स्वतंत्र भारत में क्यों लागू है अंग्रेजों का बनाया टेम्पल एंडोमेंट एक्ट?

भारत में पहले आक्रांता मुसलमान तुर्क और मुग़लों ने भारत के लगभग 40,000 बड़े और सम्मानित मन्दिरो को तोड़ा.

उदाहरण अनेक हैं. लेकिन जो स्वतः संज्ञान में दिखते है वे है अयोध्या, काशी और मथुरा के राम, शंकर और श्री कृष्ण के मंदिर.

इन बर्बर आक्रांताओं वे सारे अत्याचार किये जो पाक कुरान और हदीस ने काफिरों के लिए निर्देशित किये हैं.

फिंर आये सात समुद्र पार से ईसाई बर्बर डकैत. उन्होंने यही काम गोवा में किया.

जब बंगाल में उन्होंने टैक्स कलेक्शन/ Extraction का जिम्मा लिया तो उन्होंने हर उस क्षेत्र को टटोला जहां से ये लूट संभव थी. और जिसको वे लूट कर अपने आप को आर्थिक रूप से समृद्ध कर सकते थे.

उदाहरण स्वरूप रेगुलेशन 4 के कानून के तहत उन्होंने पहले पुरी (गोवर्धन पीठ), जिसकी स्थापना आदि शंकर ने की थी, वहां पहले आने वाले तीर्थ यात्रियों पर टैक्स वसूलेने का कानून बनाया.

10 रुपये, 6 रुपये, 5 रुपये और 3 रुपये, और दो रुपये. उन्ही में से एक वर्ग का उन्होंने मंदिर में प्रवेश वर्जित किया – उनका संज्ञा थी – पुंज तीर्थी या कंगाल.

इन्ही पुंज तीर्थियों का नाम लेते हुए इस रेगुलेशन के लागू करने के 125 वर्ष बाद 1932 में डॉ आंबेडकर ने ये लिखा कि शूद्रों का मंदिर में प्रवेश वर्जित किया गया था.

किसने किया था? इस पर विचार करना अम्बेडकर जी ने उचित नही समझा.

इसी रेगुलेशन को आगे Endowment नामक भ्रामक शब्द का प्रयोग करते हुए टेम्पल एंडोमेंट एक्ट बनाया गया जिसके तहत भारत के पुरी सहित हजारों मंदिरों में भगवान को चढ़ाए गए धन को अपने कब्जे में कर इंग्लैंड भेजा जाता रहा. और शिक्षा और संस्कृति के केंद्र मन्दिरों को कमजोर किया जाता रहा.

लेकिन स्वतंत्र भारत में टेम्पल एंडोमेंट एक्ट क्यों लागू है? क्यों स्वतंत्र भारत में आपके दान किये गए पैसों को सरकार पिछले 69 साल से हड़पा जा रहा है? क्यों आप के दान दिए गए धन का अल्पसंख्यकों को दिया जा रहा है?

क्या हिंदुओं ने आज़ादी की लड़ाई इसीलिए लड़ी थी कि स्वतंत्र भारत की सरकार उनके श्रद्धा के केंद्र में आपके दान किए गए पैसे को कसाइयों और ईसाइयो के हित साधने में खर्च करे?

पूरे विश्व के हिन्दू इस नितांत सत्य को गम्भीरता से लें और प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखें कि राम मंदिर बनवाना आपके बूते का है कि नही वो हम 2019 के बाद देखेंगे. लेकिन इस कानून को आप संसद से अभी खारिज करवाकर भारतीय शिक्षा और संस्कृति के केंद्रों को स्वतंत्र भारत में खुली सांस लेने का मौका देकर हिन्दुओ में प्राण वायु का संचार कर सकते हैं.

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