फर्क होता है सौम्य और स्त्रैण में

समझने जाएँ तो यह बहुत साधारण सी चीज है. जब कोई बड़ी कंपनी के मजदूरों में असंतोष पैदा हो जाता है तो मैनेजमेंट एक अपने ही पिट्ठूओं की एक यूनियन खड़ी कर देती हैं लेकिन उसका काम तो मैनेजमेंट को विरोध करना होता है.

मनुष्य स्वभावत: हिंसाप्रिय नहीं होता इसलिए अगर ठीक से प्रसिद्धि हो तो यह यूनियन सब से अधिक संख्या जुटाती भी है.

लेकिन समय जैसे बीतता है, लोगों का धैर्य जवाब देने लगता है, वे अलग रास्ते तलाशने लग जाते हैं.

अब मैनेजमेंट दमन का रास्ता अख़्तियार करती है ताकि लोग दूसरों की तरफ अधिक संख्या आकृष्ट न हों.

मैनेजमेंट अपने पिट्ठू यूनियन को ही मान्यताप्राप्त यूनियन घोषित कर देती है और अगर कुछ देने की बात करती है तो इस यूनियन से ही बात करने की शर्त रखती है.

इससे दूसरी यूनियनों की तरफ मुड़े लोगों का मनोबल धीरे धीरे टूटने लगता है, लोग उनसे बिखरने लग जाते हैं.

फिर इस पिट्ठू यूनियन को जो मिल गया उसी को मुकद्दर समझ लिया वाली बात हो जाती है.

धीरे-धीरे आगे चलकर यही बात प्रचलित हो जाती है कि पिट्ठू यूनियन का ही मार्ग सही है, कुछ पाना हो तो इसी मार्ग पर चलना होगा, दूसरों के मार्ग पर सिवा नुकसान के कुछ नहीं है.

फिर गाने-तराने भी बनने लगते हैं कि लड़ाई वही है जो बिना खड्ग बिना ढाल के ही लड़ी जाये, वीर वही जो निरीह भेड़ की तरह कट जाये.

अब तक आप समझ ही गए होंगे कि मैं यूनियन की ही नहीं बल्कि भारत के स्वतन्त्रता संग्राम की बात कर रहा हूँ.

अहिंसा का महिमामंडन कुछ इतना ज्यादा हो गया कि कायरता अहिंसा कहलाने लगी. कृष्ण का चक्रधारी वीर रूप अप्रचलित हो कर एक स्त्रैण नाजुक सा रूप अधिक लोकप्रिय होने लगा. सौम्य और स्त्रैण में फर्क होता है यह बात भूलती चली गई.

एस एम पंडित नाम के एक चित्रकार हो गए थे. बहुत वर्षों पहले मुंबई में उनके चित्रों की प्रदर्शनी लगी थी. इसके लिए एस एम पंडित सभी clients को बेची अपनी कलाकृतियाँ मांग कर लाये थे.

उसमें एक शिव का चित्र था. ऐसा सशक्त शिव का चित्र मैंने दूसरा नहीं देखा। यह उसी की तस्वीर है, सामने एस एम पंडित स्वयं खड़े हैं.

जिसने भी फोटो लिया है, फोकस पंडित जी पर किया है और चित्र जरा सा distort हुआ है. फिर भी भाव समझ आते हैं. सौम्य ही हैं लेकिन किसी भी हिसाब से स्त्रैण नहीं.

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  1. बहुत दिनों बाद आपको पढ़कर अच्छा लगा सर। फेस बुक से तो ब्लॉक चल रहा हूँ , 20 दिन और बाकी हैं, तब तक कृपया यहां लिखिए।
    धन्यवाद ।

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