माँ की रसोई में जब शिवजी आये ढोकला खाने!

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एक दिन अचानक स्वामी ध्यान विनय का ध्यान भंग हुआ, कारण… मैं उनके आसपास तरह तरह के स्वादिष्ट व्यंजन बना बना कर नृत्य कर रही थी…

अब विश्वामित्र तो हैं नहीं कि मेनका के रूप लावण्य और स्वादिष्ट व्यंजनों पर मुग्ध हो जाए… वो ठहरे सच्चे ध्यानी ज्ञानी… तो क्रोध में आकर मेनका मतलब मुझको को श्राप दे बैठे….

आज तक आप जो भी लिखती रहीं, चाहे रेसिपी हो या राजनैतिक लेख, या आपकी अपनी जीवन गाथा… सबमें मेरा ज़िक्र… सब में आप मुझे ही केंद्र में रखती हैं…

तो हे सुन्दरी, कुशल गृहणी आज  मैं आपको श्राप देता हूँ कि आप मुझे कभी अपनी फेसबुक पोस्ट में टैग नहीं कर सकेंगी… और इसलिए मैं आपको ब्लॉक करता हूँ…

मेनका के हाथ से भोजन की थाली छूट गयी… वो बेचारी रोती हुई माँ अन्नपूर्णा की साधना में लग गयी… हे माँ अन्नपूर्णा, यदि मेरे स्वामी को ही मैं टैग ना कर सकूं तो मेरे लिखने का क्या लाभ.. इससे अच्छा तो तू मेरी ये पाककला ही छीन ले… मैं अपनी वेबसाइट पर रेसिपी वाला कॉलम ही बंद कर देती हूँ…

माँ अन्नपूर्णा मेरी साधना से प्रसन्न हुई, और स्वामी ध्यान विनय की स्वादेन्द्रियों और नासिका पर ऐसा जादू किया कि वो पेट पर हाथ फेरते हुए आए और कहने लगे –

देवी आज मैंने आपका ब्लॉक खोल दिया है… लेकिन ना जाने क्यों मेरी जीभ आपके करकमलों से बने स्वादिष्ट ढोकले खाने को लपलपा रही है…

हमेशा आध्यात्मिक प्रवचनों के लिए लपर लपर चलने वाली इस शांत प्रकृति के जीव की जीभ के ये हाल देखकर मुझ करुणामयी का ह्रदय मातृत्व भाव से भर उठा…

मैंने भी स्वामी के चरण पकड़कर फेसबुक पर दुबारा मित्रता निवेदन भेजा…

उन्होंने उसे स्वीकार करते हुए मेरे कंधे पकड़कर अपने चरणों से उठाया- देवी मैं आपकी भावना, प्रेम और समर्पण को पूरा सम्मान देता हूँ, परन्तु आपके पाठक वर्ग के बारे में भी तो सोचिये, वो हर लेख में मेरा ज़िक्र पढ़कर कितने पक चुके होंगे, आप प्रतिभावान है, आपके लेखन की तारीफ़ मैं अपने बचपन से … मतलब हमारे रिश्ते के बचपन से करता आ रहा हूँ… आप अपना स्वतन्त्र लेखन कीजिये, मेरे नाम के बिना भी तो आपका लेख पूरा हो सकता है… क्यों अपने पाठकों को जबरदस्ती मेरे नाम से झिलवाती हैं?

मैंने भी आँचल से अपने आंसू पोंछते हुए भाव विभोर होकर कहा- स्वामी, आप ही तो मेरे लेखन की ऊर्जा का स्रोत हैं, शिव के बिना शक्ति किस रूप में प्रकट होगी… परन्तु मैं आपको वचन देती हूँ… मेरे लेख में चाहे आपका ज़िक्र हो ना हो, मैं आपको कभी फेसबुक पर टैग नहीं करूंगी.

लेकिन आप भी वचन दीजिये कि शिव के बाराती गण या मेरे मायके वाले यदि आपको टैग करते हैं तो आप क्रोध में तांडव नहीं करने लग जाएंगे…

स्वामी ध्यान विनय हमेशा की तरह मुस्कुरा दिए और कहने लगे – देवी वैसे तो मैं इस संसार में किसी की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए अवतरित नहीं हुआ हूँ, लेकिन हर बार आप अपने प्रेम से मुझे सांसारिक बना ही देती हैं…

मैं भी प्रेम से उनका मुखड़ा निहारती खड़ी रह गयी… तभी उनके सौम्य चेहरे पर मैंने फिर से त्यौरियां चढ़ते हुए देखा– अब यहाँ खड़े खड़े मेरा मुंह देखते रहने से तो वो ढोकले जैसा तो नहीं ही हो जाएगा… जाइये आप अपनी पाक शाला में और ढोकला बनाकर अपने पाठकों को भी रेसिपी बताइये…

तो लीजिये जनाब ये है कहानी और रेसिपी ढोकले की… अरे हमारी कहानी पर ही मुग्ध मत हो जाइये.. रेसिपी पढ़िए और अपने अपने शिव/शक्ति को प्रसन्न कीजिये. माँ अन्नपूर्णा का आशीर्वाद सदैव आप सब पर बना रहे. लेकिन स्वामी ध्यान विनय को टैग करना मत भूलियेगा.

सामग्री

रवा/सूजी – 4 कटोरी
बेसन – 1 कप
दही – एक कप
नमक – स्वादानुसार
अदरक लहसुन हरीमिर्च का पेस्ट – आधा कप
तेल – 1 टेबल स्पून
इनो पाउडर या सोडा – 2 छोटी चम्मच

   तड़के के लिये

तेल – 3 बड़े चम्मच
राई-जीरा – 1 छोटी चम्मच
हरी मिर्च – 4 कटी हुई
बारीक कटा हरा धनिया
कढ़ी पत्ता

विधि

सबसे पहले रात को एक बड़े भगोने में रवा, बेसन, दही मिलाकर उसमें कुनकुना पानी डालकर उसे भिगो दीजिये.

वैसे तो इनो (फ्रूट साल्ट) डालकर आप तुरंत भी ढोकले बना सकते हैं. लेकिन एक रात पहले भिगो देने के कारण उसमें खमीर उठ जाने से वो अधिक स्पंजी बनते हैं.

अब दो कप घोल को एक अलग बर्तन में लेकर उसमें दो छोटी चम्मच तेल, एक चम्मच अदरक लहसुन हरी मिर्च का पेस्ट, स्वादानुसार नमक, आधी छोटी चम्मच शक्कर और एक चौथाई चम्मच इनो डालकर अच्छे से फेंट लीजिये.

इसके पहले ढोकला मेकर या चौड़े मुंह वाले कुकर में डेढ़ ग्लास पानी डालकर गैस पर रख दीजिये.

अब ढोकले के पॉट में हल्का सा तेल चुपड़कर उसमें उस घोल को पलट दीजिये.

कुकर में नीचे कोई छोटा सा स्टैंड लगाकर उस पर ढोकले का पॉट रख कर कुकर के ढक्कन को बिना सीटी लगाएं ढँक दीजिये.

जब तक सारा पानी उड़ ना जाए तब तक ढोकले को पकने दें. ढक्कन से भाप निकलना बंद हो जाए तो गैस बंद कर दें.

ढोकले थोड़े ठन्डे हो जाएँ तो उसे चाकू की सहायता से चोकोर काट दें.

अब एक कढ़ाही में तड़का लगाने के लिए तेल गरम करें.

उसमें राई, जीरा, कढ़ी पत्ता और कटी हरी मिर्च डालकर गैस बंद कर दें.

अब इसमें एक चौथाई कप पानी डालकर उसे तुरंत ढांक दें.

अब इस तड़के को ढोकले पर डालकर हरी धनिया काटकर बुरक दें.

लीजिये तैयार है गर्मागर्म ढोकला. हरी चटनी और सॉस के साथ खाएं.

और हर बार स्वामी ध्यान विनय को याद करें. वो जहां भी होंगे उनका आशीर्वाद आप तक अवश्य पहुंचेगा.

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