सलमान खान को क्यों अच्छे लगते हैं पाकिस्तानी गायक ही?

सलमान खान की नई फिल्म “ट्यूबलाईट” 23 जून शुक्रवार जुम्मे के दिन रिलीज हो रही है. फिल्म 1962 के भारत चीन युद्ध के समय की एक काल्पनिक कहानी पर आश्रित है जिसमें सलमान का बड़ा भाई सोहिल खान फौज में जब लड़ाई पर जाता है तो मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक हृदय विदारक दृश्यों को दर्शाया गया है. इस फिल्म का शूटिंग लद्दाख में की गयी है.

इस फिल्म के “तिनका तिनका दिल मेरा” गाना गाने के लिए सलमान मियाँ को हिन्दुस्तान में कोई गायक नहीं मिले. करोडों रुपये देकर उन्होंने यह गाना पाकिस्तान के गायक “राहत अली खान ” से गवाया. हालाकि यह बात भी अपनी जगह एकदम सही है कि भारत में राहत अली खान के मुकाबले और बहुत ही उम्दा गायक मौजूद हैं. इसके पहले भी सुल्तान फिल्म में, ‘जग घूमेया’, दबंग में ‘तेरे मस्त मस्त नैन’ और दबंग दो में ‘दगाबाज रे’ गाने भी सलमान खान ने राहत अली खान से ही गवाए थे.

काश्मीर में भारतीय सैनिकों की अमानुषिक हत्याओं के बाद शिव सेना और दूसरे राजनैतिक दलों ने भारत पाक क्रिकेट मैच का बहिष्कार करने की आवाज उठाई थी. पर जब शिव सेना के नेता ने “सुल्तान” फिल्म को नहीं दिखाने की आवाज़ उठाकर चमकाया था. तब सलमान चुपचाप जाकर उनसे मिल कर पता नहीं क्या गरमागरम कर आये थे, और मुम्बईयां मार पीट के ठेकेदार ने चुपचाप विरोध वापिस ले लिया था.

वैसे सलमान खान की हिन्दुस्तानियत पर कोई भी शक सुबहा नहीं कर सकता है. क्योंकि उनका जन्म इन्दौर में हुआ था. उनके पापा के रंगीन और रसीले किस्से “होलकर कालेज” तथा “क्रिश्चयन कालेज ” इन्दौर के पुराने प्रोफेसर आज भी सुनाते हैं.

छ: फुट से ज्यादा लम्बी ऊंचाई, गोरा चिकना भक्क मजबूत आदमी जो कभी इन्दौर के कालेजों की केन्टीन में निशाने तका करता था उसी के जींस सलमान में हैं. फिर उनकी मम्मी पक्की हिन्दू धर्म की हैं और पापा कट्टर नमाजी. इससे कोई फर्क सलमान को नहीं पडता वह गणेश उत्सव में गणपति की स्थापना करते हैं. जबकि इस्लाम धर्म में मूर्ति पूजा वर्जित है.

50 से लेकर 70 के दशक में भारत का सिनेमा दर्शक कट्टर हिन्दूवादी था. अगर फिल्म की हीरो हीरोईन मुस्लिम नाम की होती थी तो सिनेमा हॉल खाली पड़े रहते थे. इस कारण बड़े बड़े अभिनेता मुस्लिम होते हुए भी अपना नाम हिन्दू रखते थे.

दिलीप कुमार ने तभी तो अपना नाम युनुस से बदलकर दिलीप कुमार रखा. आज के भारत में नामों और कलाकार के धर्म से कोई फर्क नहीं पडता. तभी तो आमिर खान और शाहरूख खान के नरम दिल में पाकिस्तानियत भरी होने के बाद भी भारतीय धर्मनिरपेक्ष दर्शक ‘खानों की जमात” को संकुचित सोच से परे रखकर कला के क्षेत्र में खास तवज्जो देता है.

पर क्या सलमान खान को सच में अपनी नई फिल्म “ट्यूबलाईट” के लिये कोई दूसरा गायक पूरे हिन्दुस्तान में कहीं नजर नहीं आया. उनने पाकिस्तान जैसे भारत के दुश्मन देश के गायक ‘राहत अली खान’ को ही चुना.

शायद राज ठाकरे को अभी मालूम नहीं होगा कि राहत अली खान पाकिस्तानी हैं और वह ट्यूबलाईट में गाना गा रहे हैं. नहीं तो वह सलमान खान की ट्यूब लाईट जलाने जरूर मैदान में आ जाते. फिर पता नहीं उस ट्यूब लाईट को बुझाने की सलमान को कितनी फीस देना पडती.

खैर, सलमान और राज ठाकरे में जो हो सो होने दीजिए आप तो 23 जून को रिलीज हो रही फिल्म ट्यूबलाईट के गाने का मजा लीजिए.

हकीकत में सलमान पूरी तरह प्रोफेशनल आदमी हैं. उन्हें मालूम है कि पाकिस्तानी सिंगर लेने से उनकी फिल्म पाकिस्तान में जोर दार कमाई करेगी. यद्यपि ट्यूबलाईट फिल्म चीन भारत युद्ध की पृष्ट भूमि पर आधारित है. पर सलमान और दोनों दूसरे खानों की देशभक्ति और सच्चे भारतीय होने और पाकिस्तान से कोई लगाव नहीं होने का सबूत तो तब मिलेगा जब वह 1965 और 1971 के युद्धों के कथानकों को लेकर भी कोई फिल्में बनाए. 1962 में तो भारत की करारी हार हुई थी. उसके कुरेदने से तो पाकिस्तानी कूदेंगे ही.

 

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