माँ की रसोई से पंचफोरन : भारतीय मसाले का पंचामृत

मेरी रसोई में पांच बरनियों में पांच जिन्न हमेशा बंद रहते हैं. मैं जैसे ही गैस के चूल्हे पर कढ़ाई चढ़ाती हूँ, उन पाँचों की आँख एकदम से चमक उठती है. उनके बारीक बारीक दानें उछल उछलकर मेरी कढ़ाई में  कूदने को तैयार हो जाते हैं.

इनमें से किसी एक को भी नज़र अंदाज़ कर दूं तो मेरे पेट में ऐसी गड़बड़ कर देंगे जिससे मुझे उनको लिए बिना आराम ना मिले. और ये पांच रत्न है

साबुत जीरा
सौंफ
राई
मेथी दाना
कलौंजी

इन्हें कहा जाता है पंचफोरन. भारतीय रसोई में कोई भी व्यंजन पंचफोरन के बिना नहीं बनता, मात्रा कम ज्यादा हो सकती है, लेकिन इन पांच मसालों में से कोई न कोई उपस्थित होता ही है. और यदि इन पाँचों को ही शामिल किया गया है तो व्यंजन में चार नहीं पांच चाँद लग जाते हैं.

इन पाँचों को आप अलग अलग तो उपयोग में लाते ही हैं, लेकिन पंचफोरन बनाने के लिए इन पाँचों को बराबर मात्रा में अच्‍छी तरह साफ कर और तवे पर हल्‍का सा भुनकर बारीक पीसकर मसाले के रूप में भी उपयोग कर सकते हैं.

भारतीय मसालों में हरेक मसाले का अपना स्वाद और उसके अपने लाभ हैं. इसी तरह पंचफोरन के मसालों के भी अपने अपने लाभ हैं.

जीरा

कहते हैं जीरा तीन गुना अधिक तेज़ी से शरीर के वसा को कम करता है. एक गिलास पानी में एक बड़ा चम्मच जीरा रात भर भिगोकर रख दें. सुबह इसे उबालें और चाय की तरह इस पानी को पीएं. बचा हुआ जीरा खा लें. इसके रोजाना सेवन से शरीर में अतिरिक्त वसा निकल जाता है.

[आयुर्वेद आशीर्वाद : एसिडिटी को करें जादुई रूप से गायब]

मेथीदाना

कहते हैं जिसकी जितनी आयु हो उतने मेथीदाने लेकर धीरे-धीरे खूब चबा-चबाकर रोजाना प्रात: खाली पेट, या शाम को पानी की सहायता से  सेवन करना चाहिए, अगर चबाने में दिक्कत हो तो पानी की सहायता से निगल सकते हैं. ऐसा करने से व्यक्ति सदैव निरोग और चुस्त बना रहेगा और मधुमेह, जोड़ों के दर्द, शोथ(सूजन), रक्तचाप, बलगमी बीमारियां, अपचन आदि अनेकानेक रोगों से बचाव होगा. ओज, कान्ति और स्फूर्ति में वृद्धि होकर व्यक्ति दीर्घायु होगा.

सौंफ

एसिडिटी मिटाने के लिए सौंफ रामबाण दवाई है, मिश्री और सौंफ को बराबर मात्रा में लेकर खूब चबाचबाकर खाना चाहिए.

सौंफ में मौजूद एस्पार्टिक एसिड नामक तत्व के कारण पेट की गैस को मिटाने में सोंफ अद्भुत काम करती है.

सौंफ में मौजूद विटामिन C, एमिनो एसिड, कोबाल्ट, मैग्नीशियम और फ्लेवोनोइड्स आदि तत्व आँखों के स्वास्थ्य को बनाये रखने में मदद करते है. इससे उम्र के साथ होने वाली आँखों की कमजोरी दूर रहती है.

सौंफ को पीस पर पाउडर बना लें.  यह पाउडर आधा चम्मच और आधा चम्मच पिसी मिश्री मिलाकर दूध के साथ रात को सोते समय लें. नियमित कुछ समय इसे लेने से नेत्र ज्योति तीव्र होती है.

राई

यदि आपको अक्सर घबराहट, व्याकुलता  या हृदय में कम्पन या जलन रहती है तो हाथ व पैरों पर राई को मलें. ऐसा करने से रक्त परिभ्रमण की गति तीव्र होती है और और मानसिक उत्साह भी बढ़ता है.

कहते हैं राई के हिम या फाट से सिर धोते रहने से फिर से बाल उगने आरम्भ हो जाते हैं.

आयुर्वेद के अनुसार पेट में कृमि पड़ जाने पर थोड़ा सा राई का आटा गोमूत्र के साथ लेने से कीड़े समाप्त हो जाते हैं, और भविष्य में उत्पन्न नहीं होते.

कलौंजी

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