ध्यान ही जीवन : समस्या को गेंद बनाकर उछालो और फेंक दो दूर आकाश में

कोई विचार आपको परेशान कर रहा है और आप उससे छुटकारा पाना चाहते हैं, तो उसकी एक काल्पनिक गेंद बनाइये, उसे वास्तविक रूप से एक हाथ से दूसरे हाथ में उछालिये. जितना ऊपर उछालेंगे वो उतना आपसे दूर होता जाएगा.

फिर लौटकर भी आएगी गेंद… इसलिए इसे तब तक उछालते रहिये जब तक शरीर थक कर चूर नहीं हो जाता. और जब शरीर जवाब दे जाए तब उसे अपनी पूरी बची हुई ताकत से इतनी जोर से ऊपर आसमान में उछालिये कि वो लौटकर ही ना आ सके.

व्यवस्था हो या किसी की फिक्र ना हो तो उस काल्पनिक गेंद को अंतिम बार उछालते हुए चाहे तो ज़ोर से चिल्लाइये, गाली दीजिये, जिबरीश कीजिये… जो मन चाहे कीजिये… फिर भी लौट आए तो  उसे अपने पैरों से कुचल कुचल कर नष्ट कर दीजिये…

यह एक तरह का रेचन है… फिर गहरी सांस लेते हुए आरामदायक अवस्था में बैठ जाइए… आँखें बंद कीजिये और उस शांति और सुकून को साक्षी भाव से देखिये जो रेचन करने के बाद अनुभव  हो रही है…

चाहे तो बैठकर चाहे लेटकर.. मस्तिष्क को पूर्ण विश्राम की सुविधा दीजिये. यदि विचार फिर लौट आए तो अगले दिन फिर वही क्रिया दोहराइए… उसे तब तक दोहराते रहिये जब तक वो आपका पीछा नहीं छोड़ देता.

यकीन मानिये आपका संकल्प एक दिन उस काल्पनिक गेंद को इतना ऊपर उछाल देगा कि वो फिर कभी लौटकर नहीं आएगी… आ भी गयी तो वो इतनी हल्की हो चुकी होगी कि फिर आपको इतनी शक्ति नहीं लगाना पड़ेगी… पानी के बुलबुले की तरह आपके छूने भर से फूट जाएगी…

एक बार आपका अभ्यास हो जाएगा तो उसे वास्तविक रूप से भी उछालना नहीं पड़ेगा, जैसे ही लगे कोई नकारात्मक विचार या समस्या आक्रमण करने आ रही है तो उसे काल्पनिक रूप से ही मन में उछालना शुरू कर दीजिये. आखिर विचार क्या है… आपकी कल्पना ही तो है..

इसलिए पहले रेचन फिर ध्यान… क्योंकि ध्यान ही जीवन है.

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