अवैध कब्जे का चौथा खंभा : नेशनल हेराल्ड

यंग इंडिया कंपनी जिसमें कुल 76%… यानी 38 फीसदी शेयर सोनिया गांधी और 38 फीसदी राहुल गांधी के हैं. बाकी शेयर सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीज के पास हैं.

इसी नेशनल हेराल्ड को चलाने वाली कंपनी एसोसिएट जर्नल्स ने कांग्रेस पार्टी से बिना ब्याज के 90 करोड़ का कर्ज लिया.

इसी नेशनल हेराल्ड की 1600 करोड़ की परिसंपत्तियां इसी यंग इंडिया ने… महज 50 लाख में हासिल कीं.

इसी यंग इंडिया द्वारा नेशनल हेराल्ड अखबार शुरू होने पर आज़ादी के बाद दशकों अपने मालिकान के तलवे चाटते आये… वैचारिक-दार्शनिक चारणों को देखिए !

इसी अखबार के मालिकानों को आपराधिक साजिश, आर्थिक घोटाले करने के आरोप में… इसी देश की कोर्ट ने अदालत में निजी पेशी से छूट नहीं दी.

इसी अखबार के शुरू होने पर उधारी के सिंदूर से सुहागिन बनी फिरती राजनैतिक-वैचारिक गाभिनों के सोहर तो सुनिये : बधाई हो.. देश में चौथा खंभा जन्मा है.

इसी नेशनल हेराल्ड के मौजूदा मालिकानों से कोर्ट ने पूछा :

आखिर कैसे 20 फरवरी 2011 को बोर्ड के प्रस्ताव के बाद एसोसिएट जर्नल प्राइवेट लिमिटेड को शेयर हस्तांतरण के माध्यम से यंग इंडिया को ट्रांसफर किया गया जबकि यंग इंडिया कोई अखबार या जर्नल निकालने वाली कंपनी नहीं है?

कांग्रेस द्वारा एसोसिएट जर्नल प्राइवेट लिमिटेड को बिना ब्याज पर 90 करोड़ रुपये से ज्यादा कर्ज कैसे दिया गया जबकि यह गैर-कानूनी है क्योंकि कोई राजनीतिक पार्टी किसी भी व्यावसायिक काम के लिए कर्ज नहीं दे सकती?

जब एसोसिएटेड जर्नल का ट्रांसफर हुआ तब इसके ज्यादातर शेयरहोल्डर मर चुके थे ऐसे में उनके शेयर किसके पास गए और कहां हैं?

आखिर कैसे एक व्यावसायिक कंपनी यंग इंडिया की मीटिंग सोनिया गांधी के सरकारी आवास 10 जनपथ पर हुई?

आजादी से बाद अभी बीते सालों तलक… सत्ताओं से लिव-इन रिलेशनशिप में रहते आये, पाले हुए दार्शनिक मनरेगा मजदूरों को : चौथे खंभे के इस अवैध पैदाइश पर सोहर की बजाय… देश के सामने इस जन्मते पाल्टी मुखपत्र की कुंडली में लिखे सवालों का जवाब खोजना चाहिए.

दुबारा प्रेग्नेंसी के बाद जन्मते बच्चे की कुंडली में मुकदमा है, पेशी है, जमानत है. घोटाला है, साजिश है, हड़पने और राजनीतिक चंदे की डकार जाने के योग हैं.

चौथे खंभे पर अनैतिक शारीरिक आर्द्रता विसर्जन के खानदानी खेल बंद हों : क्योंकि खानदानी आर्द्रता से सींचे हुए… लोकतंत्र की मजबूत कड़ी… फोर्थ पिलर से बदबू आती है.

पुनश्च : इस पूरी जानकारी में एक अहम रिश्ता हमेशा से छिपा रहा है और वह है सुमन दुबे का. सुमन दुबे जहां इंडिया टुडे के सम्पादक रहे है वही राजीव गांधी के प्रेस एडवाइजर भी थे.

राजीव की मौत के बाद, राजीव गांधी फाउंडेशन के स्थापना के वक्त से उसकी एक्सक्यूटिव कौंसिल में है. हां इस सबके साथ वह अरुण शौरी के साढू भी है यानी ब्रदर इन लॉ.

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