अलख के बोल

तमस के तम से क्या
रजस की धुंध से क्या
त्रिगुण का पसार सब
सत्व की भोर से क्या

निर्लेप को लेप कैसा
अक्षुण को क्षोभ क्या

भूत की स्मृति किसे
वर्तमान का भान क्या
काल की परिधि गई
भविष्य का सँघर्ष क्या

साक्षी को प्रवाह सब
एक क्षण क्या वर्ष क्या

प्राप्य का बोध किसे
अप्राप्य का ज्ञान क्या
जीवन से राग किसे
मृत्यु का शोक क्या

दृष्टा को बस दृश्य सब
लोप क्या अलोप क्या

आनंद क्या शोक क्या
लोक क्या परलोक क्या
भीतर की मौन ध्वनि में
बाहर का शोर क्या

निर्मोही को मोह कैसा
अघोर को घोर क्या

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