माहिष्मती गाथा समापन : समय की मार से दफन हो गई माहिष्मती

माहिष्मती गाथा-1 : ऐश्वर्यशाली और कला सरंक्षक माहिष्मती साम्राज्य के सबूत

माहिष्मती गाथा-2 : भारत का समृद्ध इतिहास और वामपंथी इतिहासकारों का षडयंत्र

माहिष्मती की गाथा -3 :  उस वीर प्रतापी राजा के साम्राज्य का प्रमाण देता शिवलिंग

माहिष्मती गाथा – 4 :  इतिहास को कलंकित करने के प्रयास को असफल करते प्रमाण

उपरोक्त लेख पढ़कर आप अब तक ये जान गए होंगे कि कैसे एक चक्रवर्ती सम्राट की गाथा को कलंकित करने का प्रयास किया गया है.  अंग्रेजों के राज के दौरान बिके हुए इतिहासकारों ने भारत के गौरवशाली इतिहास के साथ कैसा छल किया इसका उदाहरण गौतमीपुत्र शतकर्णी है.

दूसरी सदी के सबसे प्रभावशाली राजा का इतिहास में नाम न होना हमारे लिए शर्म की बात है.  हमारे लिए ये भी शर्म की बात है कि महान शतकर्णी साम्राज्य के एक वीर योद्धा के बारे में हम एक फिल्म देखने के बाद जान पाते हैं.

इस शोध के लिए हम बाहुबली के निर्देशक एस राजामौली का आभार प्रकट करते हैं, जिनकी एक फिल्म के बाद माहिष्मती के अस्तित्व पर लंबी बहस चली.  देश का वामपंथी धड़ा माहिष्मती को काल्पनिक बताने के षड्यंत्र रच रहा था.

ऐसे में इसकी सच्चाई जानने के लिए लम्बा थका देने वाला शोध किया गया, जिसका उद्देश्य एक महान सम्राट की कलंकित छवि को इस शोध द्वारा धोया जाना और माहिष्मती को काल्पनिक बताने वालों को करारा जवाब देना था.  ये तो आपकी प्रतिक्रियाए बता देंगी कि हम अपने काम में कितना सफल रहे.

दूसरी सदी के कई अवशेष महेश्वर के निकटतम क्षेत्रों में बिखरे पड़े हैं. इन पर समय की लम्बी प्रक्रिया ने रहस्य की चादर चढ़ा दी है. ये अवशेष अब कंटीले पेड़ों और अतिक्रमण में हमेशा के लिए दफन हो चुके हैं. गौतमीपुत्र का एकमात्र मंदिर यानी उसके बाहुबली साम्राज्य का आखिरी छोर अब तक सुरक्षित है. स्थानीय निवासियों ने इस मंदिर को समय की मार से सुरक्षित रखा है.

जब टूरिस्ट महेश्वर घूमने आते हैं तो उन्हें अहिल्या जी के बारे में ही बताया जाता है जबकि नदी के उस पार नावड़ाटौड़ी में स्थित एक महान शासक के गौरव के बारे में उन्हें नहीं बताया जाता. सरकार कुछ नहीं करेगी. इसका उदाहरण ये है कि हर साल पुरातत्व विभाग को जो बजट दिया जाता है, उसमे वे अन्वेषण के काम नहीं कर पाते. क्या आपने कभी देखा किसी सरकार ने पुरातत्व के लिए जो पैसा मंजूर किया, उसकी घोषणा की हो.  नहीं करते क्योंकि उनकी पोल खुल जाएगी.  लोगों को मालूम होगा कि देश की अनमोल धरोहरों के लिए सरकार कितनी गंभीर है.

अगली बार जब भी आप महेश्वर जाएं तो नावड़ाटौड़ी अवश्य जाएं. वहां के सिद्ध शिवलिंग के दर्शन करें जो गौतमीपुत्र ने खुद स्थापित करवाए थे.  वहां खड़े निराले नंदी जी को वास्तविक बनाने वाले कलाकार के बारे में आश्चर्य प्रकट करें.  वहां खड़े होकर नर्मदा मैया का नमन करें और धन्यवाद दें कि उसने अपने किनारों पर ऐसी महान सभ्यताओं को शरण दी.

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