आओ सीखें हिन्दी : और फेसबुक पर हिन्दी का सोता फूटा ज़मीन फाड़ कर, हरहर, हरहर

मेरे जीवन का आधे से अधिक हिस्सा भारत के बाहर बर्तानिया में बीता है. तीन वर्ष पूर्व फेसबुक पकड़ने के पहले मेरे लिए यहाँ हिन्दी का बहुत काम न था. व्यस्त अंग्रेज़ डॉक्टर से हिन्दी का भला क्या काम सिवाय इक्का दुक्का किताब पढ़ने के या घर में आधी अधूरी कामचलाऊ बातचीत के.

चिट्ठी पत्री तो ज़माना हुआ बंद हुई और ईमेल तो अभी हाल तक सिर्फ अंग्रेज़ी में ही लिखे जाते थे. मुझे तो लगा मेरी हिन्दी सूख ही गई. कई बार किसी खास बात के लिए हिन्दी में सही शब्द नहीं सोच पाता था. तब बहुत कोफ़्त होती थी और भय भी होता था.

फेसबुक, इसकी तमाम बुराइयों के बावजूद, मेरे लिए वरदान साबित हुआ. बहुत लोग समझते हैं फेसबुक प्यार मुहब्बत की बातों का, इश्क़ लड़ाने का, फ़ोटो वग़ैरह दिखाने का माध्यम मात्र है.

मैं भी कुछ कुछ ऐसा ही समझता था. और यह बात शायद सच भी हो. पर फेसबुक भी तो बस एक माध्यम ही है जैसे पारम्परिक लिखाई पढ़ाई एक माध्यम है. आप की इच्छा – चाहे जो पढ़िए, चाहे जो लिखिए. इसमें बेचारी पढ़ाई लिखाई का क्या दोष?

कम से कम मेरे लिए तो फेसबुक वरदान सिद्ध हुआ. मेरी हिन्दी यक ब यक सोए से जागी. तीस वर्षों की कुम्भकर्णी नींद. यह कोई मामूली अचम्भा है? एक दम से हड़बड़ा कर जग गई. ऐसे कि जैसे कभी सोई ही न थी. या दूसरे शब्दों में कहूँ तो हिन्दी का सोता यक ब यक ज़मीन फाड़ कर फूटा. हरहर, हरहर. अनवरत और बेपरवाह. शब्द जो विस्मृत थे, अचानक खिड़कियाँ भड़भड़ाने लग गए. भाषा ने तूफान की तरह दस्तक दिया.

आप सोचते हैं मैं पढ़ने वालों के लिए लिखता हूँ. नहीं जनाब, बुरा न मानिएगा, ख़ुद से बात करने के लिए लिखता हूँ. कौन पढ़ेगा या नहीं पढ़ेगा – यह बात तो मेरे ज़ेहन में भी नहीं आती. पर जब आप पढ़ते हैं और आप से मेरा सहज और सच्चा संवाद बैठ जाता है तो बहुत सुंदर लगता है.

अंग्रेजी मुझे बहुत प्यारी है. आधी जिन्दगी यहाँ बिताई है तो कम से कम आधा अंग्रेज़ भी हूँ. अंग्रेजी की बुराई नहीं करूँगा. पर एक बात कहूँगा – कोई सूखी सी बात हो, तकनीकी या ग़ुस्से वाली बात हो, अंग्रेजी तुरंत मेरे सर पर हाथ रख देती है. पर कोई भावनात्मक बात हो, किसी बात ने मुझे गहरे छुआ हो जिसके बयान की दरकार हो, वहाँ बेचारी अंग्रेजी हाथ खड़े कर देती है और हिन्दी बरबस, अनायास बह निकलती है.

फेसबुक, तुमने मेरा समय तो बहुत लिया पर मेरी हिन्दी मुझे वापस कर दी. सौदा शायद मुफ़ीद ही रहा.

[आओ सीखें हिन्दी : ह्रस्व, दीर्घ व प्लुत का ज्ञान]

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