रामस्य ईश्वर: स: रामेश्वर: : राम ईश्वरो यस्य सः रामेश्वरः

अगर आप राष्ट्रवादियों की बहस देख रहे हैं तो एक बार रामेश्वरम याद कीजिये. प्रभु रामेश्वरम् के ज्योतिर्लिंग की स्थापना श्री राम ने रामसेतु बनाने से पहले की थी. जब महावीर हनुमान ने उनके द्वारा दिए गए शिव लिंग के इस नाम का मतलब पूछा तो भगवान् राम ने शिव जी के नवीन स्थापित ज्योतिर्लिंग के स्वयं द्वारा दिए इस नाम की व्याख्या में कहा-

रामस्य ईश्वर: स: रामेश्वर:

मतलब जो श्री राम के ईश्वर हैं वही रामेश्वर हैं.

बाद में जब रामसेतु बनने की कहानी भगवान् शिव, माता सती को सुनाने लगे तो बोले के प्रभु श्री राम ने बड़ी चतुराई से रामेश्वरम नाम की व्याख्या ही बदल दी. माता सती ने पूछा, ऐसा कैसे? तो देवाधिदेव महादेव ने रामेश्वरम नाम की व्याख्या करते हुए उच्चारण में थोड़ा सा फ़र्क बताया-

राम ईश्वरो यस्य सः रामेश्वरः

यानि श्री राम जिसके ईश्वर हैं वही रामेश्वर हैं.

अगर आप अब्राहमीक रिलिजन के चश्मे से देखेंगे तो ये कहानी जरा अजीब सी लग सकती है. इसे एक भारतीय की नजर से देखिये. आप अगर आस पास के किसी भगवान राम के मंदिर में जाकर बैठें और अपने मोबाइल फोन में वहां शिव तांडव का ऑडियो बजा दें तो क्या होगा ? क्या कोई टोकेगा कि राम के मंदिर में शिव की महिमा क्यों बजा रहे हो ? नहीं, उल्टा हो सकता है दो चार और लोग सुनने के लिए, हाथ जोड़े, पांच मिनट रुक जाएँ.

अब्राहमिक रिलिजन के चश्मे से ये अजीब होता है, क्योंकि वहां एक ईश्वर का भाव होता है. विदेशियों को ये अजीब लगेगी, लेकिन भगवान राम को पूज्य मानने के साथ साथ शिव की महिमा सुनना, वो भी उस शिव तांडव में जो कि राम के शत्रु रावण की रचना है, बिलकुल नार्मल बात है. हमारे लिए एक का समर्थक होने का मतलब दूसरे का विरोधी हो जाना नहीं होता है.

ये कहानी वर्चुअल वर्ल्ड यानि आभासी दुनिया की बहसों में भी याद रखिये. यहाँ अगर आप दो घनघोर किस्म के राईट विंग, अर्थात हिन्दुत्ववादी महानुभावों को किसी मुद्दे पर धुर विरोधी भी देखते हैं तो गलतफहमी बिलकुल मत पाल लीजिये. अलग अलग शहरों में बैठे ये लोग शायद रोज़ ही एक दूसरे से फ़ोन पर बात करते हैं. कमेंट में किसी मुद्दे पर बात के साथ इनबॉक्स में कोई और चर्चा चल रही होगी. राम-रावण जैसे विपरीत धुरी पर दिखते हुए भी ये शिव के मुद्दे पर फिर एक होंगे.

बाकी थोड़ी छेड़-छाड़ से अब्राहमिक, बदल कर अब्रह्मिक, यानि ब्रम्ह के अभाव से ग्रस्त हो जाता है. अन्दर के तत्व को अनदेखा करके. बाहर के खोल पर ध्यान मत टिकाइए.

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