GST और व्यापारी, भाग-2

अब इसका व्यापारियों पर प्रभाव समझने का प्रयास करते हैं. आज हमारे व्यापारी भाई देश की सरकार को आबकारी शुल्क, सेवा कर, बिक्री कर, VAT इत्यादि से सरकारी खजाने का 50% से अधिक पैसा देते हैं. लेकिन वह लेता कहाँ से है. वह पैसा उपभोक्ता की जेब से ही लेता है जिस पर उपभोक्ता बहुत ना नुकुर करता है.

[GST : क्या और क्यों? भाग-1]

उपभोक्ता कर से बचना चाहता है और उसे हटाना चाहता है. इसमें उसकी मंशा होती है उस सामान को सस्ता करना, वहीं उपभोक्ता को दृढ़ विश्वास होने लगा है कि जो कर उसने बचाया है यदि वह दे भी दे तो सरकार तक या तो पैसा पहुंचेगा नहीं या किसी तरह पहुँच गया तो उसका सदुपयोग नहीं होगा.

चलिये किसी तरह यदि सारे व्यापारी बिना कर के सामान बेचने से मना कर दें तो उपभोक्ता को कर का पैसा देना होता है. आज की कर व्यवस्था मे भी बहुत सा सामान है जिस पर कर पहले की काटा जा चुका है और आप कुछ नहीं कर सकते हैं.

अब व्यापारी ने वह पैसा ले लिया और सरकार का प्रतिनिधित्व कर के सरकार को पैसा जमा करवा दिया. ध्यान देने की बात है कि यदि आपके प्रत्यक्ष कर में कुछ कमी है या गलती है तो आप स्वयं उसके उत्तरदायी है. आय कर का अधिकारी नहीं.

यह आयकर का अधिकारी यहाँ पर सरकार का एजेंट या प्रतिनिधि बन कर पैसा सरकार को दिलवा देता है. परंतु अप्रत्यक्ष कर में यही काम एक व्यापारी करता है. यहीं पर यह सोचने का विषय है कि यदि कुछ गलत है तो व्यापारी ज़िम्मेवार है.

यदि अधिक कर सरकार को मिले तो व्यापारी को कोई प्रोत्साहन नहीं पर यदि कुछ कमी रह जाये तो उसका उत्तरदायी व्यापारी को मान कर उसके ऊपर आर्थिक दंड का प्रावधान है. अब GST के बाद यह दंड बहुत अधिक बढ़ा दिया है और साथ में व्यापारी को हिरासत मे लेने का भी प्रावधान दे दिया गया है.

इसलिए यह व्यापारी सबसे अधिक दबाव में है. मेरा हमेशा से यह मानना है कि किसी भी देश कि अर्थव्यवस्था में व्यापारी की अहम भूमिका रहती है. भारतीय व्यापारी मूलरूप से बेईमान नहीं है परंतु व्यवस्थाएं उसे मजबूर करती हैं.

जिस प्रकार से हृदय आपके पूरे शरीर में रक्त की व्यवस्था करके उसे चलाता है उसी प्रकार देश की अर्थव्यवस्था में धन का प्रवाह व्यापार से होता है और व्यापारी हृदय की भांति काम करता है. GST सबसे बड़ा व्यावधान उसी के लिए है.

दूसरे, आप समझें कि इस देश मे 1.5 करोड़ के आसपास छोटी मोटी दुकानें है जो लगभग 18 करोड़ लोगों को रोजगार देती हैं उनमें से 95% से अधिक यानि 1.3 करोइ से अधिक के पास 500 वर्ग फुट से भी कम क्षेत्रफल है.

अब यदि वह व्यापारी दूसरे राज्य से कुछ सामान ला कर बेचता है तो सरकार की उम्मीद है कि उसके पास GST के मानकों के अनुसार कर भुगतान करके पिछले व्यापारी से लिए कर का हिस्सा वापिस लेने का प्रावधान है और सब काम electronic medium से है उसके अतिरिक्त समय-समय पर उसे रिटर्न दाखिल करनी है.

क्या देश का आज 30% व्यापारी यह कर सकने की क्षमता रखता है. मेरे विचार से नहीं. यह GST पश्चिमी देशों के प्रयोग हैं जहां पर दुकाने कम और लोग कम्प्युटर का अधिक प्रयोग करते हैं.

भारत जैसे विशाल अनेकता में एकता के देश में यह कहीं का copied फॉर्मूला चलेगा इसका मुझे संदेह है. GST के प्रावधान में व्यापारी को कर का भुगतान करके उस कड़ी के पिछले व्यापारी के चुकाए हुए कर के पैसे खाते में स्वयं आ जाएंगे.

अब दो बातें महत्वपूर्ण… यदि पिछले व्यापारी ने जमा नहीं किया या वह defaulter है तो आगे वाला व्यापारी फंस गया. क्योंकि यह सब काम सरकारी खाते के अनुसार है. पहले व्यापारी आपस में बैठ कर इसका निर्णय कर लेते थे. अब यह नहीं होगा.

दूसरे, पहले यदि व्यापारी गलत हो जाता था चाहे किसी भी कारण से तो मात्र कुछ प्रतिशत के आर्थिक दंड दे कर उसे छुटकारा मिल जाता था अब यह आर्थिक दंड कई गुना अधिक हो गया है.

तीसरे, लगभग 25 से 30 करोड़ लोग इस GST अधिनियम में अपने आपको पंजीकृत करेंगे. हर एक को मासिक रिटर्न भरनी है जिसके लिए बड़ा व्यापारी तो आज CA या accountant की मदद लेता है, फिर हर एक को इसकी मदद लेनी पड़ेगी.

ध्यान दीजिये इससे उसका बहुमूल्य समय इसी में निकल जाएगा तो उसके काम काज पर इसका दुष्प्रभाव ही रहेगा. हाँ इससे CA इत्यादि का काम फलने फूलने लगेगा.

मतलब स्पष्ट है कि बड़े व्यापारी रह जाएंगे और छोटे मोटे व्यापारी या कारखाने वाले की बर्बाद हो जाएंगे.

किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को सुचारु रूप से संचालन करने का काम तो CA इत्यादि करते है. मेरे CA मित्र क्षमा करेंगे, किसी भी CA के काम से धन एक जेब से दूसरी जेब में ही जाने का काम होता है. किसी भी प्रकार की उत्पादकता की बढ़ोत्तरी व्यापारी, किसान और कल कारखाने ही करते है.

हाँ cost account वाले लोग व्यापारी और कारखाने वाले को कहाँ-कहाँ पर कितना खर्चा होता है यह तो बताएँगे पर उस खर्चे को कम करना या नयी तकनीक का उपयोग तकनीकी लोग ही करता हैं.

मुझे कभी-कभी दुख होता है कि देश का इतना बेहतरीन दिमाग यानि CA का दिमाग, देश किन कामों में लगवा रहा है. यही बुद्धि यदि देश के विकास के लिए नए-नए project बनाए तो देश विश्व शक्ति और शीघ्र बन जाये.

यदि देश के तकनीकी विशेषज्ञ, किसान, कृषि विशेषज्ञ और आर्थिक विशेषज्ञ एक साथ मिल जाएँ और मात्र देश की प्रगति का ध्येय रख कर काम करें तो देश की प्रगति कई गुना बढ़ जाएगी.

अगले अंक मे GST का आम आदमी और सरकारी खजाने पर प्रभाव.

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