रवि भी फरार होने में सफल हुए.

दोनों ही पत्रकारों ने कर्नाटक हाई कोर्ट में अपील दायर की हुई है. आश्चर्य तो ये है कि एक विधानसभा खुद ही विक्टिम है, खुद ही जज है.

खैर, इसे पत्रकारों पर हमला नहीं मानना चाहिए न ही इसे मीडिया को खामोश करने की कोशिश माननी चाहिए. क्योंकि कर्नाटक में भाजपा की सरकार नहीं है.

और इसीलिए इस फैसले के खिलाफ कहीं कोई रोष प्रदर्शन नहीं है. NDTV के मालिक पर छापा लोकतंत्र पर हमला है. आवाज सिर्फ उसके लिए उठेगी.

कांग्रेस से हड्डी मिलती है, पद और पुरस्कार मिलते हैं. इसलिए मीडिया, सेक्युलर तंत्र उसकी छवि को अपनी चमड़ी से साफ़ करता है, अपने ही साथियों के खून से धोता है.

इन से उम्मीद नहीं है, होनी भी नहीं चाहिए. जानवरो की स्वामीभक्ति प्रकट है, उनकी दुम दबी हुई है.

मैं कर्नाटक विधानसभा द्वारा पारित इस फैसले की कटु निंदा करता हूँ. अगर विधायकों को लगता है कि उनका चरित्र हनन हुआ है तो अदालत में जाएँ, मुकदद्मा दायर करें और हर्जाना मांगे.

विधानसभा या संसद को आर्टिकल 194 के तहत ब्रीच ऑफ़ प्रिविलेज के ऊपर सजा देने का अधिकार संविधान में इसलिए मिला है ताकि कोई व्यक्ति विधानसभा या संसद को चलने से रोक न सके, माननीय सांसद या विधायक निर्भय होकर अपनी बात कह सकें, उन्हें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हो… इसलिए नहीं कि कोई उनकी आलोचना न कर सके.

कुछ ही दिन पहले हमने इसी संविधान प्रदत अधिकार का दिल्ली विधानसभा में गलत इस्तेमाल होते देखा था जब केजरीवाल की AAP पार्टी ने EVM के हैक हो जाने का डेमो विधानसभा में किया था.

ऐसे में विधानसभा स्पीकर द्वारा पत्रकारों को जेल की सजा देना गलत है, निहायत गलत. प्रेस का गला घोटने का विधानसभा को ऐसा कोई अधिकार नहीं.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY