Success Story : क्योंकि स्मृति इरानी कभी सिर्फ़ बहू थी

क्योंकि सास भी कभी बहू थी की तुलसी एक ऐसा किरदार था, जिसमें उसे अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए अपने विरुद्ध खड़े हर व्यक्ति का दिल प्रेम से जीतना था. और जैसे छोटे पर्दे की यह कहानी जीवंत होकर उनके खुद के अस्तित्व की लड़ाई हो गई. एक ख़ूबसूरत मॉडल से महाराष्ट्र में बीजेपी महिला मोर्चे की प्रभारी और संगठन मंत्री और फिर केंद्र सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री तक के सफर की कहानी, स्मृति ईरानी.

वर्ष 1976 दिल्ली में पंजाबी-बंगाली परिवार में जन्मी स्मृति वर्ष 1998 में फेमिना मिस इंडिया सौंदर्य प्रतियोगिता में फाइनल में पहुंची थी. वर्ष 2000 में टेलीवीजन सीरियल हम है कल आज कल और कल के साथ अपने करियर की शुरुआत करने वाली स्मृति ने एकता कपूर के सास बहू सीरियल क्योंकि सास भी कभी बहू थी में लीड रोल निभाया और बन गई घर घर की चहेती बहू.

स्मृति ने पांच सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए भारतीय टेलीविजन अकादमी अवार्ड, चार इंडियन टेली अवार्ड और आठ स्टार परिवार पुरस्कार जीते हैं. वर्ष 2001 में स्मृति ने जीटीवी पर प्रकाशित रामायण में सीता का किरदार निभाया था. वर्ष 2006 में स्मृति ने बालाजी टेलीफिल्मस के अंतर्गत थोड़ी सी जमीन और थोड़ा सा आसमान टीवी सीरियल में सह निर्देशक की भूमिका निभाई. वर्ष 2008 में स्मृति ने डांस पे आधारिक टीवी सीरियल ये है जलवा को साक्षी तनवर के साथ होस्ट किया. वो ऐसी पहली हॉस्ट थी जिन्होंने अपनी प्रेग्नेंसी के पूरे दिनों में भी टीवी सीरियल होस्ट किया था.

ईरानी के राजनीतिक इतिहास पर नजर डाले तो स्मृति वर्ष 2003 में भाजपा में शामिल हुई थी. 2004 के आम चुनाव में चांदनी चौक लोकसभा क्षेत्र से कपिल सिब्बल के खिलाफ चुनाव स्मृति को हार का सामना करना पड़ा था. वर्ष 2004 में इन्हें महाराष्ट्र यूथ विंग का उपाध्यक्ष बनाया गया. इन्हें पार्टी ने पांच बार केंद्रीय समीति के कार्यकारी सदस्य के रुप में मनोनीत किया और राष्ट्रीय सचिव के रुप में भी नियुक्त किया.

वर्ष 2010 में ईरानी को भाजपा महिला मोर्चा की कमान सौंपी गई. वर्ष 2011 में स्मृति गुजरात से राज्यसभा की सांसद चुनी गई. इसी वर्ष इनको हिमाचल प्रदेश में महिला मोर्चे की भी कमान सौंप दी गई. वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव ये उत्तर प्रदेश के अमेठी से राहुल गांधी के विरूद्ध चुनाव मैदान में उतरी परंतु यहां भी हार का सामना करना पड़ा. और फिर विराजमान हुई केन्द्र सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री के गरिमामय पद पर. और आज कपड़ा मंत्रालय की मुख्य कमान हाथ में लिए बढ़ रही हैं विकास पथ पर.

सफलता मंत्र

स्मॄति की सफलता का राज यही है कि वह अपने परिवार के साथ साथ एक अभिनेत्री, निर्मात्री और राजनेता इन सभी में सामंजस्य बनाए बैठी है. बकौल स्मृति- हम जवान होते हैं तो गुस्सा जल्दी आता है, हम दूसरों की मजबूरियां नहीं देख पाते. दूसरों को हमेशा अपने दम पर आंकते हैं, लेकिन जैसे-जैसे वक्त गुज़रता है तो पता चलता है कि जीवन में हर चीज ब्लैक एंड व्हाइट नहीं होती, उसमें कुछ अच्छाइयां भी है, जिनमें से कुछ को अपनाने और कुछ को माफ करने की काबिलियत हमारे अंदर होनी चाहिए. वक्त हमें धीरे-धीरे धैर्य रखना और माफ करना सिखा देता है.

विरोध के स्वर

ये तो सभी जानते हैं कि नई सरकार में प्रधानमंत्री द्वारा मानव संसाधन मंत्री चुने जानेवाली स्मृति ईरानी ने मोदी के विरुद्ध 2004 में भूख हड़ताल की धमकी दी थी. 1 दशक के इस अंतराल ने उस कड़वाहट को मीठास में तो बदल दिया लेकिन स्मृति के विरोधियों को यह रास नहीं आया और उनके ग्रेजुएट न होने पर भी उन्हें मानव संसाधन मंत्री बनाए जाने पर विरोध होने लगा. केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी की शिक्षा से संबंधित जानकारी लीक करने वालों पर फिर गाज गिरी. शिक्षा से संबंधित जानकारी लीक करने के आरोप में दिल्ली विश्वविद्यालय ने पांच कर्मचारियों को निलंबित कर दिया.

यह उनकी सहृदयता ही थी कि इस संबंध में स्मृति ईरानी ने ट्वीट करके निलंबित कर्मचारियों को फिर से बहाल करने की अपील की. उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि सार्वजनिक जीवन में आलोचाना सुनने के लिए सबको तैयार रहना चाहिए. जिससे कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने स्मृति ईरानी के इस कदम का स्वागत करते हुए उन्हें धन्यवाद भी दिया.

आदर्श नारी

विवाद और विरोध को किनारे रखते हुए पूरे जोर-शोर से अपने काम में जुट चुकीं ईरानी ने कहा है कि उनका आकलन उनके काम से किया जाए.

और सच भी है आज जनता ने जिन ऊंचाइयों तक स्मृति को पहुंचाया है, उनमें अधिकतर वे महिलाएं हैं जो स्मृति को तुलसी के रूप में चाहती हैं तो कभी महिलाओं के विकास के लिए आदर्श नारी के रूप में. जिन्होंने आज तक उनके काम से उन्हें उन्हें आंका हैं, आगे भी वे उनके काम को लेकर समर्पण के लिए उन्हें सपोर्ट देती रहेंगी.

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