तकनीक में भले पिछड़े हों, पर हमारे हौसलों में कमी नहीं

स्टेट बैंक में परसों लगभग सारा दिन बीत गया, एक छोटे से काम में. इंटरनेट बैंकिंग सेट करने में. बैंक से दिया हुआ पासवर्ड काम नहीं कर रहा था, कुछ ना कुछ हो ही जाता था कि अंत में जाकर अटक जाता था.

पहले भी दो बार ऐसा हुआ था कि मैंने नेट बैंकिंग का किट लिया था और एक्टिवेट कर नहीं पाया था. पर कैशलेस इंडिया के इस दौर में तो अब नहीं चलेगा.

मैंने भी ठान लिया कि अब तो सेट करके ही जाऊंगा. तो ब्रांच में मैडम की टेबल पर झंडा गाड़ कर बैठ गया. मैडम की चाय पी गया, उनके ठंढे पानी की बोतल खत्म कर दी.

मैडम का पेशेंस भी गजब का था, वो भी लगी रहीं. दूसरों के काम भी निबटाती रहीं, मेरे काम के लिए भी चार लोगों को फ़ोन किया, किस-किस को टेबल से उठवा कर बुलाया…

उन्होंने मुझसे पूछा, आपका वहाँ किस बैंक में एकाउंट है? मैंने बताया HSBC में.

उस पर एक स्वर में दूसरे दो लोग बोल उठे – HSBC तो बैंकिंग का लीडर है, गोल्ड स्टैण्डर्ड है… HSBC से हमारा क्या कंपेरिज़न है? उससे पार नहीं पाएंगे…

मैडम ने कहा – HSBC से पार नहीं पाएंगे तो बैंक बंद कर दीजिए और घर जाइये… पार पाना ही होगा… नहीं तो कल को HSBC का ब्रांच आपके सामने वाले चौराहे पर खुल जायेगा और आपका सारा बिज़नेस ले जाएगा…

खैर, मैं भी डटा रहा, मैडम भी लगी रहीं. एक बार मैंने नहीं कहा कि मैडम, मेरा इतना टाइम खराब हो रहा है… ना ही मैडम ने कहा कि ब्रांच बंद होने का टाइम हो गया है.

शाम 6 बजे तक मैडम बैठी रहीं, और अंत में मेरा नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग सेट कर के ही मानीं. उसके बाद भी उनका एक घंटे का काम अभी बाकी था.

मैं भी एक विजयी मुस्कान लिए ब्रांच से बाहर निकला. मेरा समय बर्बाद नहीं हुआ था… मेरा जो समय लगा वह इस आश्वासन की कीमत थी कि मेरा देश विश्व के श्रेष्ठतम से मुकाबला करने को तैयार है.

इंटरनेट स्पीड नहीं है, वेबसाइट हैंग हो जा रहा है, प्रोसेस में कुछ कमी है… पर हौसलों में कमी नहीं है… भरोसा रखें, हम तैयार हैं…

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