भद्रकाली मंदिर को तोड़ कर बनाई मस्जिद कैसे हो गई सद्भावना का प्रतीक!

आज मुस्लिम समुदाय के पवित्र दिवस ‘ईद’ के मौके पर एक समाचार पत्र ‘दैनिक भास्कर’ ने भद्दा मजाक किया हैं…

‘दैनिक भास्कर’ के सभी एडिशंस के पहले पृष्ठ पर सबसे ऊपर समाचार हैं, ‘सद्भाव और समानता की एक तस्वीर’. आगे लिखा हैं, ‘हिन्दू शैली के 152 स्तंभों से बनी 594 वर्ष पुरानी मस्जिद, कमल जैसा हैं इसके गुंबद का आकार.’

समाचार अहमदाबाद की ‘जामा मस्जिद’ का है. साबरमती नदी के किनारे स्थित यह मस्जिद देश की सबसे खूबसूरत मस्जिदों में गिनी जाती हैं. लेकिन यह मस्जिद प्राचीन हिन्दू और जैन मंदिरों के अवशेषों पर बनाई गयी हैं, जो हर कोई जानता हैं.

पर्यटन के बारे में पूरे विश्व में सबसे अधिक विश्वसनीय माने जाने वाले ‘लोनली प्लेनेट’ ने लिखा हैं – ‘Built by Ahmed Shah in 1423, the Jama Masjid ranks as one of India’s most beautiful mosques. Demolished Hindu and Jain temples provided the building materials, and the mosque displays some architectural fusion with these religions, notably in the lotus-like carving of some domes, which are supported by the prayer hall’s 260 columns.’ (सन्दर्भ – https://www.lonelyplanet.com/india/ahmedabad-amdavad/attractions/jama-masjid/a/poi-sig/478370/356239)

मूलतः यह मस्जिद ‘भद्रकाली मंदिर’ को तोड़ कर बनाई गई है. दुनिया के किसी भी मस्जिद में प्रार्थना स्थल पर खंबे नहीं होते, या बिलकुल कम होते हैं. खुली जगह होती हैं. लेकिन यहाँ तो सैकड़ों खंबे (260) हैं. वह भी आकृतियाँ उकेरे हुए.

इस्लाम में मूर्ति पूजा निषिद्ध हैं. फिर प्रार्थना स्थल पर आकृतियां उकेरे हुए इतने खंबे क्यों और कैसे..? क्योंकि यह मूलतः मस्जिद थी ही नहीं. यह तो भद्रकाली मंदिर को ध्वस्त कर बनाई गयी मस्जिद हैं.

यह अकेला उदाहरण नहीं हैं. अयोध्या के बाबरी ढांचे के नीचे से निकले मंदिर के अवशेष हम सबने देखे हैं. क़ुतुब मीनार के नीचे दबे हुए मंदिर के अवशेष और गणेश मूर्ति आज भी देखे जा सकते हैं.

ऐसे कितने ही मंदिर और मठ हैं, जिन्हें मुस्लिम आक्रान्ताओं ने मस्जिदों में बदल दिया. किन्तु उन्हें ‘हिन्दू – मुसलमान सद्भावना का प्रतीक’ कहना यह हिन्दू आस्था के साथ भद्दा मजाक है.

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