ध्यान ही जीवन : ढहा दो टीला रेत का

अक्सर समस्या इतनी ही भुरभूरी होती है, रेत की दीवार जैसी, जिसे हम लोहे की समझकर उसमें कैद होकर रह जाते हैं. और हिम्मत नहीं जुटा पाते उसे तोड़ने की. बस आपकी संकल्प शक्ति और हौसला जिस दिन आपको उस दीवार को तोड़ने की हिम्मत देता है उस दिन आपको पता चलता है कि जिसे हम इतनी मजबूत दीवार समझ रहे थे वो कितनी कमज़ोर थी.

युवाओं के बीच अक्सर समस्या क्या होती है, दोस्ती में लड़ाई, नौकरी में गला काट प्रतियोगिता, प्रेम में ईर्ष्या और असफलता, बड़ों के आदर्शों में फिट न बैठना, समाज के नियम या उसी समाज में व्याप्त अराजकता. और आज के युवाओं में निराशा इतनी जल्दी घर कर जाती है कि फिर वो सिगरेट के धुंए और शराब में सहारा ढुंढने लगते हैं.

ऊपर से सोशल मीडिया भी सिर्फ़ नाम का ही सोशल रह गया है, क्योंकि ऐसी परिस्थिति में जहां युवाओं को परिवार और रिश्तेदारों के बीच रहना चाहिए, वहीं आज का युवा मोबाइल, कम्पूटर में मुंह घुसाए रहता है.

ऐसे में जो सबसे पहला कदम होता है वो है अपने मैं से बाहर आना. यानी यह समझना कि दुनिया में केवल मैं और मेरी समस्याएँ ही नहीं है बल्कि मुझसे भी बदतर स्थिति में लोग रह और जी रहे हैं, ख़ुद को ये आइना दिखाना बहुत ज़रूरी है. तभी आप अपनी समस्याओं के घेरे से बाहर आ सकेंगे.

लेकिन फिर भी आप अपनी समस्या से बाहर नहीं आ पा रहे तो सबसे पहले आप अपनी समस्या के ढेर को अपने ही हाथों से तहस नहस कर दें. इसलिए मानसिक तल पर बदलाव से पहले आवश्यक होता है शारीरिक तल पर सबसे पहले समस्या से निपट लिया जाए जिसका सीधा प्रभाव आपके मस्तिष्क के तंतुओं पर पड़ता है.

पिछली बार जो रेचन का तरीका बताया था जिसमें समस्या को एक काल्पनिक गेंद बनाकर उछालना है. कुछ उसी से मिलता जुलता तरीका है रेत का काल्पनिक टीला और उस पर मुक्के बरसाना. और यदि आसपास सच में कहीं कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा है तो रेत के ढेर पर सच में मुक्के बरसा आइये. और तब तक बरसाते रहिये जब तक शरीर थक कर चूर नहीं हो जाता.

यह भी रेचन का तरीका होता है. एक बार समस्या से शारीरिक तल पर लड़ने का मन बना लिया तो यकीनन मानसिक तल पर स्वत: परिवर्तन होगा.

फिर हमेशा की तरह रेचन के बाद विश्राम अवस्था में आकर आँख बंद कर शवासन जैसी योग क्रियाओं का सहारा लिया जा सकता है. या सुखासन में बैठकर आती जाती साँसों पर ध्यान लगाकर एकाग्र चित्त हो जाइये.

जैसे जैसे यह रेट का टीला ढहता जाएगा, वैसे वैसे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा, आपके आसपास सकारात्मक आभामंडल विकसित होगा, जो यकीनन आपके ऊर्जा स्तर को ऊर्ध्वगामी बनाए रखने में मदद करेगा.

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