क्रिकेट माफिया को मारने का सिर्फ एक तरीका, बंद करें इसे टीवी पर देखना

मैं कभी भी किसी भिखारी को भीख नही देता. Never… कभी नही. क्या आप जानते हैं कि देश में इस भीख और भिखारियों का एक बहुत बड़ा माफिया गिरोह है, जो पूरे देश में लोगों से भीख मंगवाता है.

देश का एक-एक चट्टी चौराहा, सब रेल-बस, हरेक ट्रैफिक सिग्नल, और इसपे भीख मांगने वाला एक-एक भिखारी इस माफिया द्वारा संचालित है और शाम को एक-एक पैसे का हिसाब लिया जाता है.

भीख मंगवाने के लिए हमारे-आपके बच्चे गली-मोहल्लों से, यात्रा करते ट्रेनों-बसों से अगवा कर लिए जाते हैं… फिर उनके अंग भंग कर, उन्हें बदसूरत बना, उन्हें अंधा लंगड़ा लूला बना के, उन्हें ड्रग एडिक्ट बना के उनसे भीख मंगवाई जाती है.

और हम हिन्दू, हम धर्म भीरु हिंदुस्तानी, मूर्ख emotional fools बन के, इनपे दया करके, इन्हें भीख दे के इस कारोबार को जिंदा रखते हैं. भीख का कारोबार हमारी मूर्खता के कारण फलता फूलता है.

अगर हम इन्हें ये भीख देने की मूर्खता बंद कर दें तो शायद आपके मुहल्ले से किसी बच्चे का अपहरण भीख माफिया द्वारा न हो.

इसी तरह ये ट्रेनों में भीख मांगता / वसूली करता ये नकली हिजड़ों का गिरोह… आपको क्या लगता है बिना GRP या RPF के संरक्षण के, इनकी मर्जी के खिलाफ भारतीय रेल में परिंदा भी पर मार सकता है?

प्रत्येक हिजड़े से GRP 200 से 500 रु रोज़ाना वसूलती है.

इसी तरह अनाधिकृत Vendor से. ये जो रेल में रंग वाली synthetic चाय बिकती है, ये क्या GRP की मर्जी के बिना बिक सकती है?

यदि आप किसी हिजड़े को 10 रु देते हैं या किसी अनाधिकृत vendor से चाय पीते हैं तो आप माफिया का पोषण कर रहे हैं.

इसी तरह ये क्रिकेट का खेल है…. इस खेल में आप सिर्फ एक मोहरा हैं. आप इसको टेलीविज़न पे देखने की मूर्खता करते हैं इसी से ये माफिया गिरोह पनप रहा है.

जब भी आप पाकिस्तान और हिंदुस्तान का मैच टेलीविज़न पे देखते हैं, तो जिहादी दाऊद इब्राहिम का गिरोह सट्टेबाजी में 20,000 करोड़ से ज़्यादा कमा लेता है.

क्रिकेट एक माफिया गिरोह है जिसे आप टीवी पे देख के ऑक्सीजन देते हैं. इस क्रिकेट माफिया को मारने का सिर्फ और सिर्फ एक तरीका है… इसे टीवी पे देखना बंद करो.

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