होमी भाभा राष्ट्रीय संस्थान (HBNI) बनेगा पूर्ण विश्वविद्यालय

विज्ञान में उच्च शिक्षा एवं गुणवत्तापूर्ण शोध को बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार ने कुछ बहुत अच्छे कदम उठाये हैं. पहला तो यह किया था कि सरकार बनते ही पीएचडी की फेलोशिप बढ़ा दी थी. संघ के आनुषंगिक संगठन विज्ञान भारती के साथ मिल कर मंत्रालय ने तीन बार India International Science Festival आयोजित करवाए जिसमें पड़ोसी देशों के हजारों छात्रों ने भाग लिया था. अब सरकार होमी भाभा राष्ट्रीय संस्थान (HBNI) को कानून बना कर विधि द्वारा मान्यता देने जा रही है. HBNI बिल 2017 प्लाज़्मा अनुसन्धान संस्थान (IPR) की वेबसाइट पर आमजन के सुझावों की प्रतीक्षा कर रहा है. होमी भाभा के बारे में तो सब जानते हैं किन्तु HBNI के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं.

HBNI के अधीन कुल ग्यारह शोध संस्थान हैं जो परमाणु ऊर्जा, उच्चतर गणित एवं भौतिकी में विश्व स्तरीय शोध करते हैं. इनकी सूची इस प्रकार है:

Bhabha Atomic Research Centre, Mumbai
Indira Gandhi Centre for Atomic Research, Kalpakkam
Raja Ramanna Centre for Advanced Technology, Indore
Variable Energy Cyclotron Centre, Kolkata
Saha Institute of Nuclear Physics, Kolkata
Institute for Plasma Research, Gandhinagar
The Institute Of Physics (IoP), Bhubaneswar
Harish-Chandra Research Institute, Allahabad
Tata Memorial Centre, Mumbai
The Institute of Mathematical Sciences, Chennai
National Institute of Science Education and Research, Bhubaneswar (Off Campus Centre)

इन सभी संस्थानों को परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) से सीधा ग्रांट मिलती है जो प्रधानमंत्री कार्यालय के अधीन स्वतंत्र विभाग है. अर्थात् DAE के उपर कोई मंत्रालय नहीं है. पहले सभी ग्यारह संस्थान मुंबई विश्वविद्यालय, ओड़िसा, कलकत्ता विश्वविद्यालय इत्यादि से मान्यता प्राप्त कर पीएचडी डिग्री देते थे. परन्तु चूँकि ये सभी शोध संस्थान हैं, यहाँ रेगुलर बीएससी या एमएससी डिग्री नहीं मिलती इसलिए इन सभी को एक स्वतंत्र डिग्री देने लायक यूनिवर्सिटी के अधीन करना आवश्यक था. इसका बीड़ा उठाया प्रो० रवि ग्रोवर साहब ने. 2003-05 के बीच ग्रोवर साहब के प्रयासों के कारण अणुशक्ति नगर मुम्बई में HBNI स्थापित किया गया और उसे डीम्ड यूनिवर्सिटी की मान्यता दी गयी.

सन 2005-14 तक 9 वर्षों में कांग्रेस सरकार को ये समझ में नहीं आया कि वैज्ञानिक शोध के उच्च संस्थान और डीम्ड स्टेटस में क्या अंतर होता है. डीम्ड का सिद्धांत उन शैक्षणिक संस्थाओं के लिए था जो शैशवावस्था में थी और कालान्तर में उन्हें डिग्री देने लायक मापदंडो पर खरा उतरना था. जबकि DAE द्वारा पोषित ग्यारह संस्थान HBNI के गठन से कई दशकों पूर्व से देश सेवा कर रहे थे. ऐसे में HBNI को 2005 में स्थापना के कुछ वर्ष बाद ही एक्ट बना कर पूर्ण विश्वविद्यालय का दर्जा दिया जाना चाहिए था. उसी प्रकार जैसे IIT और AIIMS हैं. मुझे प्रसन्नता है कि मोदी सरकार अब HBNI को पूर्ण विश्वविद्यालय का दर्जा देने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है जिससे HBNI और इससे संबद्ध संस्थानों को एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय जितना ग्रांट मिलेगा. वैज्ञानिक संस्थानों की प्रशासनिक व्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण निर्णय सिद्ध होगा.

HBNI के अधीन BARC, IoP, IPR, IGCAR जैसे उत्कृष्ट शोध संस्थान हैं. यहाँ पढ़ना मेरे जैसे विद्यार्थियों का सपना होता है. HBNI से ही सम्बद्ध प्रयाग स्थित हरीश्चन्द्र अनुसन्धान संस्थान (HRI) के प्रोफेसर अशोक सेन को 2012 में करोड़ों रूपये का Fundamental Physics Prize दिया गया था. प्रो० सेन स्ट्रिंग थ्योरी में शोध करते हैं. मेरी उनसे दो बार अनौपचारिक मुलाकात हुई है. HRI में क्वांटम कम्पुटर पर भी सैद्धांतिक शोध किया जाता है. HBNI के साहा इंस्टिट्यूट (SINP) ने विश्व की सबसे बड़ी प्रयोगशाला LHC-CERN में बड़े बड़े electromagnet बना कर भेजे थे. प्लाज्मा शोध के उद्देश्य से स्थापित किया गया IPR गांधीनगर अंतर्राष्ट्रीय संस्था ITER का भी सदस्य है. HBNI के संस्थानों में प्रवेश के लिए JEST और DGFS परीक्षाएं आयोजित कराई जाती हैं. (गूगल करें). यहाँ लगभग 25000 रुपये छात्रवृत्ति भी दी जाती है.

साथ में एक बात और कहना चाहता हूँ. टाटा मूलभूत अनुसन्धान संस्थान (TIFR) देश का अग्रणी संस्थान है. विडम्बना है कि इसे अभी तक डीम्ड दर्जा ही प्राप्त है. भाजपा के ही एक सांसद ने एक बार सदन में TIFR को पूर्ण विश्वविद्यालय बनाने के लिए प्रश्न पूछा था किन्तु इस पर आगे क्या हुआ पता नहीं. टीआईएफआर जैसे संस्थान भारत की शान हैं. बहरहाल HBNI बिल पारित होने के पश्चात भारतीय विज्ञान संस्थान (IISC बेंगलुरु) के साथ ही HBNI देश का दूसरा पूर्णतः शोध आधारित विश्वविद्यालय होगा.

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