हम जैसे लोगों के लिए वर्ल्ड क्लास सुविधाओं वाला स्टेशन! चाहिए क्या?

रेलवे स्टेशन पर होने वाली असुविधाओं के लिए हम रेलमंत्री, रेल मंत्रालय और प्रशासन को कोसते रहते हैं.

एयरपोर्ट पर हम बहुत प्रसन्न हो कर जाते हैं…. फ्लाइट कुछ घंटे लेट भी हो जाए तो कोई बात नहीं आराम से घूमते-फिरते, खाते-पीते समय निकल जाता है. औरतों के लिए तो विंडो शॉपिंग का बढ़िया स्थान होता है एयरपोर्ट.

अब ज़रा कल्पना करिए…. आप किसी स्टेशन पर जाते हैं वहाँ गेट पर दो सिक्युरिटी वाले खड़े हैं…. टिकट चेक करने के बाद आपके सामान को भी एक्सरे मशीन में चेक करते हैं उसके बाद ही आपको अंदर जाने दे रहे हैं.

अंदर एकदम चकाचक साफ-सुथरा प्लेटफार्म है और ट्रेन से उतरने वाले और ट्रेन में चढ़ने वाले दोनों के रास्ते भी अलग-अलग हैं, मतलब कोई किसी से टकरा नहीं रहा है.

एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर जाने के लिए सिर्फ सीढियाँ ही नहीं है एस्केलेटर भी है, बिल्कुल मॉल या एयरपोर्ट जैसा.

भूख लगी है तो ब्रांडेड फ़ूड कोर्ट भी है, साफ-सुथरा सजा-संवरा सा, जहाँ आप खाते हुए सेल्फी भी ले सकते हैं.

वेटिंग लाउंज में गद्देदार कुर्सियाँ लगी हुई हैं, टीवी चल रहा है…. मोबाइल और लैपटॉप के लिए चार्जिंग पोर्टल है और wifi भी है.

ट्रेन लेट हो गयी है तो टाइम पास के लिए शॉपिंग स्पेस भी है और यदि किसी कारण से ट्रेन कैंसिल हो जाती है तो होटल भी स्टेशन पर ही है.

आपकी जरूरत की सारी चीजें एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं, साथ में सुरक्षा के सारे इंतज़ाम भी हैं.

अभी की तरह नहीं, जहाँ स्टेशन पर जाने और बाहर निकलने के ऑफिशियल तो एक पर अनऑफिशियल 13 रास्ते होते हैं. वहाँ सिर्फ ऑफिशियल रास्ते ही होंगे जहाँ सिक्युरिटी गार्ड रहेगा.

हम लोगों को वर्ल्ड क्लास सुविधाओं वाला स्टेशन मिले इसके लिए रेल मंत्रालय कुछ रेलवे स्टेशनों को 45 साल की लीज़ पर निजी क्षेत्र को देगा.

निजी कंपनी या व्यक्ति को निश्चित समयावधि में रेलवे स्टेशन को विश्वस्तरीय सुविधाओं से परिपूर्ण करना होगा.

इसके लिए अभी सिर्फ 23 स्टेशनों का चयन किया गया है जिसमें से दो उत्तर प्रदेश के हैं – कानपुर सेंट्रल और इलाहाबाद.

इसके लिए ऑनलाइन नीलामी की जाएगी. 28 जून तक रेलवे की वेबसाइट पर बोली लगाई जा सकती है, 30 जून को रिजल्ट घोषित होगा.

स्टेशन को निजी क्षेत्र के हाथ में सौंपने के बाद रेलवे ट्रेनों के परिचालन, टिकट बिक्री, पार्सल और सुरक्षा व्यवस्था संभालने का काम करेगा.

रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था के अतिरिक्त निजी कंपनी को भी अपने सुरक्षा गार्ड स्टेशन पर रखने होंगे.

कुछ वर्षों के बाद कानपुर और इलाहाबाद के लोग स्टेशन पर ही कपड़े-मिठाई खरीद कर बेटियों की विदाई कर दिया करेंगे… फूफा-जीजा और मामा स्टेशन पर उतर कर वहीं से मिठाई खरीद कर लाएँगे.

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