मोदी ने सिद्ध कर दिया कि वे सिद्धहस्त राजनीतिज्ञ हैं

मैं आडवाणी जी का जबर fan रहा हूँ… आज भी हूँ. मुझे बहुत खुशी होती अगर आडवाणी जी राष्ट्रपति बनते… पर मुझे उस से 100 गुणा ज़्यादा खुशी होगी अगर मोदी 2019 जीतें. आडवाणी जी के राष्ट्रपति बनने से बहुत-बहुत ज़्यादा ज़रूरी है 2019 में जीतना.

राम नाथ कोविंद को NDA का राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बना के शाह-मोदी ने तुरुप का इक्का चल दिया है. इसकी कोई काट नहीं.

कोविंद उत्तरप्रदेश से हैं. इनके सामने अगर विपक्ष मीरा कुमार या सुशील कुमार शिंदे को उतार भी दे तो भी कोविद की काट नही बनती.

मीरा कुमार बिहार और शिंदे महाराष्ट्र से हैं. UP की राजनैतिक वैल्यू ज़्यादा है. देश की राजनीति में UP का वजन ज़्यादा है.

कोविंद जाति के कोरी हैं. UP में दलितों में चमार जाटव और पासी के बाद कोरी सबसे ज़्यादा संख्या बल वाला और प्रभावशाली group है.

भाजपा की नज़र लंबे समय से मायावती के गैर जाटव-चमार दलित वोट पर रही है और भाजपा 2014 और 2017 में इनका बहुत ज़्यादा वोट लेने में सफल रही.

सच कहा जाए तो भाजपा की 2017 की UP विजय OBC, गैर जाटव-चमार दलित और मुस्लिम महिला वोट के कारण हुई.

2017 के UP चुनाव में मैंने लगातार अपने चुनावी विश्लेषण में भाजपा को 300+ सीट दी. मेरे आकलन-विश्लेषण का सिर्फ एक आधार रहा. 2014 कि तुलना में भाजपा किस किस वर्ग या जातीय समूह का कितना वोट loose या Gain कर रही है.

मेरा आकलन था कि भाजपा 2014 में प्राप्त सवर्ण भोट को न सिर्फ कायम रखेगी बल्कि और मजबूत करेगी और 2014 की तुलना में नए OBC और दलित जातीय समूहों का वोट gain करेगी. इसमें एक अप्रत्याशित Constituency जो आ जुड़ी वो थी मुस्लिम महिला (3 तलाक़ और हलाला के कारण).

2019 में यदि मोदी जी को 2014 दोहराना है तो उनको 2017 में अर्जित ये नए OBC और दलित जातीय समूहों को consolidate करना पड़ेगा.

कोविंद जी को राष्ट्रपति बनाना उसी दिशा में बढ़ाया गया कदम है. इस कदम से मोदी जी ने ये सिद्ध कर दिया कि वो Emotional Fool नहीं, बल्कि सिद्धहस्त राजनीतिज्ञ हैं. वो बेहद professional तरीके से राजनीति करते हैं.

लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, सुषमा स्वराज, सुमित्रा महाजन या थावरचंद गहलोत को राष्ट्रपति बनाने से भाजपा के वोट नही बढ़ते. कोविंद वोट बढ़ाते हैं.

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