कहानी पुरानी है पर द्वार अब भी खोलती है!

एक राजा ने बहुत ही सुंदर महल बनवाया और महल के मुख्य द्वार पर एक गणित का सूत्र लिखवाया और एक घोषणा की कि इस सूत्र से यह द्वार खुल जाएगा और जो भी इस सूत्र को हल कर के द्वार खोलेगा में उसे अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दूंगा.

राज्य के बड़े-बड़े गणितज्ञ आये और सूत्र देखकर लौट गए, किसी को कुछ समझ नहीं आया. आखिरी दिन आ चुका था, उस दिन तीन लोग आये और कहने लगे हम इस सूत्र को हल कर देंगे.

उनमें से दो तो दूसरे राज्य के बड़े गणितज्ञ थे, जो अपने साथ बहुत से पुराने गणित के सूत्रों की पुस्तकों सहित आये थे. लेकिन एक व्यक्ति जो साधक की तरह नजर आ रहा था, सीधा-सादा, कुछ भी साथ नहीं लाया था.

उसने कहा मै यहां बैठा हूँ पहले इन्हें मौक़ा दिया जाए. दोनों गहराई से सूत्र हल करने में लग गए लेकिन द्वार नहीं खोल पाये और अपनी हार मान ली.

अंत में उस साधक को बुलाया गया और कहा कि आप सूत्र हल करिये समय शुरू हो चुका है. साधक ने आँख खोली और सहज मुस्कान के साथ द्वार की ओर गया. साधक ने धीरे से द्वार को धकेला और यह क्या? द्वार खुल गया.

राजा ने साधक से पूछा – आप ने ऐसा क्या किया? साधक ने बताया जब मैं ‘ध्यान’ में बैठा तो सबसे पहले अंतर्मन से आवाज आई, कि पहले ये जाँच तो कर ले कि सूत्र है भी या नहीं. इसके बाद इसे हल करने की सोचना और मैंने वही किया!

कई बार जिंदगी में कोई समस्या होती ही नहीं और हम विचारों में उसे बड़ा बना लेते हैं.

मोदी ने वह सब आसानी से कर दिखाया जिसे कम्युनिस्टों, सामियों, काँन्गियों ने इन सत्तर सालो में बहुत बडी समस्या बना दी थी.

आप मानें या न मानें, आज आप दुनिया की महाशक्ति बन गए हैं. अमेरिका के वाइट-हाउस में जहां अमेरिकन प्रेसीडेंट ने किसी को कभी भोजन नहीं करवाया. आज इन्तजार करके आपके प्रधानमंत्री को दावत करवाई, वह भी एक हजार चैनलों की न्यूज कवरेज के साथ. उस साधक ने विश्वशक्ति का ताला खोल दिया. गर्व करें मोदी पीएम हैं.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY