राष्ट्रपति चुनाव : क्या वाजपेयी की परंपरा को आगे बढ़ाएंगे प्रधान सेवक!

देश मे नये राष्ट्रपति के चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज हो गयी है. यूं तो राष्ट्रपति के पास संवैधानिक रूप से बेहद कम शक्तियां होती है पर वो राष्ट्र के प्रथम नागरिक होते है और जो व्यक्ति इस पद पर बैठता है उसका सम्मान बहुत बढ़ जाता है.

अनेक राजनेता इस समय राष्ट्रपति पद के लिये दौड़ में शामिल है क्योंकि उनका मानना है कि यदि एक बार वे इस पद पर बैठ गये तो पूरे देश में उनका सम्मान बढ़ जायेगा.

पर अतीत में कुछ ऐसे व्यक्तित्व भी राष्ट्रपति बने हैं जिनका सम्मान राष्ट्रपति पद पर बैठने से नहीं बढ़ा बल्कि ‘राष्ट्रपति के पद का सम्मान’ उनके राष्ट्रपति बनने के कारण बढ़ गया.

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ऐसे ही एक व्यक्तित्व थे, जो अपनी सादगी और मितव्ययिता के लिये विख्यात थे. जिन्होने पूरा जीवन कुछ गिने-चुने पेंट शर्ट में ही निकाल दिया.

राष्ट्रपति बनने से पूर्व जब वे एक साइंस कॉन्फ्रेंस में भोपाल आये थे तब वे रेलवे स्टेशन पर अपना सूटकेस खुद ही उठाकर सीढ़ियां चढ़ रहे थे.

जब कलाम साहब की मृत्यु हुई और उनकी मृत्यु के बाद उनकी सम्पत्ति की गणना की गयी तो जो जानकारी सामने आई उससे उनके प्रति सारे देश में सम्मान और अधिक बढ़ गया.

उनकी कुल जमा सम्पत्ति थी – 9 पेन्ट (2 DRDO यूनिफार्म), 4 शर्ट (2 DRDO यूनिफार्म), 3 सूट (1 पश्चिमी, 2 भारतीय), 2500 किताबें, 1 फ्लैट (अनुसंधान के लिए दान), 1 पद्मश्री, 1 पद्मभूषण, 1भारतरत्न, 16 डॉक्टरेट, 1 वेबसाईट, 1 ट्विटर अकाउंट, और  एक ईमेल अकाउंट.

TV, AC, गाड़ी, जेवर, शेयर्स, जमीन-जायदाद, बैंक बैलेंस कुछ नहीं. उन्होंने पिछले 8 सालों से पेंशन की रकम भी अपने गाँव की ग्राम पंचायत को दान दे दी थी.

डॉ एपीजे कलाम को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने देश का राष्ट्रपति बनाया था क्योकि वाजपेयी जी भी कलाम साहब की तरह संत प्रवृत्ति के थे.

अगले माह देश को नये राष्ट्रपति मिल जाएंगे. वर्तमान प्रधानमंत्री भी स्वयं को प्रधानसेवक कहते है, उम्मीद है वे वाजपेयी जी की परम्परा को ही आगे बढ़ाएंगे.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY