कर्नाटक का ISIS रिक्रूटर मोहम्मद शफी ग्लोबल आतंकी घोषित

नई दिल्ली. अमेरिकी विदेश विभाग की विश्व इकाई ने विशेष वैश्विक आतंकी की अपनी सूची में कर्नाटक के एक युवक को शामिल किया है. यह शख्स कर्नाटक के भटकल का रहने वाला है और इसका नाम मोहम्मद शफी अरमार है.

इसके साथ ही उसके खिलाफ प्रतिबंध लगाने का रास्ता साफ हो गया है. 30 साल के अरमार के खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया जा चुका है. आतंकी समूह ISIS के लिए भर्ती करने वाले मोहम्मद शफी अरमार को ‘छोटा मौलो’, ‘अंजन भाई’ और ‘यूसुफ अल-हिंदी’ नाम से भी जाना जाता है.

अरमार 2011 में पहली बार मुंबई पुलिस की लिस्ट में शामिल हुआ था. उस समय वो अपने भाई के साथ पाकिस्तान में था और इंडियन मुजाहिदीन के लिए काम करते थे.

अमेरिकी विदेश विभाग ने नवंबर 2015 के पेरिस हमले और मार्च 2016 के ब्रुसेल्स हमले के कोआर्डिनेटर को भी प्रतिबंधित कर दिया है. अमेरिका के स्टेट ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय आतंकियों पर विशेष रूप से तैयार सूची में अरमार का नाम भी शामिल कर दिया.

ये प्रतिबंध अमेरिका की विदेश नीति और राष्टीय सुरक्षा लक्ष्यों को हासिल करने के लिए संपत्तियों पर रोक एवं व्यापार प्रतिबंध का इस्तेमाल करते हुए व्यापक या चुनिंदा दोनों हो सकते हैं.

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को मोहम्मद शफी अरमार, ओसामा अहमद अतर और मोहम्मद ईसा यूसूफ साकिर अल बिनाली को विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी घोषित करते हुए एक लिस्ट जारी की.

इन लोगों पर आरोप है कि ये अमेरिकी नागरिकों के लिए खतरा हैं और आतंकवाद के काम में शरीक हो सकते हैं. इसके साथ ही अमेरिकी नागरिकों को हिदायत दी गई है कि वे अरमार, अतर और बिनाली से किसी तरह का संबंध ना रखें ना ही कोई डील या सौदा करें. अमेरिका में इन लोगों की संपत्ति को भी ब्लॉक कर दिया गया है.

इंडियन मुजाहिदीन कैडरों पर कार्रवाई शुरू होने के बाद अरमार अपने बड़े भाई के साथ पाकिस्तान भाग निकला. अरमार ने अंसार उल तौहिद नाम से संगठन बनाया जो बाद में आईएस से जुड़ गया. तकनीक का जानकार अरमार संपर्क के लिए फेसबुक एवं अन्य निजी मैसेंजर सर्विस का इस्तेमाल करता है.

अरमार भारत में विदेशी आतंकवादी संगठन का नेता और मुख्य नियोक्ता है. अरमार ने भारत में ISIS से सहानुभूति रखने वाले लोगों के कई दर्जन ग्रुप बनाए. ग्रुप के लोग भारत में हुई कई आतंकी गतिविधियों में शरीक हुए. इन लोगों ने अटैक की प्लानिंग, हथियार उपलब्ध कराना, लोकेशन की पहचान कराना और आतंकवादी ट्रेनिंग कैंप चलाने जैसे कामों में हिस्सा लिया.

वह ब्रेनवाश कर भारत, बांग्लादेश एवं श्रीलंका से युवकों को भर्ती करता है. वर्ष 2013 में नेपाल सीमा के पास गिरफ्तार यासीन भटकल से पूछताछ में अरमार के आईएस से जुड़े होने की बात सामने आई थी.

इससे पहले मध्य प्रदेश के रतलाम में आईएस के साथ जुड़े संदिग्धों की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की जांच के दौरान पहली बार उसका नाम सामने आया था.

आईएस संचालकों से पूछताछ में पता चला कि अरमार भारतीय युवकों को कट्टरपंथी बनाता है. वह युवकों को जुंड उल खलीफा-ए-हिंद में ऑनलाइन भर्ती किया करता था.

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