माँ की रसोई से : केरी का अचार

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गर्मियों का मौसम मुझे बहुत पसंद है… जानकर आश्चर्य हुआ ना, कौन होगा जिसे चिलचिलाती धूप और पसीने में तरबतर करनेवाली गर्मियां पसंद होगी… जी हाँ मैं हूँ वो जिसे गर्मियों का मौसम बहुत पसंद है… बहुत सारे कारण है उसके … सबसे पहले तो बच्चों की स्कूल से छुट्टियां तो उन पर समय की पाबंदी नहीं होती, जब जी चाहे उठे, जब जी चाहा नहाया, जी भर के खेलने को मिलता है और सबसे बड़ी बात स्कूल के होमवर्क से छुट्टी. तो बच्चों की खुशी में हम भी खुश.

दूसरा, गर्मियों का मौसम मुझे उन पुराने दिनों की याद दिलाता है जब अपने साथ साथ आसपास की घरों की छतें सूखते पापड़ बड़ी से भरी होती थीं…

गर्मियों का मौसम इसलिए भी पसंद है क्योंकि इन्हीं दिनों घर हींग और सिकी मेथी सौंफ की खुशबू से भर जाता है जब साल भर का अचार डलता है. मेरे लिए तो ये और भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि अचार के लिए केरी भी घर के पेड़ से ही तोड़ना होती है, जिसका अपना अलग ही मज़ा है.

बहरहाल इस वर्ष भी पेड़ से आम तोड़े गए और अचार डाला गया… घर हींग और मेथी संफ कलौंजी की भुंजी खुशबू से भर गया, और भर गयी साल भर के लिए तैयार अचार की बरणी. तो लीजिये अब रेसिपी भी जान लीजिये…

सामग्री

कच्चे आम – 5 किग्रा (8-10)
सरसों का तेल – 1 लीटर
हींग – एक छोटी चम्मच पीसी हुई
नमक – 200 ग्राम, या फिर आप जैसा खाते हैं उस हिसाब से बढ़ा लीजिये. वैसे मसाले में कम डालकर बाद में अचार को बरणी में भरकर ऊपर नमक की परत बिछा देने से आचार सुरक्षित रहता है.
हल्दी  – 100 ग्राम
लाल मिर्च पाउडर – 200 ग्राम
सौंफ – 200 ग्राम
मेथी – 200 ग्राम
पीली सरसों – 500 ग्राम
कलौंजी – 100 ग्राम

विधि

सबसे पहले तो यदि बाज़ार से बिना कटी केरी लाएं हैं या मेरी तरह सीधे पेड़ से तोड़ी हैं तो उनको साफ पानी से धोकर रात भर के लिए पानी में भिगो कर रखें.
अगले दिन इन्हें पानी से निकालकर, पोंछकर सुखा लें और फिर छोटे टुकड़ों में काटकर गुठलियाँ अलग कर लें.

सौंफ और मेथी को कम आंच पर सेंक कर दरदरा पीस लें.

अब एक बड़े भगोने में पीली सरसों, पीसी सौंफ मेथी, हल्दी, मिर्च, कलौंजी मिलाकर उसमें कटी हुई केरी डाल दें.

अब कढ़ाई में सरसों का तेल डालकर अच्छी तरह गरम कर लीजिये. फिर तेल को ठंडा होने दीजिये.

अब इसमें से कुछ तेल अचार में डालकर अच्छे से मिक्स कर लें.

ध्यान रहे सारी चीज़ों को मिलाने के लिए बड़ी कड़छी या चम्मच का ही उपयोग करें, इसमें हाथ न डालें.

अचार को अब कांच की बरणी या अचार भरने की विशेष बरनियां बाज़ार में मिलती हैं, उसमें डालकर ऊपर से बचा मसाला और तेल डालकर अच्छे से ढांक कर हफ्ते भर के लिये रख दीजिये.

कुछ दिनों के अंतराल में उसे चम्मच से हिलाते रहिये.

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कुछ पुरानी परम्पराएं हैं जिनको आजकल के आधुनिक लोग नहीं मानते, लेकिन फिर भी माहवारी के दिनों में अचार नहीं डालना चाहिए, ना ही उन दिनों अचार की बरणी को छूना चाहिए. इससे अचार जल्दी खराब होते हैं.

दूसरा हमारे यहाँ खाद्य पदार्थ को अन्नपूर्णा का प्रसाद माना जाता है, हमारे देश में ऐसी भी जगहें हैं जहां अचार को बनाने के बाद उसे पूजा जाता है.

कोई वैज्ञानिक कारण या तर्क खोजने की बात नहीं, खोजेंगे तो मिल भी जाएंगे, लेकिन बहुत मामूली सी चीज़ें हैं ये सब जिसे हमारा भाव और आस्था ही पवित्र बनाती है.

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