इस ‘बनाना रिपब्लिक’ में चूसा जाता आम है मध्यम वर्ग

जान-बूझ कर “किसान” नहीं चुकाते लोन, वित्त मंत्रालय के साथ बैठक में बैंकर्स ने उठाया मुद्दा – जनसत्ता

कर्जमाफी के लालच में लोन नहीं चुकाते किसान – नवभारत टाइम्स

गुजरात में स्मृति ईरानी की सभा में “किसान” युवक ने की कर्ज माफी की मांग, स्मृति ईरानी पर फेंकी चूड़ियां, ‘कर्ज माफ करो’ के लगाए नारे – आजतक

झारखंड सरकार ने लिया निर्णय, अब ‘किसानों’ को मात्र 1% ब्याज दर पर ऋण मिलेगा – प्रभात खबर

कर्जमाफी के लिए पंजाब के ‘किसानों’ ने किया आंदोलन का ऐलान – ABP न्यूज़

राजस्थान में शुरू हुए किसान आन्दोलन में सड़क पर बहाया दूध, अब रोकेंगे सब्जियों की सप्लाई, डालेंगे जयपुर में पड़ाव – राजस्थान पत्रिका

राजस्थान में सरकार ने सोमवार को लहसुन की सरकारी खरीद करने की घोषणा की, आजादी के बाद पिछले 70 सालों में ऐसा दूसरी बार हुआ है. सरकार लहसुन 3200 रूपए प्रति क्विन्टल पर खरीदेगी – राजस्थान पत्रिका

देश के 52% ‘किसान’ बोले “सही दाम नहीं मिलता, इसलिए कर्जदार”, देवास मंडी में उमड़े “किसान”, प्याज रखने की जगह नहीं – पत्रिका

देश में हजारों कंपनियां मुनाफे में लेकिन टैक्स देनदारी जीरो – पत्रिका

मेन स्ट्रीम मीडिया (प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक) में आज के समाचारों में प्रमुख हैडलाईन्स हैं ये…

अब निजी क्षेत्र का नौकरीपेशा, अग्रिम करदाता / टीडीएस कटाता मजबूर नागरिक लुटा पिटा क्यों ना महसूस करे…

जब उसे होम लोन 8.50% से ले कर 9.55% की फ्लोटिंग रेट पर दिया जाता है, और ब्याज दर कम हो जाने के बावजूद “Switch Policy” का हवाला दे कर बैंक व फायनांस कंपनियां उनकी ब्याज दर कम करके वर्तमान दर लागू ही नहीं करती, लेकिन ब्याज दर बढ़ जाने की स्थिति में फ्लोटिंग का हवाला दे कर चुपचाप बढ़ा देती हैं…?

कोई सरकार अपने ईमानदार करदाताओं, आर्थिक धुरी बन चुके नागरिकों का कोई ख्याल ही नहीं रखती. उपर से अगर वो मध्यवर्गीय सामान्य वर्ग हो तो कोढ़ में खाज सरीखा हाल है ही…

कोई सरकारी योजना और घोषणा समेत कोई सरकारी लाभ सामान्य वर्ग, मध्यमवर्गीय हेतु है ही नहीं… वो बस चूसा जाता आम है, इस “बनाना रिपब्लिक” में…

मानो या मत मानो, सच बदलेगा थोड़े ही…

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