रूस में 16 साल से कम की लड़कियों को देना होगा ‘वर्जिनिटी टेस्ट’, कहाँ है नारीवाद के झंडाबरदार?

क्या आप जानते हैं क्षेत्रफल की दृष्टि से रूस दुनिया का सबसे बड़ा देश है, जिसने पृथ्वी के रिहायशी क्षेत्र में से 1/8 हिस्सा अपने कब्ज़े में लेकर रखा है.
क्या आप जानते हैं रूस जनसंख्या के हिसाब से पूरी दुनिया में नौवें नंबर पर है.
क्या आप जानते हैं रूस की राजधानी Moscow दुनिया के सबसे बड़े शहरों में से एक है.

फिर आप यह भी जानते होंगे कि इतने बड़े देश के लोगों की मानसिकता इतनी संकुचित है कि रूस के डॉक्टरों को कथित तौर पर यह निर्देश दिए गए हैं कि रूस में 16 साल से कम की लड़कियों को ‘वर्जिनिटी टेस्ट’ देना होगा.

भौतिक रूप से उन्नति कर चुके देशों की संस्कृति और जीवन शैली की नक़ल करनेवाले हमारे तथाकथित बुद्धिजीवी क्या इस मामले में रूस का अनुसरण करने पर विचार भी कर सकते हैं?

सनातन भारतीय परम्पराओं का मज़ाक उड़ाने वाले, उन्हें संकुचित मानसिकता का बताने वाले फ्री सेक्स के हिमायती क्या एक पल के लिए भी सोच सकते हैं कि हमारे देश में हम ऐसा कोई नियम या क़ानून बना सकते हैं?

जिम में जाकर बॉडी बनाने वाले टैटूधारी और आँखों पर काला चश्मा लगाने वाले क्या नहीं जानते स्वयंवर की वो प्रथा जहाँ नारी के योग्य वही पुरुष होता था जो शिव का धनुष तोड़ने की शक्ति रखता था, पानी में मछली की आंख देखकर उसे भेदने की कुशलता रखता था…

हमें चाहिए आज़ादी का नारा लगाने वाले मानसिक बंधक और झूठे नारीवाद के झंडाबरदार को क्या याद नहीं कि नारी का प्रणय निवेदन जब मर्यादा पुरुषोत्तम के लिए एक जन्म में पूरा करना संभव ना हो तो वो उसे अगले जन्म में पूर्ण कलाओं का स्वामी बन कृतार्थ कर अपना वादा अवश्य निभाता है.

समय, काल, परिस्थिति के अनुसार भले समाज के नियम बदले हों, लेकिन हमारे देश में नारी स्वतंत्रता पर कभी आंच नहीं आई. कम से कम इस आधुनिक युग में रूस में जारी इस नए आदेश की तुलना में हमारा देश हर मायने में समृद्ध और नारी को सम्मान देने वाला आधुनिक देश है.

यह अलग बात है कि सैनेटरी नैपकीन बेचने के लिए माहवारी के दिनों में भी बेदाग़ रहकर कराटे करती लड़कियों का विज्ञापन बनाकर, पुराने ज़माने में रजस्वला लड़कियों को रोजमर्रा के कामों से मुक्ति दे आराम के लिए तीन दिनों तक सबसे अलग रखने की प्रथा को छुआछूत से जोड़कर हमारी पुरानी परम्पराओं को दोषयुक्त साबित किया जा रहा है.

माहवारी में कराटे और पर्वतारोहण करती लड़कियों के पृष्ठ भाग को साफ़ बताकर आप सैनेटरी नैपकीन तो बेच लोगे लेकिन इस वजह से लड़कियों के शरीर में आ रहे शारीरिक बदलाव से उनकी प्रजनन क्षमता पर जो प्रभाव पड़ रहा है, उनकी शारीरिक संरचना और रासायनिक प्रक्रिया पर जो दुष्प्रभाव हो रहे हैं उसका क्या करोगे? उसका खामियाज़ा तो हमारी अगली पीढ़ी ही भुगतेगी.

ऐसे में लगता है कि आज़ादी के नाम पर प्रकृति से खिलवाड़ करनेवाले इन झंडाबरदारों को सबक सिखाने का यही एक तरीका है कि यहाँ भी रूस की तरह हिटलरशाही शुरू कर दी जाए… जिस तरह से हम विनाश की ओर मुंह कर तेजी से दौड़ रहे हैं, बेहतर है किसी भी तरीके से कम से कम मानव सभ्यता बची रहे.

बहरहाल, खबर के अनुसार रूस की इनवेस्टिगेटिव कमिटी ने सभी मेडिकल प्रफेशनल्स को यह कहा है कि वे 16 साल से कम उम्र की लड़कियों की यौन गतिविधियों को लेकर प्रमाण इकट्ठे करें.

‘द इंडिपेंडेंट’ की खबर के मुताबिक इस आदेश ने जनता को नाराज कर दिया है. डॉक्टरों से लेकर राजनेता भी इस फैसले का विरोध कर रहे हैं. उनका मानना है कि इससे घबराकर अब किशोरियां जरूरत के समय भी डॉक्टर से संपर्क नहीं करेंगी.

हालांकि रूस के स्वास्थ्य मंत्री ने साफ कर दिया है कि डॉक्टर्स को इस आदेश का पालन करना होगा और उन्हें पुलिस को 16 साल की सभी लड़कियों के वर्जिनिटी जाने, प्रेग्नेंसी, अबॉर्शन से जुड़ी जानकारी देनी होगी. इस ऑर्डर के मुताबिक डॉक्टर्स को लड़कियों के हाइमन की जांच करनी है.

बता दें कि कुछ महीने पहले ही रूस ने घरेलू हिंसा को आंशिक तौर पर आपराधिक श्रेणी से हटा दिया था, जिसके बाद दुनियाभर में इसकी आलोचना हुई थी.

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